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	<title>अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>यूजीसी के विवादित अध्यादेश को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद  ने अपना रुख किया स्पष्ट जानिए क्या कहा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:47:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद]]></category>
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					<description><![CDATA[वर्तमान में इस विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके मुंबई 27 जनवरी 2026/शिक्षा तथा विधार्थियो के क्षेत्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>वर्तमान में इस विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके</strong></span></h3>
<p>मुंबई 27 जनवरी 2026/शिक्षा तथा विधार्थियो के क्षेत्र में कार्य करने वाले सबसे बड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आज यूजीसी के नए अध्यादेश को लेकर अपना मत स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में इस विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके।</p>
<p>अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना &#8220;विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026&#8221; के मूल उद्देश्यों की सराहना करती है, परंतु इन विनियमों में स्पष्टता और संतुलन अत्यंत आवश्यक है। अभाविप का मानना है कि यूजीसी तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र में अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहाँ प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अभाविप सदैव ही शैक्षिक परिसरों में सकारात्मक और समतायुक्त परिवेश बनाने की दिशा में कार्य करती रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन की पक्षधर रही है। आगामी वर्षों में &#8216;विकसित भारत&#8217; की संकल्पना को सिद्ध करने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।</p>
<p>वर्तमान में इस विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके।</p>
<p>ज्ञातव्य हो, यह विषय वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है अतः अभाविप का मानना है कि यूजीसी को इस संदर्भ में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए न्यायालय में शीघ्र हलफनामा दाखिल करना चाहिए।</p>
<p>डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, &#8220;शैक्षणिक परिसरों में में सौहार्द एवं समानता सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है, जिसके लिए अभाविप ने सदैव प्रयास किए हैं। शैक्षणिक परिसरों में सभी वर्गों के लिए सामाजिक समानता होनी चाहिए तथा परिसरों में किसी भी प्रकार के भेदभावों के लिए कोई स्थान नहीं हैं। इस विनियम को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं हितधारकों के मध्य भ्रांतियाँ व्याप्त हैं, जिन पर यूजीसी को सभी हितधारकों से संवाद करते हुए संबंधित भ्रांतियों को दूर करने हेतु तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने तथा सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने हेतु समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
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