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	<title>आरएसएस संगठनात्मक ढांचा &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>आरएसएस में अब घटेगी क्षेत्र प्रचारकों की संख्या, प्रांत व्यवस्था समाप्त होकर ‘राज्य प्रचारक’ का नया पद होगा सृजित ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 07:14:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[आरएसएस संगठनात्मक ढांचा]]></category>
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					<description><![CDATA[नागपुर/नई दिल्ली /भोपाल 28दिसंबर 2025/अपने सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने कार्य को और मजबूती प्रदान करने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए जाने के संकेत मिले हैं हालांकि संघ ने विधिवत और आधिकारिक तौर पर इसकी न तो घोषणा की है और न ही किसी अधिकारी ने पुष्टि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नागपुर/नई दिल्ली /भोपाल 28दिसंबर 2025/अपने सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने कार्य को और मजबूती प्रदान करने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए जाने के संकेत मिले हैं हालांकि संघ ने विधिवत और आधिकारिक तौर पर इसकी न तो घोषणा की है और न ही किसी अधिकारी ने पुष्टि की है। संघ सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था के अंतर्गत क्षेत्र प्रचारकों की संख्या घट सकती है प्रांत व्यवस्था समाप्त होकर ‘राज्य प्रचारक’ का नया पद बनाया जा सकता है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों के क्षेत्रीय ढांचे में भी परिवर्तन की संभावना है।</p>
<p>संघ सूत्रों की मानें तो 100 वर्ष पूरे होने पर संघ के संगठनात्मक व्यवस्था और आंतरिक ढांचा बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इस तैयारी और नई व्यवस्था के तहत संघ के क्षेत्र प्रचारकों की संख्या घटाई जा सकती है. अब तक पूरा देश क्षेत्र 11 में बंटा था जो अब 9 क्षेत्र तक सीमित रह जाएगा.</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक 100 साल पूरे होने पर संघ ने आंतरिक व्यवस्था और संगठन पदानुक्रम के पुनर्गठन पर सुझाव देने के लिए एक टीम बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट और सुझाव सौंप दिया है.यह कार्य संघ की जिस टोली को दिए गए थे उन्होंने अपने तरफ ये सुझाव दिए हैं. सूत्रों का कहना है कि सांगठनिक बदलावों को लेकर मिले सुझाव पर लगभग सहमति बन गई है. ये व्यवस्था आने वाले समय में शताब्दी वर्ष समारोह खत्म होने के बाद देखने को मिल सकता है.</p>
<p>उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर 2 से 1 क्षेत्र किया जाएगा. अब तक दोनों में दो अलग अलग क्षेत्र प्रचारक होते थे. राजस्थान को अलग क्षेत्र नहीं रखा जाएगा बल्कि नए व्यवस्था में राजस्थान को उत्तरी क्षेत्र में मिलाया जाएगा</p>
<p>मौजूदा व्यवस्था में उत्तर क्षेत्र में हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर राज्य आते हैं. अब आगे इसमें राजस्थान को भी जोड़ने की तैयारी है. प्रांत प्रचारक के जगह राज्य प्रचारक बनाए जाएंगे. संघ में प्रांत व्यवस्था को खत्म किया जा सकता है. संघ ढांचा में अब तक महत्वपूर्ण माने जा रहे प्रांत प्रचारक व्यवस्था अब आगे नहीं रहेगा.</p>
<h3>हर राज्य में होगा एक राज्य प्रचारक</h3>
<p>अब देश के हरेक राज्य के एक एक प्रचारक होंगे जिन्हें राज्य प्रचारक कहा जाएगा. मसलन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सात प्रांत प्रचारक के जगह अब एक राज्य प्रचारक होंगे. संभागीय प्रचारक: कमिश्नरी लेवल पर संभागीय प्रचारक की नई व्यवस्था शुरू होगी. राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में 75 से ज्यादा संभागीय प्रचारक की नई व्यवस्था होगी.</p>
<p>संभागीय प्रचारक के नीचे के व्यवस्था पहले के तरह ही जारी रहेगा. संभाग प्रचारक के नीचे विभाग प्रचारक और जिला प्रचारक व्यवस्था पूर्ववत चलता रहेगा. .</p>
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