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	<title>आव्हान &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>अफगानिस्तान से बर्मा  और तिब्बत से  श्रीलंका तक   सभी का डीएनए एक : भागवतजी</title>
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		<pubDate>Wed, 17 Jan 2018 03:43:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने कहा है कि अफगानिस्तान से बर्मा तक और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक रहने वाले सभी लोग एक हैं और सभी का डीएनए एक है. भागवत ने छत्तीसगढ़ के साइंस कालेज मैदान में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को जोड़ने वाले [&#8230;]]]></description>
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<div class="storymosimg">राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने कहा है कि अफगानिस्तान से बर्मा तक और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक रहने वाले सभी लोग एक हैं और सभी का डीएनए एक है. भागवत ने छत्तीसगढ़ के साइंस कालेज मैदान में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को जोड़ने वाले भारत के पूर्वज हैं. सबको अलग-अलग चित्रण दिखाई देता है, लेकिन सबके पूवर्ज एक ही थे, यह विज्ञान कहता है.</div>
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<p><b>&#8216;हम सब एक हैं, समान पूर्वजों के वंशज&#8217;</b></p>
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<div id="google_ads_iframe_/1007232/AajTak_Story_Mobile_300x250_Inarticle_0__container__">भागवत ने कहा कि हजार वर्षों से अफगानिस्तान से बर्मा तक चीन की तिब्बत की ढलान से श्रीलंका के दक्षिण तक जितना जनसमूह रहता है. उतने जनसमूह का डीएनए यह बता रहा है कि उनके पूर्वज समान हैं. यह हमको जोड़ने वाली बात है. आज हम एक दूसरे को भूल गए हैं, रिश्ते-नाते भूल गए हैं, आपस में एक दूसरे का गला पकड़कर झगड़ा भी कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता ये एक है कि हम एक ही घर के लोग हैं. हम समान पूर्वजों के वंशज हैं.</div>
</div>
</div>
<p><b>&#8216;हमारे पूर्वजों ने दुनिया को विज्ञान दिया&#8217;</b></p>
<p>भागवत जी ने कहा कि आज दुनिया में विश्व बंधुत्व की बात करने वाला और इसे निभाने वाला दूसरा कोई देश नहीं है, मात्र एक देश भारत है. आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा कि हम भारत के हैं. हम इस संस्कृति को मानने वाले हैं. उन पूवर्जों के वशंज हैं जिन्होंने कभी दुनिया को विज्ञान दिया. वो भी देश-विदेश गए लेकिन किसी को जीतने के लिए नहीं गए. सारी दुनिया पर उपकार किए. हमें फिर से अपने देश को ऐसा बनाना है. उन्होंने कहा कि यह गौ रक्षा क्यों, ग्राम विकास क्यों, जैविक खेती का आग्रह क्यों कर रहे हैं. क्यों हम चाहते हैं कि बिछड़े हुए वापस घर आ जाएं. क्यों हम चाहते हैं कि समाज में विविधता को लेकर भेदभाव, मतभेद, विषमता न हो क्योंकि यह सारी बातें हमारी स्वत्व का पोषक है.</p>
<p><b>भागवत ने समाज की एकता पर दिया बल</b></p>
<p>भागवत ने कहा कि छोटे-बड़े उपक्रमों के माध्यमों से सक्रिय होकर समाज जागरण करना यह अपना काम है और यह करना चाहिए, उसकी आवश्यकता है. सत्य की राह पर चलने वाले यशस्वी होते हैं. यह सत्यमेव जयते की भूमि है. इसलिए मन में आपस की एकता का स्मरण रखना होगा और संपूर्ण समाज के प्रति आत्मीयता को लेकर चलना होगा.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>देश को बड़ा बनाना किसी एक नेता का काम नहीं : भागवतजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Oct 2017 11:19:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कॉलेज जाने वाले आरएसएस स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुस्तान, हिंदुओं का देश है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि यहां दूसरे धर्म के लोग नहीं रह सकते। भागवत ने साथ ही यह भी कहा कि सरकार अकेले विकास नहीं ला सकती इसके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कॉलेज जाने वाले आरएसएस स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुस्तान, हिंदुओं का देश है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि यहां दूसरे धर्म के लोग नहीं रह सकते।</h4>
<h4>भागवत ने साथ ही यह भी कहा कि सरकार अकेले विकास नहीं ला सकती इसके लिए समाज के सभी वर्गों को साथ आना होगा। विकास के लिए हरदम सरकार का मुंह ताकने के बजाय नागरिकों के खुद कदम उठाने की अपील करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज यहां कहा कि सकारात्मक बदलावों के लिए पूरे समाज को तैयार किये जाने की जरूरत है। देश को बड़ा बनाना ​किसी अकेले नेता, नीति, पार्टी, अवतार और सरकार के अपने बूते का काम नहीं है। यह परिवर्तन का मामला है और हमें इसके लिए पूरे समाज को तैयार करना होगा।</h4>
<h4>भागवत ने आगे कहा कि हिंदू का मतलब है भारत मां की संतानें। यानी भारतीय पूर्वजों के वे वंशज, जो भारतीय संस्कृति के अनुसार रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी नेता या पार्टी अकेले देश को महान नहीं बना सकती इसके लिए समाज को भी प्रयास करना होगा। पुराने समय में लोग विकास के लिए भगवान का रुख करते थे लेकिन कलियुग में लोग सरकार के लिए इसको जिम्मेदार मानते हैं लेकिन वास्तव में सरकार यह तब ही कर सकती है जब समाज भी उसका साथ दे। समाज सरकार के पिता जैसा है। जब यहां के लोग खुद से अपने अंदर बदलाव लाएंगे तो सरकार और सिस्टम में भी इसका असर देखने को मिलेगा।</h4>
<p>&nbsp;</p>
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