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	<title>एक पेड़ पर 35 प्रकार के आम &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>एक ही पेड़ पर विकसित कर दिए 35 प्रकार के आम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:37:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदिशा 3 मई 2026/विदिशा के एक शिक्षक अपने नवाचारों और परिश्रम से क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरक उदाहरण बन गए हैं। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की नटेरन तहसील के गांव पमारिया के किसान बालकृष्ण विश्वकर्मा खेती में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। वे स्कूल में शिक्षक भी हैं। उन्होंने अपने यहां एक ही पेड़ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>विदिशा 3 मई 2026/विदिशा के एक शिक्षक अपने नवाचारों और परिश्रम से क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरक उदाहरण बन गए हैं।</p>
<p>मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की नटेरन तहसील के गांव पमारिया के किसान बालकृष्ण विश्वकर्मा खेती में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। वे स्कूल में शिक्षक भी हैं। उन्होंने अपने यहां एक ही पेड़ पर 35 प्रकार के आम विकसित करके चमत्कार कर दिया है।</p>
<p>श्री विश्वकर्मा ने अपने बगीचे में दुनिया की चर्चित जापानी किस्म ‘मियाजाकी’ आम को सफलतापूर्वक तैयार किया है। मियाजाकी आम को दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है और इसकी खास पहचान इसके रंग, स्वाद और गुणवत्ता के लिए है। यह आम बाजार में लगभग तीन लाख रुपए प्रति किलोग्राम मूल्य पर बिकता है। इतना ही नहीं उनके यहां 6 किलो वजनी ‘ब्रूनाई किंग’ आम और सबसे छोटे आकार वाला ‘अंगूर दाना’ आम भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।</p>
<p>सबसे अनोखी बात यह है कि श्री विश्वकर्मा ने एक ही पेड़ पर ग्राफ्टिंग पद्धति से आम की 35 अलग-अलग किस्में विकसित कर दी हैं यानी एक ही पेड़ पर 35 किस्म के आम फल रहे हैं।</p>
<p>इससे पहले वे आंवले की अच्छी पैदावार लेने में सफल रहे और आसपास के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया था।</p>
<p>यह कहानी केवल बागवानी की नहीं बल्कि जिज्ञासा, नवाचार और सतत सीखने की है। शिक्षक बालकृष्ण विश्वकर्मा ने साबित किया है कि यदि मन में कुछ नया करने का संकल्प हो तो खेती और प्रकृति भी प्रयोगशाला बन सकती है।</p>
<p>ऐसे लोग समाज को यह संदेश देते हैं कि ज्ञान जब मेहनत से जुड़ता है तो असाधारण परिणाम सामने आते हैं।</p>
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