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	<title>कच्चा तेल &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>Good story : युद्ध के बीच भारत ने थार के रेगिस्तान की गहराइयों से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल निकालकर  चौंका दिया दुनिया को</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 02:07:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने थार के रेगिस्तान की गहराइयों से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल निकालकर दुनिया को चौंका दिया है। जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से कंपनी ने प्रतिदिन 1202 बैरल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने थार के रेगिस्तान की गहराइयों से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल निकालकर दुनिया को चौंका दिया है। जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से कंपनी ने प्रतिदिन 1202 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हासिल कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।</p>
<p>ऑयल इंडिया के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले साल यहां प्रतिदिन केवल 705 बैरल तेल का उत्पादन हो रहा था। यानी कंपनी ने एक साल के भीतर अपने उत्पादन में लगभग 70 फीसदी की भारी वृद्धि की है। आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्थान फील्ड से कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चा तेल निकाला गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 32,787 मीट्रिक टन था। यह बढ़ोतरी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।</p>
<h3><strong>तकनीक ने बनाया असंभव को संभव</strong></h3>
<p>थार के रेगिस्तान से तेल निकालना कोई आसान काम नहीं था। यहां का कच्चा तेल बहुत गाढ़ा होता है, जिसे सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकाला जा सकता। इस चुनौती से निपटने के लिए ऑयल इंडिया ने आधुनिक साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में कुओं के अंदर गर्म भाप छोड़ी जाती है, जिससे गाढ़ा तेल पिघलकर पतला हो जाता है और उसे पंप करना आसान हो जाता है। कंपनी ने अब तक 19 कुओं में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल किया है। इसके अलावा फिशबोन ड्रिलिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का भारत में पहली बार इस्तेमाल कर तेल की धार को तेज किया गया है।</p>
<h3><strong>जैसलमेर से गुजरात तक का सफर</strong></h3>
<p>जैसलमेर के बाघेवाला क्षेत्र में निकलने वाले इस कच्चे तेल का सफर काफी दिलचस्प है। रेगिस्तान से तेल निकालने के बाद इसे टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा में ओएनजीसी (ONGC) की सुविधाओं तक पहुंचाया जाता है। वहां से इसे पाइपलाइन के जरिए वडोदरा स्थित इंडियन ऑयल (IOCL) की कोयाली रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां इसे पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पादों में बदला जाता है।</p>
<h3><strong>आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम</strong></h3>
<p>मौजूदा समय में भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें $100 के पार चली गई है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। ऐसी स्थिति में, राजस्थान के बाघेवाला जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ना आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।</p>
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