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	<title>कार्यवाही &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>मेटा की ऐसी अशिष्टता का रोज ही शिकार होते हैं यूजर, कार्यवाही बहुत जरूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 13:34:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[अशिष्टता का]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यवाही]]></category>
		<category><![CDATA[मेटा]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे Facebook, Instagram, WhatsApp और Threads जैसे नामी-गिरामी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मालिक मेटा की भारत में दादागिरी की हद ही हो गई है। सामान्य लोगों की Facebook और Instagram जैसी पोस्टों को मनमर्जी से डिलीट करने या उनकी पहुंच रोकने की हरकतें करते-करते अब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश ही फेसबुक से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>Facebook, Instagram, WhatsApp और Threads जैसे नामी-गिरामी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मालिक मेटा की भारत में दादागिरी की हद ही हो गई है। सामान्य लोगों की Facebook और Instagram जैसी पोस्टों को मनमर्जी से डिलीट करने या उनकी पहुंच रोकने की हरकतें करते-करते अब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश ही फेसबुक से हटा दिया गया।</p>
<p>इसके मालिक मार्क जुकरबर्ग शायद यह भूल गए कि इन सोशल प्लेटफॉर्म की मालिक कंपनी मेटा को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफा भारत से ही प्राप्त होता है। उन्हें शायद यह भी याद नहीं रहा कि पानी में रहकर कभी मगरमच्छ से बैर नहीं किया जाता।</p>
<p>वो भारत से बेतहाशा मुनाफा कमा रहे हैं और यहीं के प्रधानमंत्री की पोस्ट को डिलीट कर रहे हैं। हालांकि, ऐसी अशिष्टता और दादागिरी भारत के सामान्यजन रोज ही भुगतते हैं और अक्सर चुप रह जाते हैं।</p>
<p>अब भारत सरकार ने अपने देश के प्रधानमंत्री के साथ मेटा द्वारा की गई इस कथित अशिष्टता को गंभीरता से लिया है और जुकरबर्ग से माफी मांगने को कहा है।</p>
<p>इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्हें तीन दिन के भीतर माफी मांगने के लिए कहा गया है। यह पत्र 3 अगस्त को हुई संसदीय स्थायी समिति की बैठक के संदर्भ में लिखा गया। मामला प्रधानमंत्री के छात्रों के नाम वीडियो संदेश को फेसबुक से हटाए जाने से जुड़ा है। पत्र में कहा गया है कि यदि जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इसी सिलसिले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्होंने आईटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय को लिखा है कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी इंटरमीडियरी की नहीं, बल्कि पब्लिशर की जिम्मेदारी थी। इसलिए मार्क जुकरबर्ग को तीन दिनों के भीतर माफी मांगनी चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वर्तमान में मिल रही &#8220;सेफ हार्बर&#8221; सुरक्षा वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा, हिंसा और आपत्तिजनक कंटेंट की भरमार है। यदि ऐसे कंटेंट से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति मेटा प्रमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए, तो पूरे देश में एफआईआर की बाढ़ आ सकती है और जिम्मेदार लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>यह केवल एक वीडियो हटाए जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में अपने नियमों का इस्तेमाल निष्पक्ष रूप से कर रही हैं, या फिर मनमाने ढंग से। जब वह प्रधानमंत्री के संदेश को हटाने का दुसाहस कर सकती हैं तो इसमें कड़ा एक्शन होना ही चाहिए</p>
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		<title>कालेधन के खिलाफ एक और बड़ा कदम फर्जीबाड़ा करने वाली सवा लाख कम्पनियों पर कार्रवाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jan 2018 06:43:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यवाही]]></category>
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					<description><![CDATA[केंद्र सरकार ने मंगलवार को करीब सवा लाख और कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की। काले धन के खिलाफ लड़ाई के तहत सरकार विभिन्न नियमों का पालन नहीं करने वाली इन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है। केंद्र सरकार इससे पहले करीब 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण पहले ही रद्द [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class=" col-xs-12 col-sm-12 col-md-12">
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<p>केंद्र सरकार ने मंगलवार को करीब सवा लाख और कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की घोषणा की। काले धन के खिलाफ लड़ाई के तहत सरकार विभिन्न नियमों का पालन नहीं करने वाली इन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है।</p>
<p>केंद्र सरकार इससे पहले करीब 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण पहले ही रद्द कर चुकी है। वहीं इन कंपनियों से जुड़े 3.09 लाख निदेशकों को अयोग्य घोषित किया गया है। सरकार ने पिछले सप्ताह एक समीक्षा बैठक की थी। इसमें पहले जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया था, उनके खिलाफ की गई कारवाई की समीक्षा की गई। उसी बैठक में 1.20 लाख और कंपनियों का पंजीकरण रद्द करने का फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कॉरपोरेट मामलों के मंत्री पीपी चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिकॉर्ड से हटाई गई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करें।</p>
<p>मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी कि विभिन्न नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर करीब 1.20 लाख कंपनियों का नाम भी रिकॉर्ड से हटाया जाएगा। दिसंबर 2017 तक विभिन्न नियमों का पालन नहीं करने पर सवा दो लाख कंपनियों का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है। अवैध धन के प्रवाह को रोकने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।</p>
<p>एनसीएलटी को भेजे गए 1157 मामले<br />
मंत्रालय ने बयान में कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास पंजीकरण रद्द कंपनियों की बहाली के 1,157 मामले भेजे गए हैं। एनसीएलटी ने इनमें से 180 कंपनियों की बहाली पर विचार का आदेश दिया है। इन 180 में से 128 कंपनियों की बहाली संबंधित कंपनी पंजीयकों द्वारा की जा चुकी है। निदेशकों को अयोग्य घोषित किए जाने से संबंधित 992 मामले विभिन्न हाईकोर्ट में हैं। मंत्रालय ने कहा कि इनमें से 190 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।</p>
<p><strong>सख्ती के बाद नियमों का अनुपालन बढ़ा </strong><br />
कॉरपोरेट मामलों के मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि पंजीकरण रद्द करने और निदेशकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कंपनियों द्वारा नियमों का अनुपालन बढ़ रहा है। ऐसे में विलंब पर माफी योजनाओं के मामलों को भी प्राथिमकता के आधार पर देखने को कहा है, ताकि पात्र कंपनियों को इसका लाभ सुनिश्चित हो सके। एमसीए 21 पर अधिक से अधिक कंपनियां वार्षिक रिटर्न और लेखाजोखा दाखिल कर रही हैं। कंपनी कानून के तहत सभी तरह का ब्योरा एमसीए 21 पोर्टल के जरिए दाखिल किया जाता है।</p>
<p><strong>आयकर विभाग का भी कालेधन और कर चोरी पर </strong><br />
आयकर विभाग ने कालेधन और कर चोरी पर शिकंजा कसा है। उसने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के दौरान आठ महीने में कुल 2225 मामलों में अभियोजन की कार्रवाई की गई है, इससे पिछले वित्त वर्ष की यह संख्या 784 रही थी। इस तरह से इसमें 184 प्रतिशत की तेजी आई है। इसी तरह से इस अवधि में विभाग ने 1052 मामलों में जांच पूरी की है, जो पिछले वित्त वर्ष के पहले आठ महीने में 575 मामलों की तुलना में 83 प्रतिशत अधिक है।</p>
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