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	<title>केरल &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान शाम 4 बजे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 08:20:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[असम]]></category>
		<category><![CDATA[केरल]]></category>
		<category><![CDATA[तमिलनाडु पुडुचेरी विधानसभा चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 15 मार्च 2026/निर्वाचन आयोग रविवार को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान करेगा. इसके लिए शाम चार बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की गई है. इन राज्यों में निर्वाचन आयोग की ओर से वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी एसआईआर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">नई दिल्ली 15 मार्च 2026/निर्वाचन आयोग रविवार को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान करेगा<b>.</b></p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">इसके लिए शाम चार बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की गई है.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">इन राज्यों में निर्वाचन आयोग की ओर से वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया विवादित रही है. इसको लेकर निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के आमने-सामने रहे हैं.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">एसआईआर से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है.</p>
</div>
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		<title>केरल तिरुवनंतपुरम में भाजपा ने इतिहास रचा पहली बार बना भाजपा का महापौर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 14:36:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[केरल]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा मेयर]]></category>
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					<description><![CDATA[तिरुवनंतपुरम 26 दिसंबर 2025/दक्षिणी राज्य केरल में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। वहां पहली बार भाजपा का मेयर बना है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश (V V Rajesh) शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पहले भाजपा मेयर चुने गए हैं। यह दक्षिणी राज्य की राजनीति में एक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>तिरुवनंतपुरम 26 दिसंबर 2025/दक्षिणी राज्य केरल में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। वहां पहली बार भाजपा का मेयर बना है। भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.वी. राजेश (V V Rajesh) शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पहले भाजपा मेयर चुने गए हैं। यह दक्षिणी राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अहम घटना मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में अब तक BJP को कभी सत्ता नहीं मिली थी। पद संभालने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने कहा, &#8220;हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। सभी 101 वार्डों में विकास किया जाएगा&#8230; तिरुवनंतपुरम को एक विकसित शहर में बदला जाएगा।&#8221;</p>
<p>इससे पहले शुक्रवार की सुबह हुए मेयर चुनाव में 45 साल के राजेश को कुल 51 वोट मिले। उन्हें एक निर्दलीय पार्षद (एम. राधाकृष्णन) का भी समर्थन मिला, जबकि एक निर्दलीय पार्षद ने वोट नहीं दिया। इस तरह 100 सदस्यों की उपस्थिति वाले सदन में राजेश के पक्ष में 51 वोट हो गए। उनके खिलाफ खड़े CPIM के आरपी शिवाजी को 29 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के केएस सबरिनाथन को कुल 19 वोट मिले। बता दें कि BJP ने दिसंबर की शुरुआत में हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में 50 सीटें जीतीं थीं।</p>
<h2>CPM का 45 साल का कब्जा टूटा</h2>
<p>यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 45 वर्षों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर CPM का कब्जा था। BJP की यह जीत उस परंपरा को न सिर्फ तोड़ती है बल्कि दक्षिणी राज्य में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करती है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CPM और कांग्रेस ने मिलकर शहर को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था और पिछले कई वर्षों में ड्रेनेज, पानी और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।</p>
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		<title>केरल के कम्युनिस्ट- सहष्णुता के पक्षधर या असहमति के नृशंस हत्यारे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Oct 2017 17:39:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[कम्युनिस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[केरल]]></category>
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					<description><![CDATA[हरिहर शर्मा आजकल जबकि भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह केरल के दौरे पर हैं &#124; केरल के विषय में दो प्रकार की बातें की जा रही हैं &#124; संघ परिवार और भाजपा का आरोप है कि केरल में उनके कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर नृशंस हत्याएं हुई हैं &#124; कईयों को यह बात विचित्र लग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हरिहर शर्मा</p>
<div class="post-right">
<p class="post-excerpt"><span style="font-size: 16px;">आजकल जबकि भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह केरल के दौरे पर हैं | केरल के विषय में दो प्रकार की बातें की जा रही हैं | संघ परिवार और भाजपा का आरोप है कि केरल में उनके कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर नृशंस हत्याएं हुई हैं | कईयों को यह बात विचित्र लग सकती है, क्योंकि कम्यूनिस्ट शासन तो केरल में लम्बे समय से है, जबकि भाजपा ने पहली बार अपने किसी एक प्रत्यासी को जिताने में सफलता पाई है | कोई मुकाबला ही नहीं है | </span></p>
<div class="post-break-links"></div>
</div>
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<div dir="ltr">
<h3>दूसरी ओर बामपंथी लेखक और विचारक केरल को सदैव धर्मनिरपेक्षता का प्रमाण पत्र देते हुए प्रदेश को शांतिपूर्ण प्रदेश बताते है । बड़े गर्व से कहा जाता है कि राज्य में सभी धर्मों का सह-अस्तित्व है, किन्तु कभी कोई दंगे नहीं होते । किन्तु प्रचार तंत्र के माध्यम से गढ़ी गई यह छवि वास्तविक नहीं है । केरल के शांतिपूर्ण मुखौटे के नीचे राजनीतिक हिंसा और विनाश की काली छाया छुपी है ।</h3>
<h3>फाईनेंसियल एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी अन्य राज्य की तुलना में, केरल में कहीं ज्यादा &#8220;राजनीतिक दंगे&#8221; हुए हैं। सम्पूर्ण भारत में हुई राजनैतिक हिंसा के आधे से ज्यादा मामले केरल के हैं। 2015 में, केरल में प्रति मिलियन आबादी में 164 दंगों के मामले दर्ज किए गए थे- जो देश की उच्चतम दर है, उसके बाद बिहार का नंबर है, जहाँ ऐसे प्रकरणों की संख्या 12 9 है और उसके बाद कर्नाटक में इस प्रकार की 126 घटनाएँ हुई । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 में केरल, राजनीतिक या छात्र हिंसा के दर्ज मामलों में भारत के बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों से भी आगे निकल गया। कॉलेजों के छात्र, जिनमें से कई राजनीतिक रूप से प्रतिबद्ध हैं, नियमित रूप से पुलिस बलों के विरुद्ध और सार्वजनिक स्थानों पर एक-दूसरे के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए जाने जाते है।</h3>
<h3>जब आतंकवाद की बात आती है तो भारत चौथा सबसे अधिक प्रभावित देश है। भारतीय राज्यों के लिए माओवादियों का सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग के सहयोग से आतंकवाद के अध्ययन के लिए बने “National Consortium for Study of Terrorism and Responses to Terrorism” ने जो आंकड़े एकत्रित किये, उनसे पता चलता है कि तालिबान, इस्लामी राज्य और बोको हराम विश्व स्तर पर तीन सबसे खतरनाक आतंकवादी समूह हैं। इसके बाद प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) है। इस रिपोर्ट में देश भर में आतंकवादी समूहों द्वारा किये गए हमलों के जिम्मेदार विविध 45 सक्रिय संगठनों को चिन्हित किया है । इस अध्ययन से यह बात सामने आई कि अकेले नक्सलियों ने पिछले साल भारत में 43% आतंकवादी हमले किए थे।</h3>
<h3>अब सवाल उठता है कि केरल की राजनीतिक हत्याओं पर विचार करते समय ऊपर उल्लेखित खतरनाक आंकड़ों का उल्लेख करना क्यों महत्वपूर्ण है ? इसका सीधा कारण यह है कि केरल में सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) स्वयं को इनसे कितना भी दूर बताये, सचाई यही है कि इनके वैचारिक सलाहकार ये ही लोग हैं । दुनिया भर में कम्युनिस्टों को केवल एक ही विचारधारा में विश्वास है, &#8220;किसी भी तरह से पॉवर प्राप्त करना &#8220;। दुनिया भर के कम्युनिस्ट शासन ने लगभग 100 मिलियन लोगों को मार डाला है। भारत के आंकड़ों पर गौर करें तो, बुद्धदेव भट्टाचार्य ने 1997 में, पश्चिम बंगाल विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि 1977 (जब वे सत्ता में आए) और 1996 के बीच 28,000 राजनीतिक हत्याएं हुईं थीं। इस कथन की विशालता पर जाएँ तो पता चलता हैं कि एक महीने में औसतन 125.7 हत्यायें हुई, अर्थात हत्या की दैनिक दर चार थी। अगर आज कोई केरल विधानसभा में इस सवाल को उठाये, तो यहाँ भी आंकड़े हजारों में आएंगे।</h3>
<h3>शिक्षाविदों, वामपंथियों और तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार विकास के केरल मॉडल की जयजयकार का वीणावादन करते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि आम जनता को इस विकास की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है । जब 1957 में पहली बार केरल में कम्युनिस्टों का पदार्पण हुआ, तो उसके साथ ही उनके राजनीतिक दर्शन के साथ, असंतोष को दबाने के लिए राजनीतिक हत्याओं की कार्यप्रणाली भी साथ साथ केरल में आई। पिछले छह दशकों से ये &#8216;माफिया&#8217; हत्याकांड केरल में लगातार जारी हैं। वे चाहे सत्ता में हों या न हों, उनकी विचारधारा का विरोध करने वाले लोगों की हत्या का खेल बदस्तूर जारी रहता है । अपने राजनीतिक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, कम्युनिस्ट पार्टी और हिंसा का खुला गठबंधन है। उनके दर्शन में हत्या, सत्ता पाने का एक राजनीतिक साधन है।</h3>
<h3>इस अधिनायकवादी शासन के खिलाफ लड़ते हुए केरल के सैकड़ों युवा राष्ट्रवादियों ने अपना बलिदान दिया है। इस सच्चाई को आम जनता के सामने लाने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ।</h3>
<h3></h3>
<p>(क्रांतिदूत से साभार)</p>
</div>
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