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	<title>गंगा दशहरा &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>गंगा दशहरा आज,देश के गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़, घर पर भी यूं पा सकते हैं गंगा स्नान का पुण्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 01:31:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[गंगा दशहरा]]></category>
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					<description><![CDATA[धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसी पावन तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से मनुष्य के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसी पावन तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। इस वर्ष आज 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है सुबह से ही हरिद्वार प्रयागराज काशी सहित देश के तमाम पवित्र गंगा घाटों पर स्नान करने वालों की भीड़ है लोग स्नान के साथ दान पुण्य कर रहे हैं</p>
<p><strong>गंगा अवतरण की पौराणिक कथा</strong><br />
पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं, लेकिन उनके वेग को संभालना पृथ्वी के लिए संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा को विष्णुपदी और पुण्यसलिला के रूप में पूजा जाता है।</p>
<p><strong>गंगा स्नान से मिटते हैं जन्मों के पाप</strong><br />
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि गंगा का नाम लेने, उसका दर्शन करने, जल का स्पर्श करने और उसमें स्नान करने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से स्नान करने पर अनजाने में हुए दोष और कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।</p>
<p><strong>घर पर भी पा सकते हैं गंगा स्नान का पुण्य</strong><br />
यदि किसी कारणवश श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाते, तो भी वे घर पर गंगाजल की कुछ बूंदें स्नान के बाद अपने ऊपर छिड़क सकते हैं। स्कंद पुराण में बताया गया है कि माँ गंगा का स्मरण करते हुए स्नान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगाजल का स्पर्श और सेवन भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।</p>
<p><strong>हरिद्वार, प्रयाग और संगम स्नान का विशेष महत्व</strong><br />
मत्स्य, गरुड़ और पद्म पुराण के अनुसार हरिद्वार, प्रयागराज और गंगा-सागर संगम में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इन तीर्थों में गंगा दशहरा के दिन स्नान करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद उत्तम लोकों को प्राप्त करता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों के तट पर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।</p>
<p><strong>दस प्रकार के पापों से मिलती है मुक्ति</strong><br />
शास्त्रों में बताया गया है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और उपवास करने से मनुष्य दस प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। इनमें दैहिक, वाणी और मानसिक पाप शामिल हैं। बिना दी हुई वस्तु लेना, हिंसा करना और परस्त्री संगम दैहिक पाप माने गए हैं। झूठ बोलना, कठोर वचन कहना, चुगली करना और किसी को वाणी से दुख देना वाचिक पाप हैं। वहीं दूसरे के धन का लालच करना, किसी का बुरा सोचना और असत्य में आग्रह रखना मानसिक पाप कहे गए हैं।</p>
<p>गंगा स्नान के समय करें इस दिव्य मंत्र का जाप<br />
गंगा स्नान के दौरान भगवान नारायण द्वारा बताए गए मंत्र</p>
<p>“ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः”<br />
का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p><strong>गंगा दशहरा पर दस संख्या का विशेष महत्व</strong><br />
स्कंद पुराण के अनुसार गंगा दशहरा के दिन दस संख्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन दस पुष्प, दस फल, दस दीप, दशांग धूप और दस प्रकार के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए। दान की वस्तुएं भी दस की संख्या में देना शुभ माना गया है। साथ ही गंगा स्नान करते समय दस बार डुबकी लगाने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से माँ गंगा प्रसन्न होकर श्रद्धालु के सभी कष्टों और पापों का नाश करती हैं।</p>
<p><strong>डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)</strong>: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए शब्द शक्ति न्यूज़ उत्तरदायी नहीं है</p>
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		<title>गंगा दशहरा पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में चढ़ाएंगे 300 फीट की चुनरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 15:39:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[गंगा दशहरा]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल 24 मई 2026/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आह्वान किया है कि हिंदू संस्कृतिमें पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले गंगा दशहरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भोपाल 24 मई 2026/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आह्वान किया है कि हिंदू संस्कृतिमें पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले गंगा दशहरा पर्व के पावन अवसर पर प्रदेश में संचालित &#8216;जल गंगा संवर्धन अभियान&#8217; को व्यापक जनभागीदारी आधारित एक बड़ा जन-आंदोलन बनाया जाए। इसी दूरगामी विजन के अनुक्रम में सोमवार, 25 मई को प्रदेश के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में व्यापक जल संरक्षण गतिविधियों और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे जन-जन को इस पुनीत कार्य से सीधे जोड़ा जा सके। सभी प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्र में जनसमुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से स्थानीय कुओं, नहरों, बावड़ियों और तालाबों की साफ-सफाई, घाटों की स्वच्छता और पुराने बंद पड़े बोरवेल के पास रिचार्ज पिट निर्माण जैसे जलसंरक्षण के कार्यों में श्रमदान के लिए प्रेरित करेंगे।</p>
<p>उज्जैन में भव्य &#8216;शिप्रा तीर्थ परिक्रमा&#8217;- मुख्यमंत्री चढ़ाएंगे 300 फीट की चुनरी</p>
<p>इसी कड़ी में, उज्जैन में गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा 25 और 26 मई को दो दिवसीय भव्य &#8216;शिप्रा तीर्थ परिक्रमा&#8217; का आयोजन किया जा रहा है, जो व्यापक जनभागीदारी का एक अनुपम उदाहरण बनेगा। यह महत्वपूर्ण परिक्रमा रामघाट से प्रारंभ होकर नृसिंहघाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम शनि मंदिर से होते हुए दत्तअखाड़ा घाट पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, गंगा दशमी के अवसर पर यह परिक्रमा रणजीत हनुमान मंदिर, भैरवगढ़, सिद्धवट, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका और गोपाल मंदिर से होते हुए पुनः रामघाट पर पहुंचकर संपन्न होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा स्वयं माँ शिप्रा को 300 फीट की चुनरी अर्पित की जाएगी।</p>
<p>इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्यता प्रदान करने के लिए रामघाट पर पंडित ढोली बुवा द्वारा 17 मई से प्रतिदिन सायं 7:30 बजे &#8216;हरिकथा&#8217; का गायन किया जा रहा है। दत्तअखाड़ा घाट पर आयोजित भजन संध्या में इंदौर के श्रेयश शुक्ला और जबलपुर की लोक गायिका संजो बघेल भजनों की प्रस्तुति देंगे। परिक्रमा के मुख्य आकर्षण के रूप में 26 मई को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) के बैंड की शानदार प्रस्तुति होगी, जिसके साथ ही मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर एवं साथियों द्वारा भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।</p>
<p>जल स्रोतों के संरक्षण से जीवात्मा को मिलता है मोक्ष</p>
<p>धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा का पर्व मुख्य रूप से माँ गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित होने की खुशी में मनाया जाता है, जिससे प्रकृति और जन-जीवन धन्य हुआ था। ऐसी गहरी आस्था है कि इस अत्यंत पवित्र दिन पर पवित्र नदियों में स्नान, श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चन और जल स्रोतों का संरक्षण करने से मनुष्य के दस तरह के पापों का नाश होता है और राजा भगीरथ के पूर्वजों की तरह ही जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पावन अवसर के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रदेशभर में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जिसके प्रथम चरण में जनसमुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से स्थानीय कुओं, नहरों, बावड़ियों और तालाबों की साफ-सफाई, घाटों की स्वच्छता तथा पुराने बंद पड़े बोरवेल के पास रिचार्ज पिट निर्माण जैसे श्रमदान के कार्य किए जाएंगे। इसके बाद द्वितीय चरण में गंगा दशहरा के आध्यात्मिक विषय पर आधारित सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक जिले में 4 से 5 ऐसे उत्कृष्ट कार्यों को चिन्हित किया जाएगा जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और नगरीय क्षेत्रों में नगर निगम आयुक्त या परियोजना अधिकारी इसके नोडल अधिकारी होंगे।</p>
<p>&#8216;जल गंगा संवर्धन अभियान&#8217; के तहत अब तक 1.91 लाख से अधिक कार्य हुए पूरे</p>
<p>इस पूरे जन-आंदोलन के केंद्र में &#8216;जल गंगा संवर्धन अभियान&#8217; है, जिसके तहत जल आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हो रही है। &#8216;जल गंगा संवर्धन अभियान&#8217; प्रदेश में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अब तक प्रदेश में 1 लाख 911 हजार 294 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अभियान के अंतर्गत कुल लक्षित कार्यों 3,68,673 में से 1,91,294 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। जिनमें 84,468 कार्य पूरी तरह संपन्न और 1,06,826 कार्य भौतिक रूप से पूर्ण हो चुके हैं। विशेष रूप से 19 मार्च के बाद से इस अभियान में अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है, जिसके अंतर्गत कुल 1,41,540 कार्यों को आगे बढ़ाया गया, जिसमें 43,139 पूर्ण और 98,401 भौतिक रूप से पूर्ण हो चुके है। इस युगांतकारी अभियान की वित्तीय व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा 10,666.62 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 6,293.48 करोड़ (59 प्रतिशत) की राशि का अब तक उपयोग किया गया है।</p>
<p>अभियान के तहत भूजल संवर्धन को नई दिशा देते हुए रिकॉर्ड 90,814 डग वेल रिचार्ज और ग्रामीण समृद्धि का आधार बनने वाले 56,198 फार्म पॉन्ड के कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण और जल संतुलन को सुदृढ़ करने के लिए जल संरक्षण एवं रिचार्ज श्रेणी में 29,096 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। बुनियादी ढांचे के कायाकल्प के रूप में 4,678 वाटरशेड संबंधी कार्य, 2,663 पारंपरिक जल संरचनाओं का रिपेयर एवं मेंटेनेंस और 1,133 सिंचाई अधोसंरचना के कार्य कुशलता से पूरे किए गए हैं। इस सफल जन-आंदोलन में जहाँ 115 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार हुआ है, वहीं भावी पीढ़ी के जन-स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए &#8216;वॉव&#8217; ऐप के माध्यम से स्कूलों में 3,670 पानी की टंकियों की सफाई सुनिश्चित की गई है।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश को जलसमृद्धि की ओर ले जाने वाला यह महाअभियान एक युगांतकारी जल क्रांति का सर्वोतम उदाहरण बन कर उभरा रहा है।</p>
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