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	<title>ग्वालियर मेला बायस्कोप &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>“देखो-देखो बायस्कोप देखो…” ग्वालियर मेले में जीवंत हो रहा है बचपन का संसार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:07:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर मेला बायस्कोप]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर 15 जनवरी 2026/ “देखो देखो बायस्कोप देखो, दिल्ली की कुतुबमीनार, आगरे का ताजमहल और घर बैठे सारा संसार देखो…” यह आवाज़ सुनते ही कभी शहरों और गांवों की गलियों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ उमड़ पड़ती थी। यह वह दौर था जब न मोबाइल फोन थे और न ही टीवी हर घर तक पहुंचा था। मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के ये परंपरागत साधन भले ही समय के साथ कम होते गए हों, लेकिन उनकी स्मृतियां और आकर्षण आज भी लोगों को खींच लाने की ताकत रखते हैं। ग्वालियर व्यापार मेले में अतीत की मधुर स्मृतियों को संजोए बायस्कोप को देखकर लोगों का बचपन एक बार फिर से जीवंत हो उठता है।</p>
<p>श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेले में फैसिलिटेशन सेंटर के बाजू में लगे शिल्प बाजार क्षेत्र में ठिगने कद के छोटू भैया द्वारा लगाया गया पारंपरिक बायस्कोप सैलानियों, खासकर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पुराने फिल्मी गानों की मधुर धुनों के बीच बायस्कोप में आगे बढ़ती आकर्षक चित्रों की रील दर्शकों को सीधे अतीत के उस दौर में ले जाती है, जहां कौतूहल और आनंद एक साथ चलते थे।<br />
छोटू भैया के इस बायस्कोप में ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग पर स्थित सहस्त्रबाहु मंदिर, तेली का मंदिर, मान मंदिर व ग्वालियर का सूर्य मंदिर, आगरा का ताजमहल, दिल्ली का लाल किला व इंडिया गेट एवं हिमालय की बर्फीली चोटियों के साथ-साथ नई और पुरानी फिल्मों के आकर्षक चित्र भी दिखाए जा रहे हैं। छोटू भैया का मूल नाम प्रेमचंद उमरैया है। हँसमुख स्वभाव व मनोरंजनयुक्त हाजिर जवाबी की बदौलत उन्हें सर्कस व प्रसिद्ध जादूगरों के साथ भी काम करने का अवसर मिलता रहा है। छोटू भैया कहते हैं कि मेले में बायस्कोप चलाकर व उसके साथ छोटे-छोटे खिलौने बेचकर वे अपनी जरूरत के लायक कमाई कर लेते हैं। आमदनी का जिक्र छिड़ने पर छोटू खिलखिलाकर बोले कि इस पारंपरिक व्यवसाय से मुझे जो सुकून मिलता है, उसका कोई मोल नहीं।<br />
ग्वालियर व्यापार मेले की चहल-पहल के बीच यह बायस्कोप न सिर्फ बच्चों के लिए नया अनुभव बन रहा है, बल्कि बुजुर्गों के लिए बचपन की यादों का खिड़की भी खोल रहा है। आधुनिक मनोरंजन के इस दौर में बायस्कोप का यह अनूठा प्रयास मेले में सांस्कृतिक विरासत और लोक मनोरंजन की मिठास घोल रहा है।</p>
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