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	<title>चित्र भारती &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>नवोदित कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने व फिल्मों में देशहित को बढ़ावा देने भारतीय चित्र साधना की हुई स्थापना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Sep 2019 07:15:38 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[चित्र भारती]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; -चित्र भारती मध्य भारत की हुई कार्यशाला, फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर का शुभारंभ -नवोदित कलाकारों से आग्रह, बड़ी संख्या में फेस्टिवल में हों शामिल  ग्वालियर। भारतीय परिवार दुनिया के लिए सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो वास्तव में एक परिवार कहलाते हंै। यही बाद में कुटुम्ब बन जाते हैं। कुटुम्ब परिवारों की महत्वता को जीवित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">-चित्र भारती मध्य भारत की हुई कार्यशाला, फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर का शुभारंभ</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">-नवोदित कलाकारों से आग्रह, बड़ी संख्या में फेस्टिवल में हों शामिल </span></strong></p>
<p>ग्वालियर। भारतीय परिवार दुनिया के लिए सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो वास्तव में एक परिवार कहलाते हंै। यही बाद में कुटुम्ब बन जाते हैं। कुटुम्ब परिवारों की महत्वता को जीवित रखने में फिल्में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आज जरूरत है कि जल संरक्षण, पर्यावरण, स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि पर फिल्मों का निर्माण हो। आज के नवोदित कलाकार शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से देश भक्ति व देश हित से जुड़ी फिल्में बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। ऐसे नवोदित कलाकारों को एक मंच मिल सके। इसके लिए भारतीय चित्र साधना की स्थापना की गई है। आगामी 21, 22 एवं 23 फरवरी 2020 को तीसरा राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव अहमदाबाद में होने वाला है, जिसमें नवोदित कलाकार शामिल हो सकते हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत के प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसौदिया ने चित्र भारती मध्य भारत द्वारा आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में कही। इस दौरान अतिथियों ने फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर का शुभारंभ भी किया।</p>
<p>श्री सिसौदिया ने फिल्म फेस्टिवल की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहला फिल्म फेस्टिवल वर्ष 2016 में इन्दौर में हुआ। इसके बाद 2018 में दिल्ली में फेस्टिवल हुई, जिसमें 850 फिल्में शामिल हुईं और अब अहमदाबाद में होने वाला है, जिसमें हजारों कलाकार शामिल होने वाले हैं। भारतीय चित्र साधना की स्थापना इसी उद्देश्य को लेकर की गई है, जो आज साकार रूप लेती जा रही है। यह आयोजन देश भर का है और इसमें छोटे से लेकर बड़े कलाकार शामिल होकर अपनी फिल्मों का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि फूहड़ता व झूठ का पिटारा फिल्मों में ही नहीं बल्कि विज्ञापनों में भी देखने को मिल रहा है, इसलिए आज जरूरत है कि भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों पर आधारित फिल्मों का निर्माण किया जाए। रचनात्मकता पर ध्यान दिया जाए। जब तक हम दूसरे की पीड़ा को नहीं समझेंगे, तब तक रचनात्मक कार्य नहीं कर सकते, इसलिए दूसरों की पीड़ा को सबसे पहले समझना होगा। आज हम लोक कलाओं को भूलते जा रहे हैं। पहले यह लोक कलाएं हमारे व्यक्तित्व को निखारने का माध्यम होती थीं। आज कई बड़े कलाकार इन्हीं लोक कलाओं से छोटी-छोटी बारीकियां सीखकर आगे बढ़े हैं, इसलिए लोक कलाओं को जीवित करने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। प्रांत प्रचार प्रमुख श्री सिसौदिया ने कहा कि अंचल के युवा कलाकारों को फिल्मों के माध्यम से अपने व्यक्तित्व को परखने एवं उनके हुनर को निखारने के लिए ग्वालियर में आगामी नवम्बर माह में कार्यक्रम होगा, जिसमें आप सभी लोग शामिल हो सकते हैं।</p>
<p>महारानी लक्ष्मीबाई नाटक के निर्देशक चन्द्रप्रकाश सिकरवार ने कहा कि आज बिना किसी उद्देश्य के समाज में फिल्में परोसी जा रही हैं, इसलिए फिल्मों का निर्माण करने से पहले उद्देश्य के बारे में सोचना होगा। फिल्मों में भारतीय संस्कृति व हमारी धरोहर आदि को समाहित करना होगा। आने वाले समय में चित्र भारती इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती है। आज हमें विषय पर काम करने की सबसे अधिक जरूरत है। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत के सह प्रचार प्रमुख विजय दीक्षित, नारायण भदौरिया, नरेन्द्र सक्सेना आदि मंचासीन रहे। संचालन नारायण पिरोनिया ने एवं आभार मनीष मांझी ने व्यक्त किया। विभाग प्रचार प्रमुख सुधीर शर्मा ने कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डाला।</p>
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