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	<title>चुनावी रणनीति &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>राजनीति में परिवारवाद :भाजपा ने दिया मंत्री विधायकों के पांच पुत्रों को टिकट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Nov 2018 13:28:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[चुनावी रणनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[परिवारवाद का मुद्दा उठाकर कांग्रेस पर हमला बोलती रही भाजपा ने जब आज अपनी प्रत्याशियों की घोषणा की तो उसकी कथनी करनी में साफ अंतर नजर आया पहली लिस्ट के मुताबिक बीजेपी ने मंत्री और विधायकों के पांच पुत्रों को मौका दिया है। बीजेपी के सर्वे में खराब परफॉर्मेंस के चलते सीट गांवाने वाले मंत्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="box-sizing: border-box; margin: 0px 0px 10px; line-height: 28px; font-size: 14px; text-align: justify; color: #383838; font-family: Roboto, sans-serif; widows: auto;">परिवारवाद का मुद्दा उठाकर कांग्रेस पर हमला बोलती रही भाजपा ने जब आज अपनी प्रत्याशियों की घोषणा की तो उसकी कथनी करनी में साफ अंतर नजर आया पहली लिस्ट के मुताबिक बीजेपी ने मंत्री और विधायकों के पांच पुत्रों को मौका दिया है।</p>
<p style="box-sizing: border-box; margin: 0px 0px 10px; line-height: 28px; font-size: 14px; text-align: justify; color: #383838; font-family: Roboto, sans-serif; widows: auto;">बीजेपी के सर्वे में खराब परफॉर्मेंस के चलते सीट गांवाने वाले मंत्री गौरीशंकर शेजवार की जगह उनके बेटे मुदित को सांची से टिकट दिया गया। वहीं, रामपुर बाघेलान से विधायक-मंत्री हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह को टिकट मिला है। चंदला से आरके प्रजापति का टिकट काटकर बेटे राकेश प्रजापति को दिया गया टिकट। सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटे सुधीर यादव को पारुल साहू का टिकट काटकर सुर्खी से टिकट दिया गया है और पूर्व मंत्री अखंड प्रताप सिंह के बेटे अभय यादव को पृथ्वीपुर से टिकट मिला है।</p>
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		<title>सिंधिया का चुनावी बिगुल ,क्या ग्वालियर दोहरा पाएगा इतिहास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Nov 2017 09:54:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[चुनावी रणनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[अपने महाराजा का नाम जब मुख्यमंत्री पद के लिए तय हो चुका है तो चुनावी बिगुल भी चम्बल की माटी से ही बजना लगभग तय था, हुआ भी ऐसा ही है । महाराजा ने चुनावी रणभेरी का बिगुल फूंकने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र गुना शिवपुरी की जगह उस ग्वालियर को चुना है जो स्वतन्त्रता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>अपने महाराजा का नाम जब मुख्यमंत्री पद के लिए तय हो चुका है तो चुनावी बिगुल भी चम्बल की माटी से ही बजना लगभग तय था, हुआ भी ऐसा ही है । महाराजा ने चुनावी रणभेरी का बिगुल फूंकने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र गुना शिवपुरी की जगह उस ग्वालियर को चुना है जो स्वतन्त्रता के बाद से तमाम राजनीतिक उत्थान पतन का  केंद्र रहा है। वही ग्वालियर कभी जिसकी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने उस समय के कॉंग्रेसी शासन के अभेद्य दुर्ग की  कहे जाने वाले पण्डित द्वारकाप्रसाद मिश्र को न केवल चुनोती देने का साहस दिखाया था बल्कि उन्हें धूल भी चटाई थी।</h4>
<h4>उसी सिंधिया राजवंश के जोतिरादित्य 8 नवम्बर को ग्वालियर के  ऐतिहासिक महाराज बाड़े से एक एक सभा को सम्बोधित करने जा रहे हैं। राजनीतिक पण्डितों की माने तो श्री सिंधिया ने 8 नवम्बर का दिन इस कारण चुना क्योंकि इसी दिन बीते वर्ष नरेन्द्र मोदी ने नोटबन्दी की घोषणा करके देश की जनता को तमाम सब्जबाग दिखाए थे। अब भला विपक्षी तीर दागने के लिए सिंधिया के पास इससे अच्छा समय दूसरा भला क्या हो सकता है।</h4>
<h4>राजनीतिक विशलेषकों की नजर इसपर इस कारण भी गड़ी हैक्यों कि ग्वालियर की धरती एक बार पुनः पूरे प्रदेश के चुनावी समर की गवाह बनने जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिंधिया राजपरिवार एक बार  पुनः अपना पुराना   इतिहास दोहरा पाएगा या फिर यह उम्मीद सिर्फ एक स्वप्न  ही साबित होगी।</h4>
<h4>इस समय सिंधिया राजपरिवार की तरफ से न तो राजमाता जैसा चमत्कृत कर देने वाला व्यक्तित्व है और न  सत्तापक्ष में द्वारकाप्रसाद मिश्र जैसा निरंकुश हो चुका शासक । वर्तमान में बेदम हो चुकी कांग्रेस द्वारा मजबूरी में सामने लाये गए सत्ता के गैर अनुभवी अपरिपक्व युवा जोतिरादित्य हैं तो दूसरी ओर लगातार 19 वर्षों से जनता का विश्वास प्राप्त नेता शिवराज है जिसे वर्तमान के सबसे लोकप्रिय नेता और सबसे बड़ा जनसमर्थन प्राप्त राजनीतिक दल भाजपा का समर्थन मिला हुआ है।</h4>
<h4>यह बात भी समझने योग्य है कि आखिरकार जो सिंधिया लम्बे समय से अपना राजनीतिक केन्द्र गुना शिवपुरी को मानते रहे हैं वे उसे छोड़ ग्वालियर से  चुनावी शंखनाद को महत्व  क्यों देने जा रहे हैं।  सन्देश साफ है सिंधिया की नजर ग्वालियर चम्बल क्षेत्र की 34 विधानसभा सीटों पर गड़ी हुई हैं सिंधिया यह कतई नहीं चाहते कि किसी भी तरह जनता के बीच यह सन्देश नहीं जाए कि वे इन 34 विधानसभा क्षेत्रो के केंद्र ग्वालियर से दूर गुना को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। सिंधिया की नजरें मालवा के इंदौर और विंध्याचल सहित जबलपुर उज्जैन आदि के उन क्षेत्रों पर भी गड़ी हैं जो कभी सिंधिया रियासत का हिस्सा रहे हैं। ग्वालियर चम्बल की 34 और इन विधानसभा सीटों को मिला दिया जाए तो संख्या 60 के ऊपर निकल जाती है। निश्चित ही यह भाजपा के लिए चिंतित कर देने वाली बात है। अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि भाजपा इसको लेकर क्या रणनीति अपनाने जा रही है।</h4>
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