<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जल गंगा अभियान&#8217; &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/tag/%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Fri, 17 Apr 2026 13:01:23 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>जल गंगा अभियान&#8217; की स्वर्णिम सफलता, ग्वालियर को मिला नया पिकनिक स्पॉट और वॉकिंग ट्रैक</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%bf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:01:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[जल गंगा अभियान']]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=63214</guid>

					<description><![CDATA[ग्वालियर 17 अप्रैल 2026/ जलकुंभी के जाल, दलदलनुमा गाद और अतिक्रमण की वजह से अपनी पहचान खो चुके ग्वालियर के “पृथ्वी ताल” ने अब शहर के एक नए “ईको – टूरिज्म” हब का रूप ले लिया है। लगभग 7.27 हेक्टेयर में फैला यह विशाल जलाशय अब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि प्रकृति के पुनर्जन्म [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर 17 अप्रैल 2026/ जलकुंभी के जाल, दलदलनुमा गाद और अतिक्रमण की वजह से अपनी पहचान खो चुके ग्वालियर के “पृथ्वी ताल” ने अब शहर के एक नए “ईको – टूरिज्म” हब का रूप ले लिया है। लगभग 7.27 हेक्टेयर में फैला यह विशाल जलाशय अब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि प्रकृति के पुनर्जन्म की कहानी बयां कर रहा है। जहाँ कभी बदबू और गंदगी का साम्राज्य था, आज वहाँ लगभग 120 प्रजातियों के पक्षियों का कलरव और लहरों से टकराकर आने वाली शीतल हवाएं शहरवासियों का स्वागत करती हैं।</p>
<p>ऐतिहासिक पृथ्वी ताल का यह कायाकल्प उस &#8216;जल गंगा संवर्धन अभियान&#8217; की स्वर्णिम सफलता है, जिसकी पहल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश की जल-विरासत सहेजने के लिए की गई है। इस पहल के तहत जिला प्रशासन, ग्वालियर नगर निगम व समाज ने साझा प्रयासों से मृतप्राय पृथ्वी तालाब को जीवंत कर दिया है। मुरार से लगभग 8.5 किलोमीटर की दूरी पर नगर निगम के वार्ड क्र.-62 में यह तालाब स्थित है।</p>
<p>तालाब से निकली मिट्टी ने खेतों की सेहत को सुधारा</p>
<p>पृथ्वी तालाब को पुनर्जीवित करना कोई सरल कार्य नहीं था। सालों से जमी गाद और खरपतवार ने तालाब को बदरंग कर दिया था। अभियान के दौरान लगभग एक महीने तक मशीनों और श्रमदान के समन्वय से 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली गाद बाहर निकाली गई। साथ ही तालाब को गहरा किया गया। इस प्रक्रिया ने न केवल तालाब की जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया, बल्कि यहाँ से निकली उपजाऊ मिट्टी को बंजर खेतों में डालकर खेतों के &#8216;स्वास्थ्य&#8217; को भी सुधारा गया। आज यह तालाब बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।</p>
<p>पर्यटन और सेहत का संगम</p>
<p>नगर निगम ने लगभग 3.49 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर इस जलाशय को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। तालाब के चारों ओर निर्मित स्टोन पिचिंग और वॉकिंग ट्रैक ने इसे सेहत के लिये सजग और सुबह की सैर करने वाले नागरिकों के लिए आदर्श स्थल बना दिया है। शाम ढलते ही तालाब के किनारे लगी आकर्षक लाइटिंग और रैलिंग का प्रतिबिंब पानी में झिलमिलाता है। व्यवस्थित सौंदर्यीकरण ने यहाँ अतिक्रमण की संभावना को भी हमेशा के लिये दूर कर दिया है।</p>
<p>जैव विविधता के सजीव दर्शन</p>
<p>पक्षियों का नया आशियाना पृथ्वी ताल की सबसे बड़ी सफलता यहाँ लौट रही जैव-विविधता है। ग्वालियर की तपती गर्मी के बावजूद, यहाँ का वातावरण इतना सुखद है कि 120 से अधिक देशी-विदेशी पक्षियों ने इसे अपना घर बना लिया है। साथ ही विलुप्तप्राय कछुओं और अन्य जलीय जीवों को भी इस तालाब ने आश्रय दिया है। शहर से मात्र 8 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल अब न केवल सुकून की तलाश करने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है।<br />
पृथ्वी ताल की यह सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि साझा प्रयास किए जाएं तो हम अपनी उजड़ती विरासत को न केवल बचा सकते हैं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक &#8216;उपहार&#8217; के रूप में विकसित भी कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
