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	<title>जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>आखिर भारत के सीने पर कबतक कांटे बनकर चुभता रहेगा जेएनयू रुपी नस्तर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 08:34:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[सम्पादकीय: प्रवीण दुबे जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में लाख कोशिशों के बावजूद अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का सूपड़ा साफ होना और वामपंथी पैनल की जीत निःसंदेह राष्ट्रवादी विचारों के समर्थकों के लिए चिंता का विषय कहा जा सकता है। इस परिणाम के आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="text-align: center;"><strong>सम्पादकीय: प्रवीण दुबे</strong></div>
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<p>जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में लाख कोशिशों के बावजूद अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का सूपड़ा साफ होना और वामपंथी पैनल की जीत निःसंदेह राष्ट्रवादी विचारों के समर्थकों के लिए चिंता का विषय कहा जा सकता है।</p>
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<div dir="auto">इस परिणाम के आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि देश में वैचारिक परिवर्तन की सबसे बड़ी पाठशाला कहे जाने वाले संघ परिवार जेएनयू जैसे वामपंथी गड़ में वैचारिक परिवर्तन लाने में लम्बे समय से असफल क्यों है ?</div>
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<div dir="auto"> यह सवाल इस लिए भी उठ रहा है कि जेएनयू छात्र संघ चुनाव में संघ परिवार से जुड़े संविचारी छात्र संगठन ABVP को करारी हार का सामना करना पड़ा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">जएनयू छात्र संघ चुनाव कहने को भले ही एक विश्वविद्यालय का चुनाव था लेकिन सर्वविदित है कि अपनी स्थापना काल से लेकर वर्तमान तक यह विश्वविद्यालय केंद्र की राजनिति में एक खास विचारधारा को बल देने वाला कितना बड़ा केंद्र रहा है यह किसी से छुपा नहीं है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"> लिखने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए कि जेएनयू का काम कांग्रेस की वैचारिक शून्यता को भरना और ऐसी मानसिकता का निर्माण करना रहा है जिसका उद्देश्य  मूल भारतीय विचारों का समूल नाश करना  है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">टूल किट निर्माण के षड्यंत्र से लेकर अफजल गुरु शर्जील इमाम कन्हैया कुमार तक तथा ढपली बजाओ गैंग के आजादी वाले नारे और अर्बन नक्सलाइट जैसे हजारों कारनामों से जेएनयू का इतिहास भरा पड़ा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">कल की ही बात की जाए तो अध्यक्ष पद पर जीत कर आईं अदिति का पहला सम्बोधन ही आश्चर्यजनक रहा अदिति मिश्रा  ने अपने संबोधन में कहा  कि आज का समय अपवाद नहीं, असहमति और समानता के लिए लड़ाई का है- “जब से 2014 हुआ है, विश्वविद्यालय और आइडिया ऑफ इंडिया पर हमले हो रहे हैं.</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">अदिति ने कहा कि उनका लक्ष्य है “ऐसा JNU बनाना जिसमें हर विद्यार्थी, हर विचारधारा को सुरक्षा और स्थान मिले.”उन्होंने दूर-कश्मीर, लद्दाख के पर्यावरण, पेलिस्टाइन-कश्मीर जैसे मुद्दों को भी उठाया,</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एक छात्र नेता के रूप में उनके द्वारा अपवाद सहमति और असहमति की बात करना तो समझ आता है लेकिन छात्र-मुद्दों से अलग हटकर  सामाजिक न्याय,कश्मीर, लद्दाख के पर्यावरण, पेलिस्टाइन-कश्मीर जैसे मुद्दों को उठाना तथा यह कहना जब से 2014 हुआ है, विश्वविद्यालय और आइडिया ऑफ इंडिया पर हमले हो रहे हैं. आखिर किस बात की ओर इशारा करता है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">पहले दिन ही उनके भाषण से पूरा देश यह समझ गया कि जेएनयू से जीतकर आए छात्रसंघ का इस्तेमाल मोदी सरकार की रीतियों नीतियों पर हमला करने के लिए किया जाने वाला है ठीक उसी प्रकार जैसे कि कन्हैया कुमार जैसे दर्जनों  चरित्रों द्वारा किया जाता रहा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">जहां तक जेएनयू की स्थापना और उद्देश्य की बात है आजादी के इतने वर्षों बाद जबकि पूरा देश सामाजिक आर्थिक और राजनितिक रूप से बदल गया जेएनयू अभी भी अपने पुराने सनातन विरोधी उद्देश्य में सफल दिखाई दे रहा है यहां से तैयार वैचारिक कूड़ा करकट पूरे देश में मां भारती के आंगन में गंदगी फैलाने में सफल दिखाई दे रहा है,विडंबना इस बात की है कि पूरे देश में अनुकूल वैचारिक वातावरण के बावजूद जेएनयू रुपी गंदगी जिसका कि उद्देश्य शिक्षा नहीं कुछ और ही है उसे साफ नहीं किया जा सका है।</div>
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