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	<title>ज्योतिरादित्य सिंधिया &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>महाआर्यमन ने अमेरिका से पूरा किया  ग्रेजुएशन, इसी वजह से चुनाव बीच में छोड़ चले गए थे सिंधिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 May 2019 08:04:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिरादित्य सिंधिया]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल&#124; देश में लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए मतदान समाप्त होने के साथ ही प्रत्याशियों का भविष्य EVM में कैद हो गया है&#124; 23 मई को परिणाम आएंगे। इससे पहले एग्जिट पोल के नतीजों की चर्चा जोरो पर है और बीजेपी और कांग्रेस अपने अपने दावे कर रही है&#124; अंतिम चरण में जमकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भोपाल| देश में लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए मतदान समाप्त होने के साथ ही प्रत्याशियों का भविष्य EVM में कैद हो गया है| 23 मई को परिणाम आएंगे। इससे पहले एग्जिट पोल के नतीजों की चर्चा जोरो पर है और बीजेपी और कांग्रेस अपने अपने दावे कर रही है| अंतिम चरण में जमकर घमासान देखने को मिला| लेकिन इस बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का चुनावी मैदान से गायब होना सुर्खिया बना| सिंधिया अमेरिका यात्रा पर हैं और बेटे महाआर्यमन सिंधिया के दीक्षांत समारोह शामिल हुए| इस दौरान सिंधिया ने ट्वीट कर अपने विदेश जाने की जानकारी शेयर की है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा- &#8216;मुझे बहुत हर्ष है की मेरे बेटे महाआर्यमन सिंधिया का आज &#8216;येल यूनिवर्सिटी&#8217; से दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। ये हमारे परिवार के लिए एक बहुत अहम दिन है। आज के दिन तुम्हारे साथ होना मेरे लिए गर्व की बात है&#8217;।  दरअसल, सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने येल यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। सिंधिया अपनी पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के साथ बेटे के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए अमेरिका गए हुए थे</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सिंधिया के लिए उल्टा पड़ा दांव हाथी हुआ बेलगाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2019 16:31:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिरादित्य सिंधिया]]></category>
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					<description><![CDATA[अशोकनगर &#124; गुना लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह धाकड़ के द्वारा कांग्रेस का दामन थामने के बाद बसपा ने नई रणनीति के तहत इस सीट से बिना प्रत्याशी के ही चुनाव लड़ने  की घोषणा कर दी है। बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामसिंह गौतम ने अशोकनगर में तीनों जिलों के कार्यकर्ताओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अशोकनगर | गुना लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह धाकड़ के द्वारा कांग्रेस का दामन थामने के बाद बसपा ने नई रणनीति के तहत इस सीट से बिना प्रत्याशी के ही चुनाव लड़ने  की घोषणा कर दी है। बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामसिंह गौतम ने अशोकनगर में तीनों जिलों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद पत्रकारो से चर्चा करते हुये कहा कि पार्टी अब और ज्यादा ताकत से चुनाव लड़ेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सोमवार को शिवपुरी में कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार लोकेंद्र सिंह राजपूत ने कांग्रेस की सदस्यता लेते हुये अपना समर्थन सिंधिया को दे दिया था। अपनी जीत को निश्चित करने के लिये शायद सिंधिया ने बसपा उम्मीदवार को अपने पाले में मिलाया था। उनको उम्मीद थी कि लोकेंद्र के मैदान से हटने के बाद बसपा का वोट बैंक उनके पास आ जायेगा। लेकिन कांग्रेस की यह जोड़तोड़  बसपा को अखर गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती की म प्र  सरकार को समर्थन वापसी की धमकी के बाद बसपा के कार्यकर्ता और आक्रमक हो गये है। अशोकनगर में बसपा की बैठक के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। अशोकनगर ,गुना एवं शिवपुरी के बसपा कार्यकर्ताओ ने बैठक में तय किया है पार्टी अब भी चुनाव लड़ेगी। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने घोषणा की है गुना सीट पर बसपा अब अपने चुनाव चिन्ह हाथी का प्रचार करते हुये वोट मांगेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सिंधिया ने दिया भाजपा को जोरदार झटका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2019 12:24:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिरादित्य सिंधिया]]></category>
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					<description><![CDATA[शिवपुरी।मध्यप्रदेश में पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है और अगले तीन चरण की वोटिंग होना है। इससे पहले नेताओं का दल-बदलने का सिलसिला जारी है।अब भाजपा आदिवासी मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ महेश आदिवासी ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने गुना सांसद ज्योतिरादित्य की मौजूदगी में कांग्रेस की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>शिवपुरी।मध्यप्रदेश में पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है और अगले तीन चरण की वोटिंग होना है। इससे पहले नेताओं का दल-बदलने का सिलसिला जारी है।अब भाजपा आदिवासी मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ महेश आदिवासी ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने गुना सांसद ज्योतिरादित्य की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर सिंधिया ने पार्टी का दुपट्टा पहना कर कांग्रेस परिवार में उनका स्वागत किया।इससे पहले भी कई बीजेपी नेता कांग्रेस में शामिल हो गए है।</p>
<p>दरअसल, आज सिंधिया शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र के नावली में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। जहां उन्होंने गुना-शिवपुरी के विकास, प्रगति और उन्नति का अपना संकल्प पुनः दोहराया। जहां भाजपा आदिवासी मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ महेश आदिवासी ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस ज्वाइन कर ली।  वही भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के शासन में- राशन की दुकान पर भ्रष्टाचारी, गरीबी रेखा की लिस्ट में गरीबो के  नाम काटे गए भाजपाईयो के नाम जोड़े गए, मैं तो कहता हूँ इन गरीबो के निवालों को छीनने वालो आपको ऊपर वाला भी माफ नही करेगा।</p>
<p>सिंधिया ने कहा कि जिस सड़क की कोई कल्पना नही कर सकता था कोलारस के राजस्थान बॉर्डर के गांव मेघनबाड़ा से विदिशा के पास अमरोद गांव तक 90km की 110 करोड़ की लागत की सड़क आपको दिलवाई जो आज 60 गांव और 4 विधानसभाओ को जोड़ती है।जो कहा सो कर के दिखाया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>प्रियंका की चकाचौंध में खुद को साबित करने की चुनौती से जूझते ज्योतिरादित्य सिंधिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Feb 2019 15:45:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिरादित्य सिंधिया]]></category>
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					<description><![CDATA[                        प्रवीण दुबे &#160; पहले मध्यप्रदेश में सरकार गठन के बाद अनदेखी और अब प्रियंका गांधी की चकाचौंध भरी राजनीति के बीच उपस्थिति न दर्ज करा पाने के संकट ने यदि सबसे ज्यादा किसी का नुकसान किया है तो वह है कांग्रेस की नई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 30px;">                        <strong><span style="color: #0000ff;">प्रवीण दुबे</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #000000;">पहले मध्यप्रदेश में सरकार गठन के बाद अनदेखी और अब प्रियंका गांधी की चकाचौंध भरी राजनीति के बीच उपस्थिति न दर्ज करा पाने के संकट ने यदि सबसे ज्यादा किसी का नुकसान किया है तो वह है कांग्रेस की नई पीढ़ी के सबसे प्रभावी और स्वच्छ छवि वाले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया , पहले गांधी परिवार  और दिग्विजय सिंह जैसे चालक नेताओं ने इस युवा नेता का चेहरा आगे कर विधानसभा चुनाव में ग्वालियर अंचल की 34 में से 26 सीटें जीतकर भाजपा को सत्ता से दूर करने में सफलता हासिल की,अकेले ग्वालियर अंचल में ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश में  चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष के नाते इस युवा नेता ने अपनी भूमिका में पूरे सौ प्रतिशत अंक हासिल किए पूरे देश ने देखा कि ज्योतिरादित्य की आक्रामक प्रचार शैली के कारण भाजपा निरुत्तर सी नजर आई।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;"> लेकिन सत्ता में आते ही  कैसे कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य को दरकिनार करते हुए पीछे ढकेल दिया सबने देखा कि इस अनदेखी को कैसे राहुल गांधी ने अपनी मोन स्वीकृति प्रदान की। </span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">जो ज्योतिरादित्य चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का सबसे सशक्त चेहरा माने जा रहे थे उनको अपने समर्थक विधायकों तक को मंत्रीपद व अच्छे मंत्रालय  दिलाने तक में भोपाल से लेकर दिल्ली तक मशक्कत करनी पड़ी थी। बावजूद इसके सिंधिया पर दिग्गीराजा और कमलनाथ भारी पड़े उनके समर्थकों को हल्के मंत्रालय से ही संतोष करना पड़ा। </span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">विधानसभा चुनाव के बाद सरकार के गठन तक श्री सिंधिया को दोयम दर्जे का नेता निरूपित किये जाने के बाद अब लोकसभा चुनाव में उनका जादू मध्यप्रदेश में न चल सके इसके लिए एक ओर बड़ी चतुराई से उन्हें मध्यप्रदेश से दूर कर राष्ट्रीय महासचिव का झुनझुना पकड़ाया गया तो दूसरी ओर उन्हें प्रियंका गांधी के साथ जोड़कर उत्तरप्रदेश के एक हिस्से तक सीमित कर दिया गया।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;"> साफ है जिन सिंधिया के पास विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष की कमान थी वे सिंधिया अब लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तरप्रदेश के एक हिस्से तक सिमट कर रह जाएंगे। </span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong><span style="color: #000000;">इससे भी विचारणीय पक्ष   यह है कि उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां कांग्रेस के सबसे चमकदार और प्रभावी चेहरे के रूप में प्रियंका गांधी पूरी तरह सक्रीय हैं सिंधिया को आखिर कौन पूछेगा ?</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;"> मीडिया से लेकर कांग्रेस हाईकमान तक सब प्रियंका के इर्दगिर्द ही नजर आएंगे ऐसे में सिंधिया के सामने खुद के कार्यों को प्रदर्शित करने का संकट खड़ा होगा। इसकी बानगी पिछले कुछ दिनों में दिखाई भी दे रही है, जब मीडिया हो या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सब जगह प्रियंका प्रियंका की ही धूम है और श्री सिंधिया इस चकाचौंध में कहीं खो से गये हैं।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">यहां बताना उपयुक्त होगा कि कांग्रेस हाईकमान अर्थात गांधी परिवार द्वारा सिंधिया परिवार की राजनीतिक अनदेखी करना कोई नई बात नहीं है। ज्योतिरादित्य के पिता स्व. माधवराव सिंधिया भी इसका शिकार होते रहे तमाम राजनीतिक योग्यता और जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय नेता की छवि होने के बावजूद गांधी परिवार ने कभी भी माधवराव सिंधिया को न तो मुख्यमंत्री बनने दिया और न ही प्रधानमंत्री। इतना ही नहीं जैसा कि वर्तमान में भी ज्योतिरादित्य के सामने हो रहा है वैसा ही उनके पिता माधवराव की खिलाफत करने वाले दिग्विजयसिंह को गांधी परिवार ने जमकर समर्थन किया। एकबार तो हालात यहां तक जा पहुंचे थे कि माधवराव को अपनी अलग पार्टी बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">फिलहाल ज्योतिरादित्य ऐसा कुछ करेंगे इसकी सम्भावना दिखाई नहीं देती लेकिन जबसे विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आए हैं और सरकार का गठन हुआ है वे सार्वजनिक रूप से खिन्न और गुस्से का प्रदर्शन अवश्य कर चुके हैं। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी ही पार्टी में सम्पूर्ण राजनीतिक योग्यता के बावजूद खुद को लगातार हासिये पर डालने और अपने प्रभाव वाले प्रदेश से दूर रखने की कुटिल चालों का कैसे जवाब देते हैं  ?</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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