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	<title>देश का पहला डेंगू वैक्सीन &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>राहत भरी खबर :देश को मिला अपना पहला डेंगू वैक्सीन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 12:49:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[देश का पहला डेंगू वैक्सीन]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में डेंगू का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है, खासकर मानसून के दौरान जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है. ऐसे में अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है कि देश को अपना पहला डेंगू वैक्सीन मिल गया है. यह कदम सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम की दिशा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में डेंगू का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है, खासकर मानसून के दौरान जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है. ऐसे में अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है कि देश को अपना पहला डेंगू वैक्सीन मिल गया है. यह कदम सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे यह देश के लिए राहत भरी खबर है.</p>
<p><strong>डेंगू से जुड़े मामले </strong></p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. जहां 2020 में करीब 44 हजार केस सामने आए थे, वहीं 2023 और 2024 में यह संख्या 2.3 लाख के पार पहुंच गई. 2025 में भी नवंबर तक 1.13 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं.  एक्सपर्ट का मानना है कि असल आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कई केस रिपोर्ट ही नहीं हो पाते.</p>
<p><strong>टीके को मंजूरी</strong></p>
<p>अब भारत में TAK-003 वैक्सीन, जिसे Qdenga नाम से जाना जाता है, को मंजूरी मिल चुकी है.  इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के तहत एक्सपर्ट कमेटी ने 4 से 60 साल के लोगों के लिए उपयोग की अनुमति दी है.  यह वैक्सीन जापान की टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी लिमिटेड ने विकसित किया है. इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि इसे पहले डेंगू हो चुका है या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता. पहले की वैक्सीन में यह बड़ी चुनौती थी. Qdenga चारों प्रकार के डेंगू वायरस सेरोटाइप से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है, जिससे यह ज्यादा व्यापक सुरक्षा प्रदान करती है.</p>
<p><strong>कैसे करता है काम?</strong></p>
<p>इसे दो डोज में दिया जाता है, जिनके बीच तीन महीने का अंतर होता है. क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि यह वैक्सीन चार साल से ज्यादा समय तक सुरक्षा दे सकती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी इसे उन क्षेत्रों में उपयोगी माना है जहां डेंगू का खतरा ज्यादा रहता है. Dr Archana Pate ने TOI बताया कि भारत दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का हिस्सा है जो डेंगू के जोखिम में है. ऐसे में यह वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक अहम कदम साबित हो सकती है.</p>
<p>हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह कोई जादुई समाधान नहीं है. वैक्सीन डेंगू के खतरे को कम जरूर करेगी, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती. डेंगू की गंभीरता अक्सर शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है, खासकर दूसरी बार इंफेक्शन होने पर. एक और अच्छी खबर यह है कि इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए Takeda ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिससे आने वाले समय में इसकी उपलब्धता और कीमत दोनों बेहतर हो सकती हैं. डॉक्टरों का कहना साफ है कि सिर्फ वैक्सीन से काम नहीं चलेगा. मच्छरों को पनपने से रोकना, साफ-सफाई रखना, समय पर जांच और सही इलाज ये सभी कदम उतने ही जरूरी हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
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