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	<title>धर्म &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>अच्छे मुसलमान या हिन्दू की पहचान होता है उसका आचरण : इंद्रेशजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Oct 2017 18:13:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[व्याख्यान]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रोत्थान न्यास ग्वालियर की ज्ञानप्रबोधनी व्याख्यान माला के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेशजी  ने हिंदुत्व में समरस मुस्लिम समाज विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ मुसलमान या एक अच्छे हिन्दू  की पहचान उसके आचरण से होती है चिंन्ह से नहीं चिन्ह तो कट्टरता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रोत्थान न्यास ग्वालियर की ज्ञानप्रबोधनी व्याख्यान माला के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेशजी  ने हिंदुत्व में समरस मुस्लिम समाज विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ मुसलमान या एक अच्छे हिन्दू  की पहचान उसके आचरण से होती है चिंन्ह से नहीं चिन्ह तो कट्टरता पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल चिन्हों से इंसान बनाने की जो कोशिश हो रही है वह गलत है इससे असहिष्णुता रूपी इंसान का निर्माण हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत सदैव से सुधारवाद का समर्थक रहा है जब विकार जाता है,नष्ट होता है तभी सुधार आता है। उन्होंने कहा की जो जन्म लेता है उसका अंत भी सुनिश्चित है इस दृष्टि से पाकिस्तान बंगलादेश के जन्म की समय और तारीख हम सबको पता है उनकी जन्म कुंडली से यह सब कुछ देखा जा सकता जहाँ तक भारत का सवाल है वह एक प्राचीन राष्ट्र है यही वजह है कि वह युगों से कायम है और आगे भी रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत वेज्ञानिको से नहीं सन्तों से संचालित था इस कारण वह विश्व गुरु कहलाया यहां भरष्टाचार नहीं परमार्थ का भाव था इसी लिए यह सोने की चिड़िया कहलाया</p>
<p>इससे पूर्व व्याख्यान माला की शूरूवात में राष्ट्रोत्थान न्यास के प्रोफेसर राजेन्द्र बांदिल तथा मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नियाज मोहम्मद ने भी अपने विचार व्यक्त किये।</p>
<p>व्याख्यान माला के तीसरे दिन गरुगोविंद सिंह और सिख परम्परा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अरुणजी जैन का व्याख्यान होगा</p>
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		<title>काल का नाश करने वालीं हैं माँ कालरात्रि आज नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है इनकी पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Sep 2017 18:45:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[नवरात्री के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है. ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं. नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है. कहा जाता है, इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="content-block">नवरात्री के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है. ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं. नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है. कहा जाता है, इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए.</div>
<div class="content-block">संसार में कालों का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है. कहते हैं इनकी पूजा करने से सभी दु:ख, तकलीफ दूर हो जाती है. दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल देती हैं.</div>
<div class="content-block">कालरात्रि का रूप</div>
<div class="content-block">मां दुर्गा के सातवें रूप या शक्ति को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सातवें दिन मां काल रात्रि की उपासना का विधान है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका वर्ण अंधकार की तरह काला है, केश बिखरे हुए हैं. कंठ में विद्युत की चमक वाली माला है. मां कालरात्रि के तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल और गोल हैं, जिनमें से बिजली की तरह किरणें निकलती रहती हैं.</div>
<div class="content-block">इनकी नासिका से श्वास तथा निःश्वाससे अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं. मां कालरात्रि का यह भय उत्पन्न करने वाला रूप केवल पापियों का नाश करने के लिए. कालरात्रि गर्दभ पर सवार हैं. देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है इसलिए देवी को शुभंकरी भी कहा गया है.</div>
<div class="content-block">कालरात्रि की पूजा विधि</div>
<div class="content-block">पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा लिखा हुआ है उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए. देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए.</div>
<div class="content-block">दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है. सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं. इस दिन मां की आंखें खुलती हैं. षष्ठी पूजा के दिन जिस विल्व को आमंत्रित किया जाता है उसे आज तोड़कर लाया जाता है और उससे मां की आँखें बनती हैं. दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है. इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाजा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं.</div>
<div class="content-block">सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती लेकिन रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है. इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान एवं कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है. सप्तमी की रात्रि ‘सिद्धियों’ की रात भी कही जाती है. कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं वो इस दिन सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं.</div>
<div class="content-block">इनकी पूजा करने वालों को इस मंत्र से ध्यान करना चाहिए.</div>
<div class="content-block">&#8216;एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता. लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी</div>
<div class="content-block">वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणावर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी&#8217;</div>
<div class="content-block">देवी कालरात्रि के मंत्र</div>
<div class="content-block">1- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:</div>
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