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	<title>पूजा &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>वास्तु दोषों की आशंका है तो करें विघ्न विनाशक गणेशजी की आराधना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 May 2019 00:34:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा]]></category>
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					<description><![CDATA[भगवान श्रीगणेश को विघ्न विनाशक कहा गया है। किसी भी व्रत या अनुष्ठान में सबसे पहले श्रीगणेश जी का पूजन ही किया जाता है। भगवान गणेश की वंदना कर सभी प्रकार के वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है। नियमित रूप से श्रीगणेश जी की आराधना से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। घर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">भगवान श्रीगणेश को विघ्न विनाशक कहा गया है। किसी भी व्रत या अनुष्ठान में सबसे पहले श्रीगणेश जी का पूजन ही किया जाता है। भगवान गणेश की वंदना कर सभी प्रकार के वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है। नियमित रूप से श्रीगणेश जी की आराधना से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">घर या कार्यस्थल में भगवान श्रीगणेश की मूर्ति या चित्र अवश्य लगाएं, लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी स्थिति में इनका मुख दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं होना चाहिए। घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि के लिए भगवान श्रीगणेश की सफेद रंग की मूर्ति या चित्र लगाना चाहिए। श्रीगणेश को मोदक एवं उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। अतः चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक या लड्डू और मूषक अवश्य होना चाहिए।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">घर में श्रीगणेश जी की बैठे हुए और कार्यस्थल पर खड़े हुए रूप में मूर्ति लगानी चाहिए। खड़े हुए श्रीगणेश के चित्र में उनके दोनों पैर जमीन को स्पर्श करते हुए हों, इससे कार्यक्षेत्र में स्थिरता आती है। सिंदूरी रंग के श्रीगणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी कार्य मंगलमय होते हैं। श्रीगणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने से धन एवं समृद्धि अवश्य आती हैं। श्रीगणेश जी की मूर्ति के साथ मां लक्ष्मी जी की भी मूर्ति रखें। ऐसा करने से धन और सौभाग्य दौड़े चले आते हैं। ध्यान रखें कि सीढ़ियों के नीचे भी किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा या कलैंडर नहीं लगाना चाहिए</p>
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		<title>देशभर में 10 दिनों की शक्तिपूजा की धूम प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Sep 2017 03:24:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा]]></category>
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					<description><![CDATA[आज से नवरात्र शुरू हो चुके हैं,देशभर में इसकी धूम देखी जा रही है इस दौरान दस दिनों तक  महाशक्ति की पूजा की जाएगी. नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इसी दिन घट स्थापना कर मां दुर्गा को घर में स्थापित किया जाता है मां शैलपुत्री का रूप नवदुर्गाओं में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज से नवरात्र शुरू हो चुके हैं,देशभर में इसकी धूम देखी जा रही है इस दौरान दस दिनों तक  महाशक्ति की पूजा की जाएगी. नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इसी दिन घट स्थापना कर मां दुर्गा को घर में स्थापित किया जाता है</p>
<p><strong>मां शैलपुत्री का रूप<br />
</strong>नवदुर्गाओं में प्रथम देवी शैलपुत्री अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती है, जो भगवान शिव का भी अस्त्र है. देवी शैलपुत्री का त्रिशूल जहां पापियों का विनाश करता है, वहीं भक्तों को अभयदान का देती हैं. उनके बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है, जो अविचल ज्ञान और शांति का प्रतीक है. भगवान शिव की भांति देवी शैलपत्री का वाहन भी बैल है.</p>
<p><strong>घट स्थापना के लिए जरूरी सामान<br />
<span id="mobil300x250_2" class="clearfix"></span><br />
</strong>पाट (जिस पर देवी मां को विराजमान किया जाएगा), जौं,  शुद्ध मिट्टी, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल कपड़ा या चुनरी, मिठाई, फूल, कपूर, धूप, अगरबत्ती, लौंग, देसी घी, कलावा, शुद्ध जल से भरा हुआ चांदी, सोने या फिर तांबे का लोटा, चावल, फूलों की माला, सुपारी इत्यादि के साथ ही घटस्थापना की जाती है.</p>
<p><strong>ऐसे करें घट स्थापना<br />
</strong>घट यानि कलश, इसे भगवान गणेश का रूप माना जाता है और किसी भी तरह की पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है.</p>
<p>कलश स्थापना के लिए जरूरी है सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से शुद्ध किया जाए और उसके बाद एक लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएं. उसके बाद हाथ में कुछ चावल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पाटे पर रख दें. अब जिस कलश को स्थापित करना है उसमें शुद्ध जल भरें, आम या अशोक के पत्ते लगाएं और पानी वाला नारियल उस कलश पर रखें. इसके बाद उस कलश पर रोली से स्वास्तिक का निशान बनाएं. अब उस कलश को स्थापित कर दें. नारियल पर कलावा और चुनरी भी बांधें.</p>
<p>अब एक तरफ एक हिस्से में मिट्टी फैलाएं और उस मिट्टी में जौं डाल दें. इस तरह कलश की स्थापना हो जाने को बाद मां की पूजा प्रारंभ करें.</p>
<p><strong>ये लगाएं भोग<br />
</strong>मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है.</p>
<p><strong>माता की उपासना के लिए मंत्र:<br />
</strong>वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।<br />
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥</p>
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