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	<title>मध्यप्रदेश औषधीय फसल &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य बना मध्यप्रदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 13:39:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश औषधीय फसल]]></category>
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					<description><![CDATA[46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती भोपाल 17 नवम्बर 2025/ मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती</p>
<p>भोपाल 17 नवम्बर 2025/ मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।</p>
<p>मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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