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	<title>मध्यप्रदेश भाजपा नियुक्तियां &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>भाजपा में नियुक्तियां :  देर आए दुरुस्त आए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:31:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश भाजपा नियुक्तियां]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे  मध्यप्रदेश भाजपा संगठन की हालिया नियुक्तियों को लेकर यह कहा जा सकता है कि पार्टी ने देर से ही सही, लेकिन एक संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है। “देर आए, दुरुस्त आए” वाली कहावत इस पूरी प्रक्रिया पर काफी हद तक सटीक बैठती नजर आती है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="text-align: center;"><strong>प्रवीण दुबे </strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मध्यप्रदेश भाजपा संगठन की हालिया नियुक्तियों को लेकर यह कहा जा सकता है कि पार्टी ने देर से ही सही, लेकिन एक संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है। “देर आए, दुरुस्त आए” वाली कहावत इस पूरी प्रक्रिया पर काफी हद तक सटीक बैठती नजर आती है।</div>
<div dir="auto">सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि संगठन ने विभिन्न गुटों से जुड़े नेताओं को जिम्मेदारियां देकर आंतरिक संतुलन साधने का प्रयास किया है। लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच यह कदम पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। साथ ही, नियुक्तियों में वरिष्ठता (सीनियरिटी) का भी ध्यान रखा गया है, जिससे पुराने और अनुभवी नेताओं को उचित सम्मान देने की कोशिश दिखती है।</div>
<div dir="auto">एक और अहम बिंदु यह रहा कि पूरे घटनाक्रम में “सिंधिया फैक्टर” को पूरी तरह हावी नहीं होने दिया गया। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को नजरअंदाज भी नहीं किया गया। उदाहरण के तौर पर, अशोक शर्मा जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर संतुलन साधा गया है।</div>
<div dir="auto">वहीं दूसरी ओर, सिंधिया के विरोधी माने जाने वाले के पी यादव और राम निवास रावत को भी जिम्मेदारी देकर स्पष्ट संकेत दिया गया है कि संगठन किसी एक धड़े के प्रभाव में नहीं है।</div>
<div dir="auto">खासतौर पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है। सबसे ज्यादा चर्चा केपी यादव की नियुक्ति को लेकर है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। बाद में सिंधिया के भाजपा में आने के बाद भी यादव उनके खिलाफ कई मुद्दों पर मुखर रहे, हालांकि समय-समय पर दोनों नेताओं को साथ भी देखा गया।</div>
<div dir="auto">2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केपी यादव का टिकट काटकर सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद केपी यादव ने बगावती तेवर नहीं अपनाए। उस दौरान केंद्रीय नेता अमित शाह ने उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का संकेत दिया था। अब उन्हें सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने बड़ा संदेश दिया है।</div>
<div dir="auto">इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले चेहरों को भी संगठन में स्थान दिया गया है, जो भाजपा की वैचारिक जड़ों को मजबूत बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।</div>
<div dir="auto">जातिगत समीकरण की बात करें तो इस बार ब्राह्मण वर्ग को अपेक्षाकृत कम तवज्जो मिलने की चर्चा है, जबकि ठाकुर (राजपूत) वर्ग का वर्चस्व बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह बदलाव आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों को साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।</div>
<div dir="auto">हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। संगठन लगातार संतुलन बनाए रखने की कोशिश में है और आने वाले समय में और भी नाम सामने आ सकते हैं।</div>
<div dir="auto">कुल मिलाकर, भाजपा संगठन की यह कवायद अलग-अलग गुटों, विचारधाराओं और सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की एक सुनियोजित रणनीति के रूप में देखी जा रही है, जिसका असर आगामी राजनीतिक परिदृश्य में भी देखने को मिल सकता है।</div>
<div dir="auto">राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि संगठन, संघ,नरेन्द्र तोमर,सिंधिया खुद मुख्यमंत्री समर्थक और नए सहयोगियों सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है जो एक अच्छा संकेत है।</div>
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		<title>मध्यप्रदेश के आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की शुरूआत जानिए किन नेताओं को मिली जिम्मेदारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 13:57:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश भाजपा नियुक्तियां]]></category>
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					<description><![CDATA[भोपाल 23 अप्रैल 2026/मध्यप्रदेश के आयोगों में बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों की शुरूआत हो चुकी है. पूर्व विधायक कैलाश जाटव को अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी पूर्व विधायक रामलाल रौतेल को सौंपी गई है. इन नियुक्तियों के साथ दोनों आयोगों में नई नेतृत्व व्यवस्था तैयार हो गई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भोपाल 23 अप्रैल 2026/मध्यप्रदेश के आयोगों में बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों की शुरूआत हो चुकी है. पूर्व विधायक कैलाश जाटव को अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी पूर्व विधायक रामलाल रौतेल को सौंपी गई है. इन नियुक्तियों के साथ दोनों आयोगों में नई नेतृत्व व्यवस्था तैयार हो गई है. माना जा रहा है कि इन फैसलों से सामाजिक वर्गों से जुड़े मामलों की सुनवाई और नीतिगत कामकाज में तेजी आएगी. स्थानीय स्तर पर भी इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज है और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है.</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63374" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/04/S_T.jpg" alt="" width="435" height="576" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/04/S_T.jpg 435w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/04/S_T-227x300.jpg 227w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/04/S_T-317x420.jpg 317w" sizes="(max-width: 435px) 100vw, 435px" /></p>
<p>अनुसूचित जाति आयोग में अध्यक्ष के साथ दो सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है. इसमें रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है. कैलाश जाटव पहले विधायक रह चुके हैं और संगठन में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जिससे उनके अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था और वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में जुड़े रहे हैं.</p>
<p><strong>ST आयोग के अध्यक्ष कौन?</strong></p>
<p>वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग की कमान रामलाल रौतेल को दी गई है. वे इससे पहले 2010 में भी इस आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं, यानी दूसरी बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है. रौतेल दो बार अनूपपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं और कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. आयोग में सदस्य के तौर पर भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे के नाम शामिल किए गए हैं. उनके अनुभव को देखते हुए जनजातीय मुद्दों पर काम तेज होने की उम्मीद है.</p>
<p><strong>नियुक्तियों का रास्ता साफ</strong><br />
इसी बीच राज्य महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग में भी नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एक-दो दिनों में दोनों आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों का ऐलान किया जा सकता है. भोपाल से जारी इन फैसलों को संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के बाद आयोगों की गतिविधियां और प्रभावी होंगी तथा जमीनी स्तर पर मामलों के निपटारे में तेजी आएगी.</p>
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