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	<title>महान &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>अब शिवराज के मंत्री ने गोडसे को बताया महान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Nov 2017 13:55:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[महान]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट में सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महापुरुष बताया है. मंत्री का यह बयान सूबे के ग्वालियर शहर में नाथूराम गोडसे की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनाए जाने के बाद आया है. राजधानी भोपाल में मीडिया से  बातचीत में लाल सिंह आर्य ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट में सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महापुरुष बताया है. मंत्री का यह बयान सूबे के ग्वालियर शहर में नाथूराम गोडसे की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनाए जाने के बाद आया है.</h4>
<h4>राजधानी भोपाल में <b>मीडिया से </b> बातचीत में लाल सिंह आर्य ने कहा कि हिंदू महासभा को नाथूराम गोडसे की मूर्ति स्थापित करने के पहले सरकार से अनुमति मांगनी चाहिए थी. हालांकि, गोडसे के बारे में पूछे गए सवाल पर मंत्री ने उसे महापुरुष का दर्जा दिया है.</h4>
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		<title>महान कर्मयोगी नानाजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Oct 2017 09:27:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[कर्मयोगी]]></category>
		<category><![CDATA[महान]]></category>
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					<description><![CDATA[         जन्मदिन पर विशेष &#160; वर्तमान समय में जब मंत्रीपद ,प्रतिष्ठा आदि प्राप्त करने के लिए समाजसेवी, राजनीतिज्ञ कुछ भी करने को तैयार रहते, ऐसे लोगों को महान कर्मयोगी समाजसेवी नानाजी देशमुख के जीवन  से सीख लेने चाहिए। नानाजी ने समाजसेवा के लिए उच्च आदर्श स्थापित करते हुए न केवल मंत्री पद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5>         जन्मदिन पर विशेष</h5>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्तमान समय में जब मंत्रीपद ,प्रतिष्ठा आदि प्राप्त करने के लिए समाजसेवी, राजनीतिज्ञ कुछ भी करने को तैयार रहते, ऐसे लोगों को महान कर्मयोगी समाजसेवी नानाजी देशमुख के जीवन  से सीख लेने चाहिए। नानाजी ने समाजसेवा के लिए उच्च आदर्श स्थापित करते हुए न केवल मंत्री पद ठुकरा दिया था बल्कि एक ऐसा सेवा प्रकल्प खड़ा किया जो पूरी दुनिया के लिए शोध का विषय बन गया। वे नानाजी ही थे जिन्होंने गोरखपुर में संघ की शिक्षा योजना के अंतर्गत सबसे पहला स्वरस्वती शिशु मंदिर प्रारम्भ किया था। आज यह योजना बट वृक्ष का रूप ले चुकी है। आज नाना जी देशमुख के जन्मदिन पर shabdshaktinews. com का शत शत नमन</p>
<p>नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित हुए। उनसे  प्रेरित होकर वे संघ प्रचारक निकले उन्होंने समाज सेवा और सामाजिक गतिविधियों में रुचि ली.  । हेडगेवार जी ने नानाजी की प्रतिभा को पहचान लिया और आर.एस.एस. की शाखा में आने के लिये प्रेरित किया।</p>
<p>१९४० में, डॉ॰ हेडगेवार जी के निधन के बाद नानाजी ने कई युवकों को महाराष्ट्र की आर.एस.एस. शाखाओं में शामिल होने के लिये प्रेरित किया। नानाजी उन लोगों में थे जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र की सेवा में अर्पित करने के लिये आर.एस.एस. को दे दिया। वे प्रचारक के रूप में उत्तरप्रदेश भेजे गये। आगरा में वे पहली बार  दीनदयाल जीसे मिले। बाद में उन्हें संघ विस्तार हेतु गोरखपुर भेज गया। ।उस समय यह कार्य आसान नहीं था। संघ के पास दैनिक खर्च के लिए भी पैसे नहीं होते थे। नानाजी को धर्मशालाओं में ठहरना पड़ता था और लगातार धर्मशाला बदलना भी पड़ता था, क्योंकि एक धर्मशाला में लगातार तीन दिनों से ज्यादा समय तक ठहरने नहीं दिया जाता था। यहां वे बाबा राघवदास के सम्पर्क में आए उन्होंने  उन्हें इस शर्त पर ठहरने दिया कि वे उनके लिये खाना बनाया करेंगे। तीन साल के अन्दर उनकी मेहनत रंग लायी और गोरखपुर के आसपास संघ की ढाई सौ शाखायें खुल गयीं। नानाजी ने शिक्षा पर बहुत जोर दिया। उन्होंने पहले सरस्वती शिशु मन्दिर की स्थापना गोरखपुर में की।</p>
<p>१९४७ में, आर.एस.एस. ने राष्ट्रधर्म और <a class="mw-redirect" title="पांचजन्य" href="https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF" target="_blank" rel="noopener">पांचजन्य</a> नामक दो साप्ताहिक और <a title="स्वदेश (हिन्दी समाचारपत्र)" href="https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6_(%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0)" target="_blank" rel="noopener">स्वदेश (हिन्दी समाचारपत्र)</a> निकालने का फैसला किया। <a title="अटल बिहारी वाजपेयी" href="https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%9F%E0%A4%B2_%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A5%80" target="_blank" rel="noopener">अटल बिहारी वाजपेयी</a> को सम्पादन, दीन दयाल उपाध्याय को मार्गदर्शन और नानाजी को प्रबन्ध निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गयी। पैसे के अभाव में पत्र पत्रिकाओं का <a title="प्रकाशन" href="https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8" target="_blank" rel="noopener">प्रकाशन</a> संगठन के लिये बेहद मुश्किल कार्य था, लेकिन इससे उनके उत्साह में कमी नहीं आयी और सुदृढ राष्ट्रवादी सामाग्री के कारण इन प्रकाशनों को लोकप्रियता और पहचान मिली। १९४८ में <a class="mw-redirect" title="गान्धी" href="https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A5%80" target="_blank" rel="noopener">गान्धीजी</a> की हत्या के बाद आर.एस.एस. पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, जिससे इन प्रकाशन कार्यों पर व्यापक असर पड़ा। फिर भी भूमिगत होकर इनका प्रकाशन कार्य जारी रहा।</p>
<p>1977 में जब जनता सरकार बनी थी तो उसमें नानाजी को मंत्री बनाया गया लेकिन नाना जी ने यह कहकर की 60 वर्ष की उम्र में मंत्री बनना उचित नहीं यह कहते हुए उन्होंने मंत्री पद अस्वीकार कर समाज में आदर्श प्रस्तुत किया । उन्होंने चित्रकूट ग्रामोदय। विश्विद्यालय जैसा उत्कृष्ट सेवाभावी विश्व विख्यात प्रकल्प खड़ा किया और एक आदर्श कर्मयोगी की भांति अंतिम सांस तक सेवाकार्य में लगे रहे।</p>
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