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	<title>मैडिसन स्क्वायर में बोले मोहन भागवत &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>मैडिसन स्क्वायर में बोले मोहन भागवत  एकता और विविधता भारत के डीएनए में है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 02:52:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में पहुंचे. देर रात यहां अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारत दुनिया को ‘विविधता में एकता’ का संदेश देने के लिए है. हम सभी एक हैं और विविधता इस एकता को और समृद्ध बनाती है. इसलिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में पहुंचे. देर रात यहां अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारत दुनिया को ‘विविधता में एकता’ का संदेश देने के लिए है. हम सभी एक हैं और विविधता इस एकता को और समृद्ध बनाती है. इसलिए विविधता का जश्न मनाना, उसका सम्मान करना और उसे स्वीकार करना जरूरी है. साथ ही, हमें एकता की भावना को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए. एकता और विविधता भारत के डीएनए में है</p>
<p>मानवीय सोच की दिशा पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि मनुष्य के पास सोचने की क्षमता है और यही उसकी विशेषता है, लेकिन वह किस दिशा में सोचता है, यह महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि अगर आप सही तरीके से सोचते हैं तो ईश्वर के करीब जाते हैं और गलत तरीके से सोचते हैं तो पशुता के करीब चले जाते हैं. नर करनी करे तो नर का नारायण बन जाए.</p>
<p>उन्होंने समाज में दो तरह की प्रवृत्तियों का उल्लेख किया. एक प्रवृत्ति ‘जियो और जीने दो’ की है, जबकि दूसरी ऐसी है जिसमें व्यक्ति केवल उन्हीं लोगों को जीने देना चाहता है जो उसकी बात मानें. भागवत ने कहा कि जो लोग अपनी शर्तें मानने वालों को ही संरक्षण देते हैं, उन्हें ‘राक्षस’ कहा गया है.</p>
<p>मानवीय संवेदना का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खाना खा रहा हो और उसके सामने कोई भूखा व्यक्ति खड़ा होकर भोजन को भूखी नजरों से देख रहा हो, तो उसके सामने बैठकर बिना कुछ दिए खाना खा पाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर दूसरे के दुख को महसूस करने की स्वाभाविक क्षमता होती है और यही संवेदना उसे जिम्मेदार नागरिक बनाती है.</p>
<p>भागवत ने ‘आत्मा’ को सभी मनुष्यों को जोड़ने वाला सत्य बताया. उन्होंने कहा कि हमारे शरीर, पहनावे, भाषाएं और मान्यताएं भले अलग हों, लेकिन सभी के भीतर मौजूद आत्मा एक ही सूत्र की तरह हमें आपस में जोड़ती है. उन्होंने इसकी तुलना एक माला के अलग-अलग मोतियों को जोड़ने वाले एक धागे से की. उनके मुताबिक, यही आंतरिक एकता विविधताओं के बावजूद मानव समाज को एक सूत्र में बांधती है.</p>
<p><strong>मनुष्य का शरीर नश्वर</strong></p>
<p>मानव जीवन और आत्मा की अवधारणा पर विस्तार से बात करते हुए भागवत ने कहा कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन उसके भीतर मौजूद एक तत्व स्थायी है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म और परंपराएं इस स्थायी तत्व की व्याख्या अलग-अलग तरीके से करती हैं. कुछ लोग इसे कयामत के दिन तक जीवित रहने वाला मानते हैं, जबकि कुछ मान्यताओं के अनुसार यह जन्म-मृत्यु के कई चक्रों से गुजरता है. भागवत ने कहा कि शरीर मर जाएगा, लेकिन हमारे भीतर कुछ ऐसा है जो हमेशा जीवित रहता है. वह समय के प्रवाह में नष्ट नहीं होता. उन्होंने कहा कि दुनिया में रहते हुए हम अलग-अलग व्यक्तियों और वस्तुओं को अलग-अलग अस्तित्व के रूप में देखते हैं, लेकिन वास्तव में सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए</p>
<p>अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. राखी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी, भारत के राजदूत और संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक भारतीय लोक कला की प्रस्तुतियों के साथ हुई.</p>
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