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	<title>यू जी सी सुप्रीम कोर्ट &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>यूजीसी नए विवादित नियमों पर कुछ देर बाद सुप्रीम कोर्ट में शुरू होगी सुनवाई देशभर में हलचल तेज</title>
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		<pubDate>Thu, 19 Mar 2026 04:06:21 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[यू जी सी सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 19 मार्च 2026/UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होने जा रही है। इससे पहले 29 जनवरी को शीर्ष न्यायालय ने नियमों (Equity Regulations 2026) पर रोक लगा दी थी। अदालत ने सरकार और यूजीसी को इन याचिकाओं पर केंद्र और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 मार्च 2026/UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होने जा रही है। इससे पहले 29 जनवरी को शीर्ष न्यायालय ने नियमों (Equity Regulations 2026) पर रोक लगा दी थी। अदालत ने सरकार और यूजीसी को इन याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब देने के लिए कहा था।</p>
<p>याचिकाओं में आपत्ति उठाई गई थी कि इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ होने वाले भेदभाव तक ही सीमित रूप में बताया गया है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नोटिस जारी कीजिए, जिसका जवाब 19 मार्च तक दिया जाना है। सॉलिसिटर जनरल नोटिस स्वीकार करें।</p>
<p>पिछली सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, &#8216;यदि हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे, समाज में विभाजन होगा और इसके गंभीर प्रभाव होंगे&#8230; प्रथम दृष्टया हम कहते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने के लिए जांच करने की आवश्यकता है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।&#8217;</p>
<h2>2012 के नियमों को किया था बहाल</h2>
<p>पीठ ने नियम 3(1)(सी) के तहत संस्थागत संरक्षण से सामान्य श्रेणियों को बाहर रखने वाली जाति-आधारित भेदभाव की &#8216;गैर-समावेशी&#8217; परिभाषा को स्थगित करने का निर्देश दिया और यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2012 को बहाल कर दिया। पीठ ने आदेश दिया था कि 2012 के नियम अगले आदेश तक लागू रहेंगे।</p>
<p>सीजेआई ने सलाह दी थी कि इसपर एक्सपर्ट्स कमेटी की तरफ से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, &#8216;एक समिति का गठन होना चाहिए, जिसमें दो या तीन ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति हों, जो सामाजिक मूल्यों और समाज की समस्याओं को समझते हों। समाज का विकास कैसे होना चाहिए और यदि हम ऐसा ढांचा तैयार करते हैं तो परिसर के बाहर लोग कैसा व्यवहार करेंगे। इस विषय पर उन्हें गंभीरता से विचार करना चाहिए।&#8217;</p>
<h2>जमकर हुए थे प्रदर्शन</h2>
<p>इन नियमों के आने के बाद से ही देशभर के कई संस्थानों में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा कई सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए थे। इधर, गुरुवार की सुनवाई से पहले भी प्रदर्शनों की खबरें सामने आईं थीं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA), भीम आर्मी और तमाम अन्य संगठनों अन्य संगठनों के प्रतिनिधि ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी आदि ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।</p>
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		<title>धड़कनें तेज : UGC के नए नियमों को लेकर तारीख कल जानिए कौन हैं याचिका कर्ता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:09:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Yuu]]></category>
		<category><![CDATA[यू जी सी सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 18 मार्च 2026/UGC के नए नियमों को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है, इसपर 19 मार्च को पुनः सुनवाई होना है उल्लेखनीय सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं के माध्यम से इन नियमों की  वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। अब सभी की नजरें अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जो उच्च [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 18 मार्च 2026/UGC के नए नियमों को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है, इसपर 19 मार्च को पुनः सुनवाई होना है उल्लेखनीय सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं के माध्यम से इन नियमों की  वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। अब सभी की नजरें अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p><strong>UGC नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं,</strong><strong>ये हैं </strong><strong>प्रमुख याचिकाकर्ता</strong></p>
<p>नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रहे विवाद के बीच मामला अब Supreme Court of India पहुंच गया है। इन नियमों के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न आधारों पर चुनौती दी है।</p>
<p><strong>एक नहीं, कई हैं याचिकाकर्ता</strong></p>
<p>UGC के 2026 के नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई एक मुख्य याचिकाकर्ता नहीं है, बल्कि अलग-अलग व्यक्तियों और समूहों ने स्वतंत्र रूप से याचिकाएं दायर की हैं।<br />
प्रमुख याचिकाकर्ताओं में कौन-कौन शामिल<br />
इन याचिकाओं में कुछ प्रमुख नाम सामने आए हैं—</p>
<p><strong>मृत्युंजय तिवारी</strong></p>
<p>Mrityunjay Tiwari बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता हैं। इन्होंने इस मामले में सबसे पहले प्रमुख याचिका दायर की।<br />
मुख्य तर्क: UGC के नियम भेदभावपूर्ण हैं और समानता के सिद्धांत के खिलाफ जाते हैं।</p>
<p><strong>एडवोकेट विनीत जिंदल</strong></p>
<p>Vineet Jindal सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और सामाजिक-वैधानिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं।<br />
मुख्य मांग: भेदभाव की परिभाषा को “कास्ट-न्यूट्रल” बनाया जाए ताकि सभी वर्गों को समान सुरक्षा मिल सके।</p>
<p><strong>राहुल दीवान</strong></p>
<p>Rahul Dewan भी इस मामले में याचिकाकर्ता के रूप में सामने आए हैं।<br />
मुख्य तर्क: नियमों में सामान्य वर्ग (General Category) के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है।</p>
<p><strong>अन्य याचिकाएं भी दाखिल</strong></p>
<p>इनके अलावा कई अन्य याचिकाकर्ताओं—जिनमें छात्र, शोधार्थी और अधिवक्ता शामिल हैं—ने भी नियमों को चुनौती दी है।<br />
उनका कहना है कि ये नियम:<br />
अस्पष्ट (Vague) हैं<br />
दुरुपयोग की संभावना रखते हैं</p>
<p><strong>पृष्ठभूमि: 2019 की याचिका से जुड़ा मामला</strong></p>
<p>इस पूरे मामले की जड़ 2019 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ी है।<br />
इस याचिका को Radhika Vemula और Abeda Salim Tadvi ने दायर किया था।<br />
उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की थी।<br />
इसी के बाद UGC ने नए नियम लागू किए, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।</p>
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