<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>योग &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/tag/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Fri, 12 Dec 2025 15:15:02 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>योग शास्त्र संगम 2025 का उद्घाटन शनिवार को</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ae-2025-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%98%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 15:15:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=59861</guid>

					<description><![CDATA[&#160; ग्वालियर 12 दिसंबर 2025/श्रीमद्भगवत गीता में योग की संकल्पना&#8221; विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार &#8220;योग शास्त्र संगम 2025&#8221; का शुभारंभ  13 दिसंबर को होगा। विवेकानंद केंद्र ग्वालियर विभाग संचालक अजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि &#8220;13 दिसंबर को लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में सुबह 11 बजे उद्घाटन सत्र आदि शंकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर 12 दिसंबर 2025/श्रीमद्भगवत गीता में योग की संकल्पना&#8221; विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार &#8220;योग शास्त्र संगम 2025&#8221; का शुभारंभ  13 दिसंबर को होगा। विवेकानंद केंद्र ग्वालियर विभाग संचालक अजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि &#8220;13 दिसंबर को लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में सुबह 11 बजे उद्घाटन सत्र आदि शंकर विद्यापीठ, उत्तरकाशी के प्रमुख स्वामी हरि ब्रह्मइंद्रानंद तीर्थ महाराज के पावन सानिध्य में प्रारम्भ होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर उपस्थित रहेंगे एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान की कुलपति प्रो. कल्पना शर्मा करेंगी। इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी से पधारे अखिल भारतीय योग प्रमुख श्री रवि शर्मा जी का मुख्य वक्तव्य होगा।&#8221; सुबह 9 बजे से 10 बजे तक प्रतिभागियों का पंजीयन होगा एवं किट वितरण संपन्न होगा।<br />
इस दो दिवसीय नेशनल कॉन्‍फ्रेंस में योग शिक्षकों, योग शोधार्थीयों एवं योग साधकों द्वारा &#8220;श्रीमद्भगवत गीता में योग की संकल्पना&#8221; विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।<br />
विवेकानंद केन्‍द्र कन्‍याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर एवं लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दो दिवसीय नेशनल कॉन्‍फ्रेंस ‘योग शास्‍त्र संगम&#8217; का आयोजन 13 एवं 14 दिसंबर को लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के सभागार में आयोजित किया जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्रीमद् भगवत गीता में योग की अवधारणा विषय पर आधारित कॉन्‍फ्रेंस 13 एवं 14 दिसंबर को</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%a8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Dec 2025 12:21:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[नेशनल कॉन्‍फ्रेंस]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=59750</guid>

					<description><![CDATA[ग्‍वालियर6 दिसंबर 2025/ विवेकानंद केन्‍द्र कन्‍याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर एवं लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दो दिवसीय नेशनल कॉन्‍फ्रेंस ‘योग शास्‍त्र संगम&#8217; का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद् भगवत गीता में योग की अवधारणा विषय पर आधारित यह कॉन्‍फ्रेंस आगामी 13 एवं 14 दिसंबर को लक्ष्मी बाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्‍वालियर6 दिसंबर 2025/ विवेकानंद केन्‍द्र कन्‍याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर एवं लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के संयुक्‍त तत्‍वावधान में दो दिवसीय नेशनल कॉन्‍फ्रेंस ‘योग शास्‍त्र संगम&#8217; का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद् भगवत गीता में योग की अवधारणा विषय पर आधारित यह कॉन्‍फ्रेंस आगामी 13 एवं 14 दिसंबर को लक्ष्मी बाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान परिसर में होगी, जिसमें देशभर के विद्वान एवं शोधकर्ता सम्मिलित होंगे। योग शास्त्र संगम में सहभागिता करने एवं पेपर भेजने की अन्तिम तिथि 10 दिसंबर है</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मानसिक सुकून के साथ तनावमुक्&#x200d;त रहना है तो रोज करें वृक्षासन</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%ae/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 May 2019 00:56:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=12275</guid>

					<description><![CDATA[वृक्षासन यानी पेड़ के समान। यह आसन करने से मनुष्य की आकृति पेड़ के समान हो जाती है। यही कारण है कि इसे वृक्षासन कहते हैं। इस आसन से न सिर्फ शारीरिक रूप से हमें लाभ मिलता है वरन इसके करने से हमें मानसिक सुकून भी मिलता है। जहां एक ओर वृक्षासन से हमारे शरीर के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3 style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; color: #000000; font-family: robotolight, EkMukta, 'Segoe UI', sans-serif; widows: auto;"><span style="font-family: robotolight, EkMukta; font-size: 17px; line-height: 26px; text-align: justify; widows: auto;">वृक्षासन यानी पेड़ के समान। यह आसन करने से मनुष्य की आकृति पेड़ के समान हो जाती है। यही कारण है कि इसे वृक्षासन कहते हैं। इस आसन से न सिर्फ शारीरिक रूप से हमें लाभ मिलता है </span><span style="font-family: robotolight, EkMukta; font-size: 17px; line-height: 26px; text-align: justify; widows: auto;">वरन इसके करने से हमें मानसिक सुकून भी मिलता है। जहां एक ओर वृक्षासन से हमारे शरीर के विभिन्न अंग विशेषों को लाभ पहुंचता है, वहीं दूसरी मानसिक तनाव को भी यह आसन दूर रखता है। कहने का मतलब यह कि मानसिक सुकून चाहिए तो वृक्षासन कीजिए। इसके बारे में विस्&#x200d;तार से जानिये।</span></h3>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 25px; outline: none; font-size: 17px; color: #000000; font-family: robotolight, EkMukta; line-height: 26px; widows: auto;"><span style="font-family: robotolight, EkMukta; font-size: medium; line-height: 26px; widows: auto; text-align: center;">इस आसन के ला</span></p>
<div id="w1535449646732" class="ls-cmp-wrap" style="padding: 1px 0px; margin: 0px; outline: none; color: #000000; font-family: robotolight, EkMukta, 'Segoe UI', sans-serif; line-height: 16px; widows: auto;">
<div id="1535449646732" class="iw_component" style="padding: 0px; margin: -1px 0px; outline: none;">
<div class="container-fluid" style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;">
<div class="container" style="padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; margin: 0px 10.796875px; outline: none; width: 338.390625px; float: left;">
<div class="articleDetail" style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; width: 338.390625px; float: left;">
<div class="slieSection" style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;">
<div class="container" style="padding: 0px; margin: 0px 10.140625px; outline: none; width: 318.078125px; float: left;">
<div class="textDetails" style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; float: left; width: 318.078125px;">
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 25px; outline: none; font-size: 17px; font-family: robotolight, EkMukta; line-height: 26px; text-align: justify;">वृक्षासन के असंख्य लाभ है बशर्ते इसे नियमानुसार किया जाए। साथ ही इसकी सावधानियां भी बरती जाएं। योग विशेषज्ञों की मानें तो वृक्षासन सुबह उठकर किया जाए तो इसका हमें फायदा पहुंचता है। इसके नियमित करते से बेडौल शरीर सुडौल बनता है। जिन्हें घुटने के दर्द की शिकायत है, वृक्षासन करने से उन्हें घुटनों के दर्द से मुक्ति मिलती है। यह आसन उन लोगों के लिए खासकर लाभकर है जिन्हें चलने का काम ज्यादा करना पड़ता है। मसलन यदि आप सेल्स पर्सन हैं या किसी कूरिअर कंपनी में काम करते हैं तो इस आसन को अवश्य करें। इसकी एक वजह यह है कि वृक्षासन हमारे पैरों को मजबूती प्रदान करता है।<br style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;" /><br style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;" />इतने में ही वृक्षासन की खूबी खत्म नहीं होती। नियमित वृक्षासन करने से हमारी एकाग्र क्षमता बढ़ती है। एकाग्र क्षमता जो कि हमारे याद्दाश्त की बेहतर होने की निशानी है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि मौजूदा दौर में बेहतर कॅरिअर, बेहतर सम्बंध आदि के लिए बेहतर याद्दाश्त कितनी जरूरी है। यह आसन सिर्फ पुरुष करें, ऐसा जरूरी नहीं है। इस आसन में घर की महिलाएं और बच्चों को भी भाग लेना चाहिए।<br style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;" /><br style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;" />वृक्षासन पैरों को मजबूत तो बनाता ही है। साथ ही यह स्नायुमण्डल का विकास कर पैरों को स्थिरता प्रदान करता है। यह कमर और कूल्हों के आसपास जमीं अतिरिक्त चर्बी को हटाता है। मतलब यह है कि अगर आपका वजन ज्यादा है यानी आप मोटे हैं तो यह आसन आपको विशेष रूप से लाभ पहुंचा सकता है। चर्बी घटाने के बाद यह आसन शरीर को कमजोर नहीं करता वरन मजबूती देता है। अगर आप अपनी बढ़ती तोंद से परेशान हैं तो इस आसन को अवश्य करें।</p>
<h3 style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none;"><span style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; color: #3366ff;"><span style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; color: #000000 !important; font-size: medium;">कैसे करें यह आसन</span></span></h3>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 25px; outline: none; font-size: 17px; font-family: robotolight, EkMukta; line-height: 26px; text-align: justify;">सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों के बीच कुछ दूरी बनाकर खड़े रहें। फिर हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए सीधा कर हथेलियों को मिला दें। अब दाहिने पैर को मोड़ते हुए उसके तलवे को बाईं जांघ पर टिका दें। बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए हथेलियां, सिर और कंधे एक ही सीध में हों। जब तक संभव हो ऐसे रहें। कुछ देर बाद अन्य पैर से भी यह दोहराएं।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मस्तिष्क को करना है तेज और संतुलित तो करें यह योगासन</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%94%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Apr 2019 01:38:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=11387</guid>

					<description><![CDATA[आइए जानते हैं इन 4 योगासनों के बारे में जो शरीर पर आपका संतुलन बनाने में मदद करेंगे : अनुलोम-विलोम (Breathing exercise) :अनुलोम विलोम प्राणायाम मस्तिष्क में संतुलन लाता है। यह हमारी विचार करने की शक्ति और भावनाओं में समन्वय लाता है। प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी सांस भरते हैं तो शुद्ध वायु हमारे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">आइए जानते हैं इन 4 योगासनों के बारे में जो शरीर पर आपका संतुलन बनाने में मदद करेंगे :</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;"><span style="box-sizing: border-box; list-style: none; font-weight: bold;">अनुलोम-विलोम (Breathing exercise) :</span>अनुलोम विलोम प्राणायाम मस्तिष्क में संतुलन लाता है। यह हमारी विचार करने की शक्ति और भावनाओं में समन्वय लाता है। प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी सांस भरते हैं तो शुद्ध वायु हमारे खून के दूषित पदार्थों को बाहर निकाल देती है।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">इसे करने के लिए पद्मासन में बैठ जाएं। इस तरह बैठना संभव न हो तो कुर्सी पर अपनी रीढ़, कमर और गर्दन को सीधा रखते हुए बैठें। दाहिने हाथ की नसाग्र मुद्रा बनाएं। इसके लिए दाएं अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से इस प्राणायाम की शुरुआत करें। पहली दो उंगलियों को बिंदी वाले स्थान पर रखें। बाईं हथेली को बाएं घुटने पर ज्ञान मुद्रा में अर्थात अंगूठे और पहली उंगली के अग्रभाग को मिलाकर रखें। बाकी की तीन उंगलियां खुली रखें।</p>
<div class="add-widgettop adalign" style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 10px auto; text-align: center; max-width: 100%; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; font-size: 14px; line-height: 20px; widows: auto;">
<div id="para-ad-2484698" class="row" style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin-right: -15px; margin-left: -15px;"></div>
</div>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">अब बाईं नाक से गहरी सांस भरें और इसी नाक से पूरी सांस धीरे-धीरे बाहर निकाल दें। इसके बाद अनामिका यानी तीसरी उंगली से बाईं नासिका को बंद कर दीजिए। पांच बार दाईं नासिका से गहरी सांस भरिए और दाईं नासिका से ही नियंत्रणपूर्वक सांस को बाहर निकाल दीजिए। अभ्यास के दौरान साँस लेने और छोड़ने की आवाज नहीं होनी चाहिए न ही सांस रोकनी है। इसके बाद दाएं हाथ से यही प्रक्रिया दोहराएं।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;"><span style="box-sizing: border-box; list-style: none; font-weight: bold;">ताड़ासन (Mountain Pose) : </span>ताड़ासन योग मुद्रा पैर से लेकर दोनों भुजाओं और शरीर में खिंचाव लाने के लिए और लंबाई बढ़ाने के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। इसके अलावा भी यह आसन करने से शरीर को कई फायदे होते हैं। यह विभिन्न विकारों से हमें दूर रखता है।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">ताड़ासन दिन में किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन भोजन करने के बाद ही अगर यह आसन करना चाहते हैं तो करीब चार से छह घंटे पहले भोजन कर लें। इसके अलावा यदि आपने ताड़ासन को पहले कभी नहीं किया है और अभी शुरुआत करने जा रहे हैं तो आपको धैर्य के साथ धीरे-धीरे इसका अभ्यास करना चाहिए। एकदम से काफी देर के लिए पंजों के बल खड़े होने से तकलीफ हो सकती है।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">फर्श पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें। इसके बाद अपने हाथों को शरीर से छूते हुए बिल्कुल खुला लटकाए रखें। हाथों में किसी तरह का तनाव न हो और ना ही आपकी मुट्ठी बंद हो। अब सांस लेते हुए अपने दोनों भुजाओं को ऊपर उठाएं और हाथों की उंगलियों को एक दूसरे से इंटरलॉक कर लें। इसके बाद अपनी एड़ियों को उठाएं और पैर की उंगलियों के सहारे खड़े हो जाएं। अब पैरों से लेकर उंगलियों और शरीर में खिंचाव को महसूस करें। सांस लेते हुए इस मुद्रा में कुछ देर तक बने रहें। अब सांस को छोड़ते हुए विश्राम की मुद्रा में आ जाएं। धीरे-धीरे करते हुए इस मुद्रा को कम से कम 10 बार दोहराएं।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;"><span style="box-sizing: border-box; list-style: none; font-weight: bold;">ऊर्ध्व हस्तानासन (Upward Salute) :</span> ऊर्ध्व हस्तानासन का मतलब है उठे हुए हाथों की मुद्रा। इस आसन का अभ्यास आपको मानसिक और शारीरिक लाभ देता है। इसे करने के लिए अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाकर सीधे खड़े हो जाएं। हाथों को इस तरह रखें कि आपकी हथेलियां सामने की ओर खुली रहें। गहरी सांस भरें और हाथों को सिर के ऊपर छत की ओर लेकर जाएं। अगर आपके कंधों में कसावट है तो हाथों के सिर के ऊपर समानांतर आने पर रुक जाएं। दोनों हथेलियों को जोड़ने का प्रयास करें। अगर न हो रहा हो तो रहने दें। अपनी गर्दन को ऊपर उठाकर अंगूठे की ओर देखें और सिर को पीछे के ओर आराम से लेकर जाएं। इस अवस्था में कुछ देर गहरी सांस लें। सांस बाहर छोड़ें और हाथों को बाजू से शुरुआती मुद्रा में ले आएं। अब कमर को आगे झुकाकर उत्तानासन में आ जाएं। गर्दन या कंधे की चोट होने पर इस आसन को न करें।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;"><span style="box-sizing: border-box; list-style: none; font-weight: bold;">उत्तानासन (Standing forward bend) :</span>उत्तानासन का मतलब स्ट्रैच पोज होता है। यह आसन करने से शरीर को बहुत फायदे होते हैं। इस आसन को करने के दौरान आपका सिर आपके हृदय के नीचे होता है। जिससे आपके पैरों के बजाय आपके सिर में रक्त परिसंचरण होता है। साथ ही आपकी कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचता है।</p>
<p style="box-sizing: border-box; list-style: none; margin: 0px; font-size: 18px; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; widows: auto;">इसे करने के लिए खड़े हो जाएं और अपने हाथ सीधे करके दोनों ओर रखें। अब सांस छोड़ते हुए सामने की ओर झुकते हुए सिर को नीचे की ओर लेकर जाएं। जितना नीचे आराम से जा सकते हैं, उतना अच्छा रहता है। अपनी दोनों हथेलियों से जमीन को छूते हुए कुछ देर इसी अवस्था में रुकें। ध्यान रहे इस आसन को करते हुए आपके दोनों घुटने सीधे रहने चाहिए। अपने हाथों को अपने पैरों के आगे फर्श पर आराम करने दें। अब धीरे-धीरे वापस सीधे खड़े होने की अवस्था में आ जाएं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
