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	<title>राजनीति &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>जोतिरादित्य के लिए नया टेंशन दिग्गीराजा आ रहे हैं चुनौती देने</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jan 2018 15:48:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[कांग्रेस हाईकमान भले ही जोतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश में भावी मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने के लिए उनका रास्ता साफ करने के प्रयास में जुटा है लेकिनऐसा लगता है गुटबाजी में फंसी कांग्रेस में जोतिरादित्य की राहें इतनी आसान नहीं हैं अब इस बात के संकेत मिले हैं कि सिंधिया गुट के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कांग्रेस हाईकमान भले ही जोतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश में भावी मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने के लिए उनका रास्ता साफ करने के प्रयास में जुटा है लेकिनऐसा लगता है गुटबाजी में फंसी कांग्रेस में जोतिरादित्य की राहें इतनी आसान नहीं हैं अब इस बात के संकेत मिले हैं कि सिंधिया गुट के प्रबल विरोधी और दस वर्षों तक लगातार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजयसिंह विधानसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने जा रहे हैं। इससे पहले  खबर आई थी कि सिंधिया विरोधी एक अन्य गुट के कांग्रेसी नेता कमलनाथ को सिंधिया की राह से दूर करने के लिए   कांग्रेस हाईकमान उन्हें मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर कर कांग्रेस का कोषाध्यक्ष बनाने की तैयारी कर रही है अभी इस पद पर मध्यप्रदेश के ही वयोवृद्ध कांग्रेसी मोतीलाल वोरा काबिज हैं। लेकिन अब दिग्विजयसिंह के मध्यप्रदेश में सक्रियता की खबर निश्चित ही कांग्रेस हाईकमान का सिरदर्द बढ़ा देगी।</p>
<p>दिग्विजयसिंह के मध्यप्रदेश की  राजनीति में पुनः सक्रीय होने की बात दिग्विजयसिंह के खासमखास गोविंद सिंह ने आज कही है गोविंद सिंह ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में सूबे की सत्ता पर कांग्रेस का ही कब्जा होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री गोविंद सिंह का कहना है कि मप्र की जनता बीजेपी की योजनाओं से इतना परेशान हो चुकी है कि अब भाजपा को वोट नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह जो कहते हैं वह करते हैं, उन्होंने 10 साल प्रदेश की राजनीति से दूर रहने का वचन दिया था जिसे उन्होंने निभाया। अब उन्होंने वादा किया कि वे नर्मदा परिक्रमा करेंगे, तो राजनीति छोड़कर नर्मदा परिक्रमा में लगे हुए हैं। गोविंद सिंह  ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा के  बाद वे मध्यप्रदेश   की  राजनीति में सक्रिय  होंगे ।</p>
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		<title>अब यशवंत सिन्हा को भाजपा की धमकी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Oct 2017 12:14:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा ने अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा को खुली धमकी दी है। भाजपा ने कहा है कि उनकी प्रताडि़त करने वाली गतिविधियां सहनशीलता की सीमाओं के पार जा रही हैं। हालांकि भाजपा ने यह नहीं बताया कि यदि यशवंत सिन्हा नहीं रुके तो भाजपा क्या करेगी। भाजपा शीर्ष नेतृत्व [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="content-block">भाजपा ने अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा को खुली धमकी दी है। भाजपा ने कहा है कि उनकी प्रताडि़त करने वाली गतिविधियां सहनशीलता की सीमाओं के पार जा रही हैं। हालांकि भाजपा ने यह नहीं बताया कि यदि यशवंत सिन्हा नहीं रुके तो भाजपा क्या करेगी। भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने धमकी देने के लिए प्रवक्ता अनिल बलुनी को मीडिया के सामने भेजा था। बलुनी ने गुरुवार को कहा कि अब पता चला कि उन्हें अर्थशास्त्र का ज्ञान कहां से मिला। सिन्हा पूर्व की भ्रष्ट और गरीब विरोधी संप्रग सरकार का बिना पेंदी वाला समर्थक बन गए हैं और उन्होंने कांग्रेस में नया दोस्त तलाश लिया ह</div>
<div class="content-block">भाजपा ने गुरुवार को सिन्हा को चेतावनी भी दी है। बलुनी ने कहा है कि उनकी प्रताडि़त करने वाली गतिविधियां सहनशीलता की सीमाओं के पार जा रही हैं। बलुनी ने कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की किताब का हवाला दिया। कहा कि अब यह साफ हो गया है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था पर कहां से ज्ञान जुटाया है। एक कांग्रेस नेता के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी से पता चलता है कि उनकी अर्थव्यवस्था को कौन प्रभावित कर रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।</div>
<div class="content-block"></div>
<div class="content-block">इससे पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि कुछ लोग 80 की उम्र में भी नौकरी का आवेदन लगा रहे हैं। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों इशारों में उन्हे महाभारत में कर्ण के सारथी शल्य की तरह निराशा फैलाने वाला व्यक्ति करार दिया था। सिन्हा ने इसके जवाब में कहा है कि वह भीष्म पितामह के जैसे नहीं हैं जो अर्थव्यवस्था का चीरहरण होते देख चुप बैठे रहेंगे</div>
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		<title>दिग्गिराजा चले आध्यात्मिक यात्रा पर,पार्टी ने मंजूर किया अवकाश</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/858-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Sep 2017 10:31:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[अपनी ऊलजुलूल बयानबाजी औऱ क्रियाकलापों के कारण चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता व महासचिव दिग्विजयसिंह अब पार्टी गतिविधियों से कुछ समय के अवकाश को लेकर चर्चा में है,औऱ खबर है कि पार्टी ने उन्हें यह अवकाश प्रदान भी कर दिया है। दिग्गी राजा के अवकाश के दौरान आध्यात्मिक यात्रा पर जाने की खबर है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अपनी ऊलजुलूल बयानबाजी औऱ क्रियाकलापों के कारण चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता व महासचिव दिग्विजयसिंह अब पार्टी गतिविधियों से कुछ समय के अवकाश को लेकर चर्चा में है,औऱ खबर है कि पार्टी ने उन्हें यह अवकाश प्रदान भी कर दिया है। दिग्गी राजा के अवकाश के दौरान आध्यात्मिक यात्रा पर जाने की खबर है। वैसे इस यात्रा में वह मध्यप्रदेश के 110 और गुजरात के 20 से अधिक विधनसभा छेत्रों से गुजरेंगे ओर इन दोनों प्रदेशों में चुनाव होने हैं अतः दिग्गी का मक़सद साफ समझा जा सकता है।</p>
<div class="content-block">राजनीति से रिटायरमेंट की मांग कर चुके कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को रिटायरमेंट तो नहीं मिला लेकिन 6 माह का धार्मिक यात्रा अवकाश जरूर मिल गया है। सोमवार को दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा से मुलाकात कर एआईसीसी को 6 महीने के लिए अलविदा कह दिया। राजनीति से ब्रेक लेकर दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा पर निकल रहे हैं। फिलहाल वो पार्टी महासचिव बने रहेंगे लेकिन किसी राज्य का प्रभार नहीं देखेंगे।</div>
<div></div>
<div class="content-block">कांग्रेस के दिग्गज महासचिव और दो बार के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति से 6 महीने के लिए दूर रहने का फैसला लिया है। सोमवार को ब्रेक से पहले आखिरी बार 24 अकबर रोड आए दिग्विजय सिंह ने पार्टी का काम कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को सौंप दिया। दिग्विजय सिंह फिलहाल महासचिव होने के साथ साथ आंध्र प्रदेश के प्रभारी भी हैं। सुबह उन्होंने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की। 3300 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा में उन्हें 6 महीने लगेंगे। दिग्विजय इस यात्रा को गैर राजनीतिक और आध्यात्मिक यात्रा बता रहे हैं।</div>
<div class="content-block"></div>
<div class="content-block">पूर्व मुख्यमंत्री भले ही अपनी यात्रा को राजनीतिक मकसद से परे बता रहे हों लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनकी यात्रा ने राज्य में सियासी सुगबुगाहट पैदा कर दी है। नर्मदा के किनारे किनारे अपनी 3300 किलोमीटर की यात्रा के दौरान दिग्गी मध्यप्रदेश की 110 विधानसभा सीटों और गुजरात की 20 विधानसभा सीटों से गुजरेंगे। हालांकि, दिग्विजय राज्य की राजनीति में लौटने से इंकार करते रहे हैं।</div>
<div class="content-block"></div>
<div class="content-block">मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव 2003 में हारने के बाद उन्होंने कहा था कि वो अगले 10 साल कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे और उन्होंने उसका पालन भी क़िया। 2004 से वो पार्टी के महासचिव हैं लेकिन कुछ महीने पहले उन्होंने सोनिया गांधी से मिलकर सभी राज्यों का प्रभार लेने की गुज़ारिश की थी। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की गतिविधियों से लगभग मुक्त कर दिया था। अब जब 6 महीने बाद वे संगठन में वापसी करेंगे तो उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा इस पर तमाम कयास लगाये जा रहे हैं।</div>
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