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	<title>रामजन्मभूमि &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>अब 6 अगस्त से अयोध्या विवाद की नियमित सुनवाई, आरएसएस ने किया स्वागत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Aug 2019 13:58:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[रामजन्मभूमि]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में अब राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई होगी. इस मामले में अब मध्यस्थता के जरिए समाधान की उम्मीद खत्म हो गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि इस घटनाक्रम के मद्देनजर अब इस भूमि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 class="small_intro_vid less_text _disable_copy" style="box-sizing: border-box; margin-top: 15px; margin-bottom: 0px; font-family: Roboto; font-weight: 500; line-height: 30px; color: initial; font-size: 18px; border-bottom-style: none; height: auto; overflow: hidden; widows: auto;">सुप्रीम कोर्ट में अब राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई होगी. इस मामले में अब मध्यस्थता के जरिए समाधान की उम्मीद खत्म हो गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि इस घटनाक्रम के मद्देनजर अब इस भूमि विवाद की छह अगस्त से रोजाना सुनवाई होगी. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. मध्यस्थता समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिन्दू और मुस्लिम पक्षकार इस पेचीदा भूमि विवाद का समाधान नहीं खोज सके. यहां जानिए अब इस मामले में कैसे होगी सुनवाई और कितने दिनों में आ सकता है फैसला. बता दें कि वर्तमान चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.</h2>
<ul>
<li><strong><span style="color: #993300;"><em>आरएसएस ने किया स्वागत</em></span></strong></li>
</ul>
<p>उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि मामले की नियमित सुनवाई करने के निर्णय का स्वागत किया है।।  सुरेश (भय्याजी) जोशी, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक  ने अपने वक्तव्य में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की बाधाएँ हटाने हेतु मध्यस्थता के प्रयास सफल होने की अपेक्षा थी, परन्तु नहीं हो पाए।</p>
<p>6 अगस्त से रोजाना सुनवाई करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। और विश्वास व्यक्त करते हैं कि निश्चित समयावधि में बहुलम्बित विवाद हल होगा और मन्दिर निर्माण की कानूनी बाधाएं दूर होकर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>रामजन्मभूमि विवाद समाधान के लिए नया फार्मूला पेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Oct 2017 11:17:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[रामजन्मभूमि]]></category>
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					<description><![CDATA[ उच्चतम न्यायाल (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई की तारीख तय होने के बाद अयोध्या विवाद का अदालत के बाहर समाधान खोज निकालने के प्रयास तेज होने लगे हैं, लेकिन इन प्रयासों कितनी सफलता मिलेगी यह तो वक्त ही बताएगा। हालांकि इस सिलसिले में सोमवार को गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली में एक सेमीनार का आयोजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div id="divNavigation"></div>
<h3 class="adspace"> <a>उच्चतम न्यायाल (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई की <strong>तारीख</strong> तय होने के बाद अयोध्या विवाद का अदालत के बाहर समाधान खोज निकालने के प्रयास तेज होने लगे हैं, लेकिन इन प्रयासों कितनी सफलता मिलेगी यह तो वक्त ही बताएगा। हालांकि इस सिलसिले में सोमवार को गांधी जयंती के <strong>अवसर</strong> पर दिल्ली में एक सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें रामजन्मभूमि विवाद का एक नया फार्मूला पेश किया।</a></h3>
<h5><span style="font-size: 16px;">मीडिया रिपोर्ट अनुसार पुणे स्थित एमआइटी व‌र्ल्ड पीस यूनिवसिर्टी के अध्यक्ष डाक्टर विश्वनाथ कराड इस फार्मूले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं। माना जा रहा है कि नए फार्मूले के तहत विवाद का केंद्र बनी 2.77 एकड़ जमीन पर भव्य राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव है और इस जमीन पर दूसरे पक्ष अपना दावा छोड़ देंगे। बदले में सरकार द्वारा अधिगृहित 67 एकड़ जमीन पर विश्वधर्मी श्रीराम मानवता भवन बनाया जाएगा। जिसमें सभी धर्मो के लिए भव्य उपासना गृह बनाए जाएंगे।</span></h5>
<h5 class="clearfix"><span style="font-size: 16px;">देश के कुछ बुद्धिजीवियों ने प्रस्ताव किया है कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर हिन्दुओं की आकांक्षाओं के अनुरूप भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ सरकार के अधीन 67 एकड़ की भूमि पर एक भव्य श्रीराम विश्वधर्मी मानवता भवन का निर्माण हो जो आतंकवाद, युद्ध और अशांति से ग्रस्त दुनिया को शांति का संदेश दे।</span></h5>
<h3>महाराष्ट्र के पुणे में स्थित एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो. डॉ. विश्वनाथ डी. कराड के नेतृत्व में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी, यहूदी आदि समुदायों के धर्मगुरू एवं विचारकों ने ये प्रस्ताव किया है।</h3>
<div class="adspace"> <span style="font-size: 16px;">सोमवार को इस फार्मूले पर अयोध्या आंदोलन के केंद्र में रहे रामजन्मभूमि न्यास के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व भाजपा के पूर्व सांसद राम विलास वेंदाती और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान के साथ-साथ स्वामी अग्निवेश, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एस एन पठान, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं परम सुपरकंप्यूटर के जनक पद्मभूषण डॉ. विजय पी भटकर, जम्मू कश्मीर विधान परिषद के उपसभापति जहांगीर हसन मीर आदि शामिल हैं।</span></div>
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