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	<title>राममंदिर &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Sun, 09 Dec 2018 14:20:40 +0000</lastBuildDate>
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		<title>संघ ने राममंदिर मामले पर सरकार को आगाह करते हुए कहा जनभावनाओं की उपेक्षा और अपमान कर यह देश कभी स्वाभिमान से खड़ा नहीं हो सकता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Dec 2018 14:18:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[राममंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता सुरेश &#8216;भैयाजी जोशी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के अपने वादे को पूरा नहीं करने को लेकर रविवार को भाजपा पर परोक्ष हमला करते हुए केंद्र सरकार से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की। रामलीला मैदान में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<figure class="storyimg" style="padding: 0px; margin: 0px; border-right-width: 1px; border-bottom-width: 1px; border-style: none solid solid none; border-right-color: #d8d8d8; border-bottom-color: #d8d8d8; position: relative; color: #000000; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; font-size: medium; line-height: normal; widows: auto;"></figure>
<p>&nbsp;</p>
<div class="story-content" style="color: #000000; font-family: NotoSansDevanagari, sans-serif; font-size: medium; line-height: normal; widows: auto;">
<p style="color: #505050; line-height: 26px; font-size: 17px; margin: 10px 0px;"><strong><a style="text-decoration: none; color: #3f84fd;" href="https://www.livehindustan.com/search/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AF%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98/1" target="_blank" rel="noopener">राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ</a></strong> (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता सुरेश &#8216;भैयाजी जोशी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के अपने वादे को पूरा नहीं करने को लेकर रविवार को भाजपा पर परोक्ष हमला करते हुए केंद्र सरकार से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की।</p>
<p style="color: #505050; line-height: 26px; font-size: 17px; margin: 10px 0px;">रामलीला मैदान में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की एक रैली में बोलते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा, &#8221;&#8221;   यहां<span style="color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 20px; text-align: justify; widows: auto;"> पर उपस्थित संतों की विशाल धर्मसभा के दर्शन करके हम सब धन्य हैं. हम सब के अन्तःकरण की भावनाओं को पूज्य संतों ने शब्द रूप दिया है. यह लड़ाई, यह संघर्ष तीन शतकों से इस देश ने देखा है. समय-समय पर राम भक्तों ने अपनी जागृति का परिचय सारे विश्व को दिया है. आज की यह धर्मसभा जो बीच के कुछ कालखंड में रुकी होगी तो 30 वर्ष पूर्व फिर जो पुनर्जागरण का सत्र प्रारम्भ हुआ, आज की युवा पीढ़ी के अन्तःकरण में इसके प्रति कितनी आस्थाएं हैं, कितनी पीड़ा है, कितनी अपेक्षाएं हैं, यह धर्मसभा उस दर्शन को कराती है, उस जागृति का परिचायक है.</span></p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">कई पूछते हैं, यह कब तक चलता रहेगा तो मैं तो इतना ही कहूंगा कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण नहीं होगा, भव्य मंदिर निर्माण नहीं होगा तब तक यह अनवरत चलता रहेगा. हमारी इच्छा है, भारत का अपना स्वभाव है कि हम इस प्रकार के सारे विषयों को सद्भावना और शांति के साथ ही चलाना चाहते हैं. हमारा किसी के साथ संघर्ष नहीं है. और अगर संघर्ष किसी प्रकार का है तो भारत में बाहर से जो विदेशी शक्तियां आईं, आक्रांता आए, इस समाज को भय ग्रस्त करते रहे, मिटाने की कोशिश करते रहे, ऐसे विदेशी आक्रांताओं के साथ हमारा संघर्ष है. इस देश में रहने वाले सभी सम्प्रदाय, सभी प्रकार की पूजा पद्धति अपनाने वाले किसी के साथ भी हमारा कोई संघर्ष नहीं है. इसलिए हम चाहते हैं, सब शांति से, सद्भावना से हो. जो भी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं हम उन सब प्रयासों का स्वागत करते हैं. इसलिए सम्बंधित सभी लोग सकारात्मक पहल करें, इसकी आवश्यकता है. अगर संघर्ष ही करना होता तो इतने दिन तक राह नहीं देखते.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">वर्ष 2010 में उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने स्वीकार कर लिया, लेकिन अगर कुछ कमी छोड़ दी होगी तो इसलिए हम सर्वोच्च न्यायालय में गए. हम सर्वोच्च न्यायालय से अपेक्षा करते हैं कि वो छोटी सी कमी को दूर करे.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">दुनियाभर का इतिहास यह बताता है कि कोई भी एक राष्ट्र भक्त समाज, देशभक्त समाज गुलामी के, परतन्त्रता के चिन्हों को, आक्रांताओं की निशानियों को कोई भी स्वाभिमानी समाज स्वीकार नहीं करता है. और हम तो यहां पर इस देश के रहने वाले हैं, उनका भी एक स्वाभिमान है. यहां के125 करोड़ लोगों के मन की भावना होनी चाहिए कि आक्रांताओं की निशानियों को हम दूर करके रहेंगे. यही हम सबका स्वप्न है, यही हम सब लोगों की आकांक्षा है.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">अनेक महापुरुषों ने हम सबके सामने एक स्वप्न रखा है कि देश रामराज्य चाहता है. राम राज्य में न्याय है, राम राज्य में सुरक्षा है, राम राज्य में विकास है, रामराज्य में आस्थाओं की सुरक्षा है. राम राज्य शांति का संदेश देने वाला है, इस राम राज्य की हम आकांक्षा करते हैं.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार के सम्प्रदायों के मार्ग पर चलने वाले क्या शांति नहीं चाहते? फिर वे किसी भी समाज, सम्प्रदाय के अनुयायी हों, सभी लोग यह चाहते हैं कि यहां राम राज्य हो, राम राज्य कोई धर्म राज्य नहीं होता, किसी सम्प्रदाय का राज्य नहीं होता, रामराज्य तो सुखशांति को बहाल करने वाला राज्य होता है. ऐसा अनेक महापुरुषों ने कहा है. महात्मा गांधी ने भी कहा कि हम राम राज्य का स्वप्न देख रहे हैं.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">सवा सौ करोड़ का देशभक्त समाज आंदोलन करते हुए भी यही भाव रखता है कि यहां पर न्याय व्यवस्था है. उसकी प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए. यहां का न्यायालय है, उसकी प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए. जिस देश में न्याय व्यवस्था और न्याय के प्रति अविश्वास का भाव जगता है उस देश का उत्थान होना असम्भव है.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">इसलिए हम चाहते हैं कि न्याय व्यवस्था भी इसका चिंतन करे, विचार करे.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">आज सत्ता के केन्द्र में जो लोग हैं, हम उनसे भी अपेक्षा करते हैं कि इतनी बड़ी जो हिन्दू समाज की शक्ति है उनकी भावनाओं को सम्मानित करे. अपने इस सम्मान को प्रतिष्ठापित करने के लिए जो-जो भी कदम उठाने चाहिएं वो कदम उठाने की दिशा में बढ़ना चाहिए. लोकतंत्र में सत्ता की भी अपनी शक्ति होती है. आज की वर्तमान सत्ता से हम अपील करते हैं कि अपने पूरे सामर्थ्य का इस्तेमाल करते हुए इस दिशा में आगे बढ़े. लोकतंत्र में जनता की आकांक्षा को, जनसामान्य की आकांक्षाओं की पूर्ति करना सत्ता की प्राथमिकता होनी चाहिए. जनभावनाओं की उपेक्षा करते हुए, जनभावनाओं का अपमान करते हुए यह देश कभी स्वाभिमान से खड़ा नहीं हो सकता. इस देश की सब प्रकार की व्यवस्थाओं को इसके बारे में सोचने की आवश्यकता है और लोकतंत्र में तो हम कहेंगे कि सत्ता सर्वोपरि नहीं, परन्तु महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली होती है. सत्ता के केन्द्र में बैठे लोगों को समझने की यह आवश्यकता है.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">हमारा विश्वास है कि आज केंद्र में सत्ता संचालित करने वाले बंधु इस समाज की भावनाओं से भलीभांति परिचित हैं. केवल परिचित नहीं तो सहमत भी हैं. अंतर के मन से अगर प्रश्न पूछेंगे तो हम जो कह रहे हैं उसके अलावा और कोई विचार वहां पर नहीं होगा, ऐसा हमारा विश्वास है. इस विश्वास को बनाए रखना होगा. कभी तो लगता है कि उन्होंने भी अपना एक संकल्प घोषित किया है, अयोध्या में ही राम मंदिर बनेगा, रामजन्मभूमि पर ही बनेगा. मंदिर वहीं बनाएंगे की घोषणा इन सब लोगों ने की है जो आज सत्ता में बैठे हुए हैं, उनका भी यह संकल्प है. मैं समझता हूं कि यह संकल्प पूर्ति का अवसर अब आ गया है. बिना किसी झिझक के, बिना किसी संकोच के अपने संकल्प को पूर्ति करने की दिशा में उन्हें बढ़ना चाहिए. यही हम सब उनसे निवेदन करते हैं.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">संविधान का मार्ग है, और लोकतंत्र में संसद का भी अपना अधिकार है. संसद का दायित्व भी है, इसलिए यहां के पूज्य संतों के द्वारा जो व्यक्त किया गया, करोड़ों राम भक्त जो चाहते हैं तो कानून बनाने की दिशा में वर्तमान सरकार को पहल करनी चाहिए. इसका कोई अन्य विकल्प अभी ध्यान में नहीं आता है. अगर यह पुनीत कार्य होना है तो इसकी जितनी भी बाधाएं हैं, उन बाधाओं को दूर करने के लिए निर्भयता से आगे आने की आवश्यकता है. यही हम सब रामभक्तों का निवेदन है. हम भीख नहीं मांग रहे हैं. हम अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं और उन भावनाओं का सम्मान करना, भावनाओं की, अपेक्षाओं की पूर्ति करना लोकतंत्र में सत्ता की इसमें बड़ी भूमिका होती है. हमें विश्वास है, आज सत्ता में बैठे बन्धु इन सब बातों को समझकर एक सकारात्मक पहल की दिशा में कदम उठाएंगे, यह हम सब विश्वास व्यक्त करते हैं.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">वर्ष 1992 में देश के कोने-कोने से आए कारसेवक रामभक्त उन्होंने अपनी शक्ति, सामर्थ्य का परिचय दिया और आक्रांताओं की उस निशानी को मिटा दिया. लेकिन काम अधूरा हुआ. ढांचा तो ध्वस्त हुआ, समाप्त हुआ, उसकी निशानी कुछ नहीं बची. लेकिन भगवान राम तो वहां पर एक अस्थाई निवास में रह रहे हैं. जब जब कोई भी वहां पर दर्शन करने के लिए जाता है. पीड़ा का अनुभव करता है, एक वेदना का अनुभव करता है कि क्या हमारे आराध्य सालों साल इसी तरह के अस्थाई भवन में रहेंगे. अस्थाई आवास में रहेंगे और क्या रामभक्त देखते रहेंगे. अभी जब मैं अयोध्या गया, दर्शन किये, मैं फिर उसी भावना को व्यक्त करना चाहता हूं कि आज देशभर के रामभक्त, रामभक्तों द्वारा निर्मित एक विशाल भव्य मंदिर में भगवान राम का दर्शन करना चाहते हैं. अस्थाई निवास का कालखंड समाप्ति की ओर चल पड़ा है. थोड़ा और धक्का देने की आवश्यकता है. और निर्माण की प्रक्रिया शुरु होने की आवश्यकता है. हम सभी चाहते हैं कि अपने आराध्य का दर्शन उस भव्य राममंदिर में हो, जिसका संकल्प, जिसका मानचित्र, जिसकी कल्पनाएं, लोगों ने की हैं. देशभर के लोगों ने अपने गांव-गांव से रामशिलाओं का पूजन करते हुए अयोध्या में भेजा है, ऐसी सारी कल्पनाओं को लेकर फिर एक बार भव्य राममंदिर निर्माण हो यही हम सब लोग चाहते हैं, यही हमारी इच्छा है.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">मैं तो कहूंगा कि इस मंदिर का निर्माण भविष्य में आने वाले रामराज्य की नींव बनेगा, उसका आधार बनेगा. भविष्य का निर्धारण होगा. भविष्य में यह अपना भारत देश, हिन्दुस्तान, समाज कौन सी दिशा में आगे बढ़ने वाला है, उसकी दिशा निर्धारण करने का एक जो बड़ा चरण है वह इस भगवान राम के मंदिर का भव्य निर्माण यह उसका प्रारम्भ है. सारे विश्व को हम एक मानवता का संदेश देना चाहते हैं, सारे विश्व को समन्वय का संदेश देना चाहते हैं. भगवान राम का संदेश, भगवान राम का जीवन यह केवल भारत के लिए नहीं, यह तो सारी मानव जाति के लिए एक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. इसलिए हम सारे विश्व के समुदाय का आह्वान करते हैं कि इसको संकुचितता से, साम्प्रदायिक दृष्टि से न देखें. यह किसी भी एक स्वाभिमानी देश के सम्मान का प्रतीक है. यह सबका अधिकार है. स्वतंत्र देश को अपने सारे स्वाभिमान स्थापित करने का अधिकार है और इसलिए उस पुनर्प्रतिष्ठा का यह कार्य प्रारम्भ होने वाला है, भगवान राम के मंदिर के साथ.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">इसलिए भविष्य का भारत कैसा होगा यह निश्चित होने वाला है. इस प्रकार की बाधाएं दूर होने के बाद जब मंदिर का कार्य प्रारम्भ होगा, कई बाधाएं दूर होंगी. देश के धर्माचार्य मठाधिपति, महामंडलेश्वर, आचार्य, जनसामान्य के साथ-साथ गांव-गांव में रहने वाला पढ़ा-लिखा, अनपढ़, धनवान, सम्पन्न गांव का रहने वाला, वनांचल का रहने वाला, नगरों में रहने वाला यह करोड़ों रामभक्तों का जो भाव है वो धर्माचार्यों के साथ उनकी भी अपनी भावनाएं हैं. इसलिए उन आकांक्षाओं की, इच्छाओं को शीघ्रता से, पूरा होना है. बहुत वर्षों तक राह देख ली है, हमने न्यायालय का सम्मान करते हुए अभी तक राह देखी है, लेकिन अब लगता है कि न्यायालय की राह देखते-देखते, हमारी भी राह देखने की एक सीमा आ गई है. और अब एक ही विकल्प बचता है जो सब संतों ने कहा, सब धर्माचार्यों ने कहा, सभी की भावना है कि कानून बनाते हुए      इसकी सब प्रकार की बाधाएं शीघ्रता से दूर हों. यही हम सब लोगों की आकांक्षा है.</p>
<p style="margin: 0px 0px 20px; padding: 0px; border: 0px; outline: 0px; vertical-align: baseline; text-align: justify; color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; line-height: 20px; widows: auto; font-size: 16px !important; background-image: initial; background-attachment: initial; background-size: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; background-position: initial; background-repeat: initial;">और मैं अंत में यही कहूंगा कि हमें विश्वास है कि जो देशभर में सैकड़ों सभाएं हो रही हैं, इसमें लग रहे जय श्रीराम के नारे न्यायालय तक पहुंचेंगे. न्यायालय भी जनभावनाओं को समझकर उचित दिशा में कदम उठाएगा. इस प्रकार का विश्वास हम न्यायालय के प्रति व्यक्त करते हैं. न्याय व्यवस्था को प्रार्थना करते हैं, निवेदन करते हैं कि अब विचार करे, जनभावनाओं का सम्मान करे. और जो हिन्दू के लिए न्यायोचित अधिकार है, उस अधिकार को सुरक्षित करें. यही हम न्यायालय से अपेक्षा करते हैं.</p>
<p style="color: #505050; line-height: 26px; font-size: 17px; margin: 10px 0px;"><span style="color: #5e6066; font-family: Helvetica, Arial, sans-serif; font-size: 16px; line-height: 20px; text-align: justify; widows: auto;">30 वर्ष पूर्व इस देश में एक लहर चली, एक गीत चला. आज उस गीत की पंक्तियों को स्मरण करने की आवश्यकता है. उस समय हमने कहा था – ‘कोटि-कोटि हिन्दू जन का, कोटि-कोटि हिन्दू जन का हम ज्वार उठाकर मानेंगे’ ज्वार उठना शुरु हुआ है. हम करना क्या चाहते हैं तो हम कहते हैं कि ‘ज्वार उठाकर हम इस भारत को भी भव्य बनाएंगे. और भगवान राम का भी मंदिर भव्य बनाकर रहेंगे. फिर एक बार मैं कहूंगा कि संकल्प पूर्ति तक अनवरत चलने वाला यह प्रयास, यह आंदोलन, चलता रहेगा, चलता रहेगा. हम सब रामभक्त, रामभक्ति को शक्ति के साथ प्रकट करते रहें. इसी प्रार्थना के साथ और फिर एक बार सब पूज्य संतों के चरणों में प्रणाम करते हुए मैं आप सब को धन्यवाद देते हुए मेरी बात पूरी करता हूं.</span> के शीतकालीन सत्र से कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद की रैली में रविवार को हजारों लोग अयोध्या में <strong><a style="text-decoration: none; color: #3f84fd;" href="https://www.livehindustan.com/search/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/1" target="_blank" rel="noopener">राम मंदिर</a></strong> बनाने की मांग के साथ रामलील मैदान पहुंचे</p>
<p style="color: #505050; line-height: 26px; font-size: 17px; margin: 10px 0px; widows: auto;">अयोध्या में संबंधित भूमि के मालिकाना हक का वाद उच्चतम न्यायालय में लंबित है। अगले साल जनवरी में अदालत सुनवाई के तारीख की घोषणा करेगी। लेकिन यह विवाद पिछले 25 साल से अनसुलझा है।</p>
</div>
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		<title>श्री श्री रविशंकर का धर्मसंसद में आने से इंकार, राममन्दिर पर संघ प्रमुख़ की दो टूक हो सकती है वजह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Nov 2017 08:47:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राममंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[आध्यत्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कर्नाटक के उडुपी में जारी तीन दिवसीय धर्म संसद में शामिल होने से इनकार कर दिया है. शुक्रवार को ही कार्यक्रम की शुरुआत में अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर की मध्यस्थता को लेकर श्रीश्री पर निशाना साधा था. इससे पहले कई हिन्दू धर्म गुरु [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आध्यत्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कर्नाटक के उडुपी में जारी तीन दिवसीय धर्म संसद में शामिल होने से इनकार कर दिया है. शुक्रवार को ही कार्यक्रम की शुरुआत में अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर की मध्यस्थता को लेकर श्रीश्री पर निशाना साधा था. इससे पहले कई हिन्दू धर्म गुरु भी श्री श्री रविशंकर पर राम मंदिर मामले को लेकर निशाना साध चुके हैं.</p>
<p>श्रीश्री को कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भागवत के बयान के बाद ही उन्होंने धर्म संसद से किनारा किया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि वो पहले ही श्री श्री रविशंकर को बता चुके हैं कि राम  जन्मभूमि मामले  में उनको दखल नहीं देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मामले में फैसले लेने के लिए धर्म संसद को अगुवाई करनी चाहिए, जबकि इस मसले पर श्री श्री रविशंकर खुद ही फैसले ले रहे हैं.</p>
<p>बता दें कि ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक रवि शंकर ने लंबे समय से चल रहे अयोध्या विवाद में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी और वह इसे लेकर पहले ही कई पक्षकारों से बात कर चुके हैं. हालांकि श्रीश्री ने पिछले दिनों अपने अयोध्या दौरे पर यह जरूर कहा था कि मामला काफी गंभीर है और सभी पक्षों को सहमति के साथ एक मंच पर लाने में लम्बा वक़्त लग सकता     है.</p>
<p>इस धर्म संसद में देशभर से दो हजार से ज्यादा संत, मठाधीश और वीएचपी नेता इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं. उडुपी के पेजावर मठ के ऋषि श्री विश्वेष तीर्थ स्वामी ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, गौ रक्षा, छुआछूत का सफाया, समाज सुधार और धर्मांतरण को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि धर्म संसद को राजनीति और राजनीतिक एजेंडे से पूरी तरह अलग रखा जाएगा और यह विशुद्ध रूप से हिंदु संतों का एक सम्मेलन होगा. एक विशाल हिंदू समाजोत्सव के साथ संसद का समापन होगा जहां योगी आदित्यनाथ मुख्य भाषण देंगे.</p>
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		<title>संघ प्रमुख मोहन भागवत की दो टूक,अयोध्या  रामजन्मभूमि पर ही होगा राममंदिर निर्माण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Nov 2017 13:13:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राममंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर बयान दिया है। कर्नाटक के उडुपी में वीएचपी की धर्म संसद में शुक्रवार को मोहन भागवत ने कहा, ”राम जन्म भूमि पर राम मंदिर ही बनेगा और कुछ नहीं बनेगा, उन्हीं पत्थरों से बनेगा, उन्हीं की अगुवाई में बनेगा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर बयान दिया है। कर्नाटक के उडुपी में वीएचपी की धर्म संसद में शुक्रवार को मोहन भागवत ने कहा, ”राम जन्म भूमि पर राम मंदिर ही बनेगा और कुछ नहीं बनेगा, उन्हीं पत्थरों से बनेगा, उन्हीं की अगुवाई में बनेगा जो इसका झंडा लेकर पिछले 20-25 वर्षों से चल रहे हैं। भागवत ने कहा, ‘हम मंदिर का निर्माण करेंगे, यह लोकलुभावन घोषणा नहीं है, बल्कि हमारे विश्वास का विषय है। यह नहीं बदलेगा’। भागवत ने कहा कि वर्षों के प्रयास और त्याग की बदौलत अब राम मंदिर बनने की संभावना दिखी है। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर बनने से पहले लोगों में जागरूकता होनी जरूरी थी। हम मंजिल के बेहद करीब हैं और इस वक्त हमें और ज्यादा सचेत रहना है।</p>
<p>कार्यक्रम में भागवत ने गोहत्या पर पूरी तरह से बैन करने की वकालत भी की। उन्होंने कहा, “अगर गोहत्या पर बैन नहीं होगा, तो शांति भी नहीं होगी”। इस कार्यक्रम में देशभर से 2000 संत, मठाधीश, वीएचपी नेता जाति और लैंगिक असमानता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करने के लिए जमा हुए हैं।</p>
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		<title>दिवाली से पूर्व अयोध्या में शुरू हो जाएगा मन्दिर निर्माण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Nov 2017 18:03:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राममंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस नेता पी.चिदम्बरम पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जल्द ही तिहाड़ जेल के अंदर होंगे। स्वामी ने कहा कि चिदम्बरम के तिहाड़ जेल में जाने में अब अधिक समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले राम मंदिर का निर्माण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस नेता पी.चिदम्बरम पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जल्द ही तिहाड़ जेल के अंदर होंगे। स्वामी ने कहा कि चिदम्बरम के तिहाड़ जेल में जाने में अब अधिक समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में शुरू हो जाएगा। राम मंदिर बनाने की भूमिका तय हो गई।</p>
<p>स्वामी ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है, जो पूजा के मूल अधिकारों से जुड़ी है। 5 दिसम्बर को इस याचिका पर सुनवाई होगी। अगले वर्ष मार्च तक सुनवाई पूरी हो जाएगी और तीन से चार- माह में फैसला आ जाएगा। स्वामी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में ही होगा, ऐसे में कहा जा सकता है कि दिवाली से पहले राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या मे बाबरी मस्जिद का होना भी हास्यास्पद है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि मस्जिद इस्लाम में अनिवार्य चीज नहीं है। मस्जिद केवल नमाज पढ़ने की जगह है, सउदी अरब, तुर्की में सड़कें बनाने के लिए मस्जिदें तोडी गई हैं। राम जन्मभूमि में पूजा करना मूलभूत अधिकार है। अयोध्या में वर्तमान में 27 मस्जिद है, वे सुनी पड़ी है, फिर यहां एक और मस्जिद बनवाने का क्या मतलब है। स्वामी सोमवार को जयपुर में जयपुर डायलॉग के &#8220;एलिमेंट आॅफ यूनिटी एंड डिवीजन इन इंडिया &#8221; सत्र में बोल रहे थे।</p>
<p>स्वामी ने कहा कि आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान की प्रस्तावना में ही संशोधन कर दिया था। श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए स्वामी ने कहा कि कांग्रेस लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में आर्थिक विकास क अच्छे प्रयास शुरू हुए थे। उन्होंने कहा कि पूरे भारत का डीएनए एक है। भारत के हर जाति और धर्म के लोगों का डीएनए एक है। मुसलमानों का डीएनए भी हिन्दुओं से मिलता है। मुसलमानों को मान लेना चाहिए कि उनके पूर्वज हिन्दू थे।</p>
<p>&#8220;पद्मावती &#8221; हिन्दुओं को नीचा दिखाने का षड़यंत्र</p>
<p>भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने फिल्म पद्मावती को हिन्दुओं को नीचा दिखाने की साजिश करार देते हुए कहा कि इस विवादास्पद फिल्म के पीछे इतिहास बिगाड़ने की मानसिकता है। उन्होंने कहा कि पद्मावती केवल नाच गाने तक सीमित नहीं है, यह इतिहास बिगाड़ने और हिन्द़ुओं को नीचा देखाने का षड़यंत्र है। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए कई किताबों में गलत तथ्य दिए गए। अंग्रेज हो या फिर मुस्लिम आक्रमणकारी सबके निशाने पर हिन्दू रहा। हीनभावना लाने के लिए हिन्दुओं के इतिहास को बिगाड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि दाऊद इब्राहीम का पैसा मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में लगा हुआ है।</p>
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