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	<title>रेलवे &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>रेलवे  क्लॉक रूम और लॉकरों के लिए अब  करना होगा ज्यादा भुगतान</title>
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		<pubDate>Sun, 14 Jan 2018 16:29:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[रेलवे]]></category>
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					<description><![CDATA[रेलवे के क्लॉक रूम और लॉकरों का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अब ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा. रेलवे बोर्ड ने अब मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) को स्टेशनों पर इस सुविधा का शुल्क बढ़ाने का अधिकार दे दिया है. सेवा को आधुनिक बनाने के लिए शीघ्र ही बोली लगाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रेलवे के क्लॉक रूम और लॉकरों का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अब ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा. रेलवे बोर्ड ने अब मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) को स्टेशनों पर इस सुविधा का शुल्क बढ़ाने का अधिकार दे दिया है.</p>
<p>सेवा को आधुनिक बनाने के लिए शीघ्र ही बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जिसमें कम्प्यूटरीकृत माल सूची शामिल होगी और सालाना मूल्य बढ़ाने की अनुमति होगी.</p>
<p>वर्तमान में रेलवे 24 घंटे के लिए लॉकर इस्तेमाल के लिए यात्रियों से 20 रुपए का शुल्क लेती है और प्रत्येक अतिरिक्त 24 घंटे के लिए 30 रुपए वसूले जाते हैं. पहले यह मूल्य 15 रुपए था.</p>
<p>वहीं क्लॉक रूम का शुल्क 24 घंटे के लिए 15 रुपए है. वर्ष 2000 में यह सात रुपए था. और प्रत्येक अतिरिक्त 24 घंटे के लिए यात्रियों से 20 रुपए लिए जाते हैं. इससे पहले यह शुल्क 10 रुपए था. नई नीति के अनुसार , ‘यह निर्णय लिया गया है कि स्थानीय स्थितियों के अनुसार डीआरएम को क्लॉक रूमों और लॉकरों के किराए बढ़ाने के पूरे अधिकार होंगे.’</p>
<p>यह सेवा व्यापक रूप से बैकपैकर्स और कई घरेलू पर्यटकों द्वारा उपयोग की जाती है. खास कर उन लोगों द्वारा जो किसी पर्यटक स्थल के लिए छोटी यात्राओं पर होते हैं.</p>
<p>एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि बहुत से लोग अपने सामान के साथ नहीं घूमते. उन्हें अपने सामान के लिए सुरक्षित जगह चाहिए होती है जो रेलवे मुहैया कराता है. रेलवे यह काम लंबे समय से करते आ रहा है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिन स्टेशनों पर ज्यादा पर्यटक आते हैं वहां पर इसकी मांग ज्यादा है. इसलिए हमने सोचा कि उन स्टेशनों के अधिकारी को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह कितना शुल्क तय करेगा.</p>
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		<title>रेलों की रफ्तार और संख्या बढ़ाने की अनूठी योजना को मंजूरी,अब 22 डब्बे से अधिक नहीं होंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jan 2018 07:16:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे]]></category>
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					<description><![CDATA[रेल मंत्रालय ने यात्री ट्रेनों में बोगियों की अधिकतम संख्या को मौजूदा 26 से 22 करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से न केवल ट्रेनों की संख्या और रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि दुर्घटना की संभावनाएं भी घटेंगी। यही नहीं, इससे लंबी ट्रेनों की वजह से छोटे प्लेटफार्मों पर यात्रियों को चढ़ने-उतरने में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रेल मंत्रालय ने यात्री ट्रेनों में बोगियों की अधिकतम संख्या को मौजूदा 26 से 22 करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से न केवल ट्रेनों की संख्या और रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि दुर्घटना की संभावनाएं भी घटेंगी। यही नहीं, इससे लंबी ट्रेनों की वजह से छोटे प्लेटफार्मों पर यात्रियों को चढ़ने-उतरने में आने वाले दिक्कत का भी समाधान हो जाएगा और किसी भी ट्रेन को किसी भी रूट पर चलाया जा सकेगा।</p>
<p>रेलमंत्री पीयूष गोयल ने संवाददाताओं को इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमने सभी ट्रेनों को 22 कोच का करने का निर्णय लिया है। यह अधिकतम संख्या है। कुछ ट्रेनों में इससे कम कोच भी हो सकते हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि अभी आम तौर पर यात्री ट्रेनों में अधिकतम 24 कोच लगाए जाते हैं। मांग बढ़ने पर अपवादस्वरूप कुछ लोकप्रिय ट्रेनों में इनकी संख्या 26 भी कर दी जाती है। इससे ज्यादा कोच संरक्षा के लिहाज से उचित नहीं माने जाते। ज्यादातर कम लोकप्रिय ट्रेनों में 22, 18, 16 अथवा कभी-कभी 12 कोच ही लगते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कोच की अधिकतम संख्या में कमी किए जाने का लाभ लोकप्रिय ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी के रूप में मिलेगा, क्योंकि उतनी ही बोगियों से ज्यादा लोकप्रिय ट्रेने चलाई जा सकती हैं। अभी कोच उत्पादन क्षमता सीमित होने से मनचाही संख्या में नई ट्रेने चलाना संभव नहीं हो पाता। रेलवे की तीनों कोच फैक्टि्रयां-कपूरथला, चेन्नई व बरेली मिलकर सालाना लगभग चार हजार कोच का ही निर्माण कर पाती हैं। ऐसे में आगामी सालों में जब डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर चालू होने से मौजूदा ट्रैक मालगाडि़यों से मुक्त हो जाएंगे तब यह तरकीब नई यात्री ट्रेने चलाने में मददगार साबित होगी। फिलहाल रेलवे अधिकारियों ने ऐसी 300 प्रकार की ट्रेनों और रूटों की पहचान की है जिन पर 22 कोच की ट्रेने चलाने का प्रस्ताव है।</p>
<p>रेलमंत्री ने रेलवे की मौजूदा सिग्नल प्रणाली को बदलने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा, &#8216;हम अभी भी साठ-सत्तर वर्ष पुरानी मैन्युअल सिग्नल प्रणाली से काम चला रहे हैं। अब इसे पूरी तरह बदलने और विश्व की अत्याधुनिक सिगनल प्रणाली स्थापित करने का वक्त आ गया है। इसे 2022 तक लागू करने का प्रस्ताव है। इसका खाका तैयार हो रहा है। शीघ्र ही इस बाबत विस्तृत जानकारी दी जाएगी।&#8217;</p>
<p>&nbsp;</p>
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