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	<title>वरिष्ठ प्रचारक &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>ग्वालियर में आखिर अनमने से क्यों दिखे संघ के ये अखिल भारतीय प्रचारक दे गए बड़ी सीख</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 06:48:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[वरिष्ठ प्रचारक]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे विगत दिवस ग्वालियर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि में आयोजित एक कार्यक्रम काफी चर्चा में रहा,यूं तो यह आयोजन सामान्य कार्यक्रमों जैसा ही था लेकिन जब इसे आरएसएस नजरिये से देखा तो कुछ अटपटा जरूर लगा। इससे पहले कि कुछ आगे लिखा जाए आरएसएस के ऋषि तुल्य प्रचारक रहे तराणेकर जी से जुड़ा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;"><strong>प्रवीण दुबे</strong></h4>
<h4><strong>विगत दिवस ग्वालियर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि में आयोजित एक कार्यक्रम काफी चर्चा में रहा,यूं तो यह आयोजन सामान्य कार्यक्रमों जैसा ही था लेकिन जब इसे आरएसएस नजरिये से देखा तो कुछ अटपटा जरूर लगा।</strong></h4>
<h4><strong> इससे पहले कि कुछ आगे लिखा जाए आरएसएस के ऋषि तुल्य प्रचारक रहे तराणेकर जी से जुड़ा एक प्रसंग मुझे सहसा याद हो आया यह प्रसंग था कि जब आदरणीय तराणेकर जी का निधन हुआ और बतौर सूचना स्वदेश में समाचार प्रकाशित करते समय उनका कोई भी चित्र सन्दर्भ में उपलब्ध नहीं था बड़े मुश्किल से एक चित्र ही खोजा जा सका और आज तक उनकी स्मृति को जीवंतता प्रदान करने वाला वही एकमात्र चित्र ही कार्यक्रमों आदि में उपयोग होता है।</strong></h4>
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<h4 style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59404" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005.jpg" alt="" width="1500" height="1000" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005.jpg 1500w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-1024x683.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0005-1068x712.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1500px) 100vw, 1500px" /></h4>
<h4><strong>इस प्रसंग के पीछे यह संदेश है कि आदरणीय तराणेकर जी प्रचारक होने के नाते फोटो खिंचवाने से परहेज करते थे उनका कहना रहता था संघ प्रचारक को किसी प्रचार प्रसार से जुड़ी व्यक्तिगत क्रियाओं से दूर रहकर चुपचाप मौन तपस्वी की भांति भारत माता की सेवा में जुटे रहना चाहिए। </strong></h4>
<h4><strong>चूंकि आदरणीय तराणेकर जी का कर्म क्षेत्र ग्वालियर ही रहा और तमाम पुराने और वरिष्ठ संघ स्वंयसेवकों पर इसका गहरा प्रभाव रहा है इस कारण आज भी यहां आदर्श और कृतिरूप में वैसा ही जीवन जीने की बात कही जाती है विशेषकर पूर्णकालिक रूप से संघ कार्य करने वाले  व्यक्तित्वओं  अर्थात प्रचारकों से।</strong></h4>
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<h4 dir="auto"><strong>शुरुआत में हमने जिस कार्यक्रम का जिक्र किया और उसे अटपटा निरुपित किया उसके पीछे मूल कारण ग्वालियर की उस गौरवशाली संघ परम्परा जिसका की हमने आदरणीय तराणेकर जी का उल्लेख करते हुए उदाहरण दिया है से अलग हटकर एक वरिष्ठ प्रचारक का मंच पर सम्मान होते दिखाई दिया और इससे भी ज्यादा आश्चर्यचकित बात यह रही कि इस सम्मान को देने के लिए आदरणीय तराणेकर जी के सानिध्य में पल्लवित हुए वर्तमान में संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख उपस्थित थे। </strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>हालांकी पूरे कार्यक्रम के दौरान उनकी बॉडी लेंग्वेज अर्थात हावभाव ऐसा दिखा जैसे संघ साधना पर व्यक्तिगत सम्बन्ध हावी है और इन्ही सम्बन्धो को निभाने वे लीक से हटकर आयोजित इस कार्यक्रम में अनमने ढंग से शिरकत करने आए हैं।इसका प्रमाण उन माननीय द्वारा दिए सम्बोधन में भी साफ दिखाई दिया जब उन्होंने मंच से ही कहा कि </strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>संघ को &#8216;संघ&#8217; बनाए रखने की आवश्यकता है उन्होंने कहा आज संघ सौ वर्ष का हो गया है। इन सौ वर्षों में ऐसे कई स्वयंसेवकों का योगदान है, जिनके अंदर संघ दिखता है। वे संघ के नीव के पत्थर हैं। ये सभी गुणवत्ता पूर्ण स्वयंसेवक हैं। </strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>इनको देखकर कई स्वयंसेवकों ने प्रेरणा प्राप्त की है। उनका योगदान समाज के बीच आना चाहिए। आज संघ बहुत बड़ा दिखाई देने लगा है, लेकिन संघ का होना और स्वयंसेवक होना इन दोनों में बड़ा अंतर है। इसलिए आज संघ को संघ बनाए रखने की आवश्यकता है। यह कार्य हम सभी को करना है। </strong></h4>
<div dir="auto">
<h4 dir="auto"><strong>उन्होंने आदर्श स्वयंसेवक के कई उदाहरण देते हुए कहा कि आज जो संघ दिख रहा है, वह संघ नहीं है। संघ को समझना है तो संघ की नीव को समझना होगा। उनके अंदर स्वयंसेवक गुण को समझना होगा। संघ से जुड़ा नहीं जाता, संघ को जिया जाता है। जिसने संघ को जीवन का हिस्सा बना लिया, वही स्वयंसेवक है। पुराने स्वयंसेवकों ने यही कार्य किया है। मेरा अपना व्यवहार कैसा होना चाहिए, यह बताने की आवश्यकता नहीं, यह अपने स्वभाव में दिखना चाहिए।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>जिन प्रचारक महोदय का सम्मान हुआ उनका सम्बोधन भी बेहद विचारणीय रहा खुद उन्होंने यह कहकर की यह सम्मान एक प्रचारक का है बहुत कुछ सोचने मजबूर कर दिया सबसे बड़ा सवाल क्या संघ में किसी प्रचारक को मंच पर खुद के सम्मान की स्वीकार्यता होना चाहिए ? उन्होंने जो कहा वो इस प्रकार है मेरे पास जो कुछ भी है, वह संघ का है  मेरे जीवन में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह सब संघ की देन है। इसलिए यह सम्मान मेरा नहीं, एक स्वयंसेवक, एक प्रचारक का है। </strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>कार्यक्रम में संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर, सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक, विद्या भारती के उपाध्यक्ष श्रीराम अरावकर, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर, प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता, सह प्रांत कार्यवाह विजय दीक्षित जैसे दिग्गज उपस्थित थे। </strong></h4>
<h4 dir="auto"></h4>
<h4 dir="auto"><strong>वर्तमान प्रचारक महोदय के आलावा समारोह में इनका भी हुआ अभिनंदन</strong></h4>
<h4 dir="auto"></h4>
<h4 dir="auto"><strong>इनमें स्व. श्रीधर गोपाल कुंटे, स्व. नारायण कृष्ण शेजवलकर, स्व. गंगाराम बांदिल, स्व. भाऊसाहब पोतनीस, स्व. बापू नाना परांजपे, स्व. राजाराम मोघे, स्व. बैजनाथ शर्मा, स्व. माधवशंकर इंदापुरकर, स्व. गोपालराव टेम्बे, स्व. बसंतराव विटवेकर, स्व. दादा बेलापुरकर, स्व. डॉ. केशव निवासकर, स्व. डॉ. मनमोहन बत्रा, स्व. लेखराज बत्रा, स्व. प्रभाकर नारायण केलकर, स्व. सुधाकर गोखले, स्व. प्रभाकर राव आम्बर्डेकर, स्व. नत्थूलाल चौरसिया,  स्व. बाबा मोघे, स्व. काशीनाथ मोघे, स्व. मदन गोपाल शर्मा, स्व. शिखरचंद जैन, स्व. सुधीर शिरढोणकर, नंदलाल बत्रा, डॉ. गोविन्द शर्मा, जगदीश तोमर, कप्तान सिंह सोलंकी, अन्ना जी काकिर्डे, शैवाल सत्यार्थी आदि शामिल हैं। दिवंगत लोगों के सम्मान उनके परिजनों ने ग्रहण किया।</strong></h4>
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