<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>वीरांगना की मौत पर ग्वालियर में भोज &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/tag/%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:24 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>बीबीसी का सनसनीखेज खुलासा वीरांगना लक्ष्मीबाई की मौत की खुशी में जयाजीराव सिंधिया ने जनरल रोज़ और हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में दिया था भोज</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[वीरांगना की मौत पर ग्वालियर में भोज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64614</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे ग्वालियर 19 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाईबलिदान दिवस 18जून को BBC न्यूज़ हिंदी वेब  पोर्टल ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा ग्वालियर में अंग्रेजों से किए युद्ध पर आधारित एक लेख शीर्षक&#8220;सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई&#8221;  का प्रकाशन किया गया इस लेख में  बीबीसी ने दावा किया है  कि दो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5 style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</h5>
<h5 style="text-align: left;">ग्वालियर 19 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाईबलिदान दिवस 18जून को BBC न्यूज़ हिंदी वेब  पोर्टल ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा ग्वालियर में अंग्रेजों से किए युद्ध पर आधारित एक लेख</h5>
<h5 style="text-align: left;"><strong>शीर्षक</strong>&#8220;<strong>सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई&#8221;  </strong>का प्रकाशन किया गया इस लेख में  बीबीसी ने दावा किया है  कि दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने रानी की मौत और  इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया था ,रानी की मौत के साथ ही  विद्रोहियों का साहस टूट गया था  और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया था।</h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h5 dir="auto">लेख में यह भी दावा है कि  अंग्रेज़ों की तरफ़ से कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स पहला ऐसा  शख़्स था जिसने रानी लक्ष्मीबाई को अपनी आँखों से लड़ाई के मैदान में लड़ते हुए देखा था। लेख में उस लड़ाई में भाग ले रहे जॉन हेनरी सिलवेस्टर की  किताब &#8216;रिकलेक्शंस ऑफ़ द कैंपेन इन मालवा एंड सेंट्रल इंडिया&#8217; का हवाला देते हुए रानी के ग्वालियर. में  अंतिम समय तक किए भीषण युद्ध का आँखों देखा वर्णन्न भी किया गया है जो अपने आप में रोमांचित करने वाला है। लेख में उस लड़ाई के समय की एक अन्य लेखक एंटोनिया फ़्रेज़र की  पुस्तक, &#8216;द वॉरियर क्वीन&#8217; का भी हवाला दिया गया है। इस  लड़ाई में लड़ रहे कैप्टन क्लेमेंट वॉकर हेनीज द्वारा  बाद में रानी के अंतिम क्षणों का वर्णन भी लेख में है।इरा मुखोटी की  किताब &#8216;हीरोइंस&#8217; का हवाला देते हुए रानी के पुत्र के बारे में बताया गया है कि   &#8220;दामोदर ने दो साल बाद 1860 में अंग्रेज़ों के सामने आत्म समर्पण किया. बाद में उसे अंग्रेज़ों ने पेंशन भी दी. 58 साल की उम्र में उनकी मौत हुई। इस लेख में ग्वालियर के सिंधिया राजवंश को लेकर भी एक सनसनी खेज खुलासा किया गया है जिसमें बताया  गया है कि दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने रानी की मौत और  इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया,रानी की मौत के साथ ही विद्रोहियों का साहस टूट गया और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया.</h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h5 dir="auto"><strong>शब्दशक्ति न्यूज़ #shabdshaktinews.in अपने पाठकों के लिए वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस शौर्य और बलिदान से जुड़े बीबीसी न्यूज़ हिंदी वेब पोर्टल पर प्रकाशित इस लेख को शब्दशः प्रकाशित कर रहे हैं।</strong></h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h1 id="content" class="article-heading css-rqvidu e1j37txl0" tabindex="-1">सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई</h1>
<h5 class="css-1qn0xuy"><span role="text"><span data-testid="caption-paragraph">झांसी की रानी लक्ष्मीबाई</span></span></h5>
<h5 class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr"><span class="css-5ku87v">प्रकाशित</span><time class="css-illkbo expmsel0" datetime="2026-06-18">18 जून 2026</time></h5>
<h5 class="css-1rsf0vv" data-testid="read-time"><span class="css-qxza9s">पढ़ने का समय: 8 मिनट</span></h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>(यह लेख बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर</b><a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1h2ur550" href="https://www.bbc.com/hindi/india-40327380.amp" target="_blank" rel="noopener"><b> 20 जून 2017 को पहली बार प्रकाशित</b></a><b> हुआ था)</b></p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>अंग्रेज़ों की तरफ़ से कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स पहला शख़्स था जिसने रानी लक्ष्मीबाई को अपनी आँखों से लड़ाई के मैदान में लड़ते हुए देखा.</b></p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने घोड़े की रस्सी अपने दाँतों से दबाई हुई थी. वो दोनों हाथों से तलवार चला रही थीं और एक साथ दोनों तरफ़ वार कर रही थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनसे पहले एक और अंग्रेज़ जॉन लैंग को रानी लक्ष्मीबाई को नज़दीक से देखने का मौका मिला था, लेकिन लड़ाई के मैदान में नहीं, उनकी हवेली में.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब दामोदर के गोद लिए जाने को अंग्रेज़ों ने अवैध घोषित कर दिया तो रानी लक्ष्मीबाई को झाँसी का अपना महल छोड़ना पड़ा था</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने एक तीन मंज़िल की साधारण सी हवेली &#8216;रानी महल&#8217; में शरण ली थी.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी ने वकील जॉन लैंग की सेवाएं लीं जिसने हाल ही में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ एक केस जीता था.</h5>
<h5 id="रानी-महल-में-लक्ष्मी-बाई" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी महल&#8217; में लक्ष्मी बाई</h5>
<h5>लैंग का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और वो मेरठ में एक अख़बार, &#8216;मुफ़ुस्सलाइट&#8217; निकाला करते थे.</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लैंग अच्छी ख़ासी फ़ारसी और हिंदुस्तानी बोल लेते थे और ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन उन्हें पसंद नहीं करता था क्योंकि वो हमेशा उन्हें घेरने की कोशिश किया करते थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब लैंग पहली बार झाँसी आए तो रानी ने उनको लेने के लिए घोड़े का एक रथ आगरा भेजा था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनको झाँसी लाने के लिए रानी ने अपने दीवान और एक अनुचर को आगरा रवाना किया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">अनुचर के हाथ में बर्फ़ से भरी बाल्टी थी जिसमें पानी, बीयर और चुनिंदा वाइन्स की बोतलें रखी हुई थीं. पूरे रास्ते एक नौकर लैंग को पंखा करते आया था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">झाँसी पहुंचने पर लैंग को पचास घुड़सवार एक पालकी में बैठा कर &#8216;रानी महल&#8217; लाए जहाँ के बगीचे में रानी ने एक शामियाना लगवाया हुआ था.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="मलमल-की-साड़ी" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">मलमल की साड़ी</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी लक्ष्मीबाई शामियाने के एक कोने में एक पर्दे के पीछे बैठी हुई थीं. तभी अचानक रानी के दत्तक पुत्र दामोदर ने वो पर्दा हटा दिया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लैंग की नज़र रानी के ऊपर गई. बाद में रेनर जेरॉस्च ने एक किताब लिखी, &#8216;द रानी ऑफ़ झाँसी, रेबेल अगेंस्ट विल.&#8217;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">किताब में रेनर जेरॉस्च ने जॉन लैंग को कहते हुए बताया, &#8216;रानी मध्यम कद की तगड़ी महिला थीं. अपनी युवावस्था में उनका चेहरा बहुत सुंदर रहा होगा, लेकिन अब भी उनके चेहरे का आकर्षण कम नहीं था. मुझे एक चीज़ थोड़ी अच्छी नहीं लगी, उनका चेहरा ज़रूरत से ज़्यादा गोल था. हाँ उनकी आँखें बहुत सुंदर थीं और नाक भी काफ़ी नाज़ुक थी. उनका रंग बहुत गोरा नहीं था. उन्होंने एक भी ज़ेवर नहीं पहन रखा था, सिवाए सोने की बालियों के. उन्होंने सफ़ेद मलमल की साड़ी पहन रखी थी, जिसमें उनके शरीर का रेखांकन साफ़ दिखाई दे रहा था. जो चीज़ उनके व्यक्तित्व को थोड़ा बिगाड़ती थी- वो थी उनकी फटी हुई आवाज़.&#8217;</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="रानी-के-घुड़सवार" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी के घुड़सवार</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">बहरहाल कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स ने तय किया कि वो ख़ुद आगे जा कर रानी पर वार करने की कोशिश करेंगे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लेकिन जब-जब वो ऐसा करना चाहते थे, रानी के घुड़सवार उन्हें घेर कर उन पर हमला कर देते थे. उनकी पूरी कोशिश थी कि वो उनका ध्यान भंग कर दें.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">कुछ लोगों को घायल करने और मारने के बाद रॉड्रिक ने अपने घोड़े को एड़ लगाई और रानी की तरफ़ बढ़ चले थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उसी समय अचानक रॉड्रिक के पीछे से जनरल रोज़ की अत्यंत निपुण ऊँट की टुकड़ी ने एंट्री ली. इस टुकड़ी को रोज़ ने रिज़र्व में रख रखा था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">इसका इस्तेमाल वो जवाबी हमला करने के लिए करने वाले थे. इस टुकड़ी के अचानक लड़ाई में कूदने से ब्रिटिश खेमे में फिर से जान आ गई. रानी इसे फ़ौरन भाँप गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनके सैनिक मैदान से भागे नहीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या कम होनी शुरू हो गई.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="ब्रिटिश-सैनिक" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">ब्रिटिश सैनिक</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उस लड़ाई में भाग ले रहे जॉन हेनरी सिलवेस्टर ने अपनी किताब &#8216;रिकलेक्शंस ऑफ़ द कैंपेन इन मालवा एंड सेंट्रल इंडिया&#8217; में लिखा, &#8220;अचानक रानी ज़ोर से चिल्लाई, &#8216;मेरे पीछे आओ.&#8217; पंद्रह घुड़सवारों का एक जत्था उनके पीछे हो लिया. वो लड़ाई के मैदान से इतनी तेज़ी से हटीं कि अंग्रेज़ सैनिकों को इसे समझ पाने में कुछ सेकेंड लग गए. अचानक रॉड्रिक ने अपने साथियों से चिल्ला कर कहा, &#8216;दैट्स दि रानी ऑफ़ झाँसी, कैच हर.'&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी और उनके साथियों ने भी एक मील ही का सफ़र तय किया था कि कैप्टेन ब्रिग्स के घुड़सवार उनके ठीक पीछे आ पहुंचे. जगह थी कोटा की सराय.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लड़ाई नए सिरे से शुरू हुई. रानी के एक सैनिक के मुकाबले में औसतन दो ब्रिटिश सैनिक लड़ रहे थे. अचानक रानी को अपने बायें सीने में हल्का-सा दर्द महसूस हुआ, जैसे किसी सांप ने उन्हें काट लिया हो.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">एक अंग्रेज़ सैनिक ने जिसे वो देख नहीं पाईं थीं, उनके सीने में संगीन भोंक दी थी. वो तेज़ी से मुड़ीं और अपने ऊपर हमला करने वाले पर पूरी ताकत से तलवार लेकर टूट पड़ीं.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="राइफ़ल-की-गोली" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">राइफ़ल की गोली</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी को लगी चोट बहुत गहरी नहीं थी, लेकिन उसमें बहुत तेज़ी से ख़ून निकल रहा था. अचानक घोड़े पर दौड़ते-दौड़ते उनके सामने एक छोटा-सा पानी का झरना आ गया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने सोचा वो घोड़े की एक छलांग लगाएंगी और घोड़ा झरने के पार हो जाएगा. तब उनको कोई भी नहीं पकड़ सकेगा.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने घोड़े में एड़ लगाई, लेकिन वो घोड़ा छलाँग लगाने के बजाए इतनी तेज़ी से रुका कि वो क़रीब क़रीब उसकी गर्दन के ऊपर लटक गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने फिर एड़ लगाई, लेकिन घोड़े ने एक इंच भी आगे बढ़ने से इंकार कर दिया. तभी उन्हें लगा कि उनकी कमर में बाई तरफ़ किसी ने बहुत तेज़ी से वार हुआ है.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनको राइफ़ल की एक गोली लगी थी. रानी के बांए हाथ की तलवार छूट कर ज़मीन पर गिर गई.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने उस हाथ से अपनी कमर से निकलने वाले ख़ून को दबा कर रोकने की कोशिश की.</p>
<h2 id="रानी-पर-जानलेवा-हमला" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी पर जानलेवा हमला</h2>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">एंटोनिया फ़्रेज़र अपनी पुस्तक, &#8216;द वॉरियर क्वीन&#8217; में लिखती हैं, &#8220;तब तक एक अंग्रेज़ रानी के घोड़े की बगल में पहुंच चुका था. उसने रानी पर वार करने के लिए अपनी तलवार ऊपर उठाई. रानी ने भी उसका वार रोकने के लिए दाहिने हाथ में पकड़ी अपनी तलवार ऊपर की.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">&#8220;उस अंग्रेज़ की तलवार उनके सिर पर इतनी तेज़ी से लगी कि उनका माथा फट गया और वो उसमें निकलने वाले ख़ून से लगभग अंधी हो गईं.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तब भी रानी ने अपनी पूरी ताकत लगा कर उस अंग्रेज़ सैनिक पर जवाबी वार किया. लेकिन वो सिर्फ़ उसके कंधे को ही घायल कर पाई. रानी घोड़े से नीचे गिर गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उनके एक सैनिक ने अपने घोड़े से कूद कर उन्हें अपने हाथों में उठा लिया और पास के एक मंदिर में ले लाया. रानी तब तक जीवित थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के पुजारी ने उनके सूखे हुए होठों को एक बोतल में रखा गंगा जल लगा कर तर किया. रानी बहुत बुरी हालत में थीं. धीरे-धीरे वो अपने होश खो रही थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उधर, मंदिर के अहाते के बाहर लगातार फ़ायरिंग चल रही थी. अंतिम सैनिक को मारने के बाद अंग्रेज़ सैनिक समझे कि उन्होंने अपना काम पूरा कर दिया है.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="दामोदर-के-लिए" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">दामोदर के लिए&#8230;</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी रॉड्रिक ने ज़ोर से चिल्ला कर कहा, &#8220;वो लोग मंदिर के अंदर गए हैं. उन पर हमला करो. रानी अभी भी ज़िंदा है.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उधर, पुजारियों ने रानी के लिए अंतिम प्रार्थना करनी शुरू कर दी थी. रानी की एक आँख अंग्रेज़ सैनिक की कटार से लगी चोट के कारण बंद थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने बहुत मुश्किल से अपनी दूसरी आँख खोली. उन्हें सब कुछ धुंधला दिखाई दे रहा था और उनके मुंह से रुक-रुक कर शब्द निकल रहे थे, &#8220;&#8230;.दामोदर&#8230; मैं उसे तुम्हारी&#8230; देखरेख में छोड़ती हूँ&#8230; उसे छावनी ले जाओ&#8230; दौड़ो उसे ले जाओ.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">बहुत मुश्किल से उन्होंने अपने गले से मोतियों का हार निकालने की कोशिश की. लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाई और फिर बेहोश हो गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के पुजारी ने उनके गले से हार उतार कर उनके एक अंगरक्षक के हाथ में रख दिया, &#8220;इसे रखो&#8230; दामोदर के लिए.&#8221;</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="रानी-का-पार्थिव-शरीर" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी का पार्थिव शरीर</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी की साँसे तेज़ी से चलने लगी थीं. उनकी चोट से ख़ून निकल कर उनके फेफड़ों में घुस रहा था. धीरे-धीरे वो डूबने लगी थीं. अचानक जैसे उनमें फिर से जान आ गई.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">वो बोलीं, &#8220;अंग्रेज़ों को मेरा शरीर नहीं मिलना चाहिए.&#8221; ये कहते ही उनका सिर एक ओर लुड़क गया. उनकी साँसों में एक और झटका आया और फिर सब कुछ शांत हो गया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने प्राण त्याग दिए थे. वहाँ मौजूद रानी के अंगरक्षकों ने आनन-फ़ानन में कुछ लकड़ियाँ जमा की और उन पर रानी के पार्थिव शरीर को रख आग लगा दी थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनके चारों तरफ़ रायफ़लों की गोलियों की आवाज़ बढ़ती चली जा रही थी. मंदिर की दीवार के बाहर अब तक सैकड़ों ब्रिटिश सैनिक पहुंच गए थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के अंदर से सिर्फ़ तीन रायफ़लें अंग्रेज़ों पर गोलियाँ बरसा रही थीं. पहले एक रायफ़ल शांत हुई&#8230; फिर दूसरी और फिर तीसरी रायफ़ल भी शांत हो गई.</p>
<h2 id="चिता-की-लपटें" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">चिता की लपटें</h2>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब अंग्रेज़ मंदिर के अंदर घुसे तो वहाँ से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. सब कुछ शांत था. सबसे पहले रॉड्रिक ब्रिग्स अंदर घुसे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">वहाँ रानी के सैनिकों और पुजारियों के कई दर्जन रक्तरंजित शव पड़े हुए थे. एक भी आदमी जीवित नहीं बचा था. उन्हें सिर्फ़ एक शव की तलाश थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उनकी नज़र एक चिता पर पड़ी जिसकीं लपटें अब धीमी पड़ रही थीं. उन्होंने अपने बूट से उसे बुझाने की कोशिश की.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उसे मानव शरीर के जले हुए अवशेष दिखाई दिए. रानी की हड्डियाँ क़रीब-क़रीब राख बन चुकी थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">इस लड़ाई में लड़ रहे कैप्टन क्लेमेंट वॉकर हेनीज ने बाद में रानी के अंतिम क्षणों का वर्णन करते हुए लिखा, &#8220;हमारा विरोध ख़त्म हो चुका था. सिर्फ़ कुछ सैनिकों से घिरी और हथियारों से लैस एक महिला अपने सैनिकों में कुछ जान फूंकने की कोशिश कर रही थी.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">&#8220;बार-बार वो इशारों और तेज़ आवाज़ से हार रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास करती थी, लेकिन उसका कुछ ख़ास असर नहीं पड़ रहा था. कुछ ही मिनटों में हमने उस महिला पर भी काबू पा लिया. हमारे एक सैनिक की कटार का तेज़ वार उसके सिर पर पड़ा और सब कुछ समाप्त हो गया. बाद में पता चला कि वो महिला और कोई नहीं स्वयं झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई थी.&#8221;</p>
<h2 id="तात्या-टोपे" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">तात्या टोपे</h2>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी के बेटे दामोदर को लड़ाई के मैदान से सुरक्षित ले जाया गया. इरा मुखोटी अपनी किताब &#8216;हीरोइंस&#8217; में लिखती हैं, &#8220;दामोदर ने दो साल बाद 1860 में अंग्रेज़ों के सामने आत्म समर्पण किया. बाद में उसे अंग्रेज़ों ने पेंशन भी दी. 58 साल की उम्र में उनकी मौत हुई. जब वो मरे तो वो पूरी तरह से कंगाल थे. उनके वंशज अभी भी इंदौर में रहते हैं और अपने आप को &#8216;झाँसीवाले&#8217; कहते हैं.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी की मौत के साथ ही विद्रोहियों का साहस टूट गया और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">नाना साहब वहाँ से भी बच निकले, लेकिन तात्या टोपे के साथ उनके अभिन्न मित्र नवाड़ के राजा ने ग़द्दारी की.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तात्या टोपे पकड़े गए और उन्हें ग्वालियर के पास शिवपुरी ले जा कर एक पेड़ से फाँसी पर लटका दिया गया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.</b></p>
</div>
<h5>https://www.bbc.com/hindi/articles/cvgqv5x74पज्जोतो</h5>
<h5><strong>इस लिंक पर क्लिक करके भी आप सीधे बीबीसी पर जाकर उपरोक्त लेख पढ़ सकते हैं </strong></h5>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p><strong><span style="color: #993300;">अस्वीकरण: इस समाचार में व्यक्त विचार, आरोप, दावे एवं कथन संबंधित व्यक्तियों, संगठनों या स्रोतों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। इन तथ्यों एवं बयानों की स्वतंत्र पुष्टि या उनसे सहमति व्यक्त करना शब्द शक्ति न्यूज़ का उद्देश्य नहीं है। किसी भी प्रकार की त्रुटि, विवाद या दावे के लिए संबंधित पक्ष स्वयं उत्तरदायी होगा।</span></strong></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
