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	<title>शिक्षा &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>देश में जुलाई से लागू हो सकती है नई शिक्षा नीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Jun 2019 16:15:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[ मोदी सरकार के गठन के बाद अब नई शिक्षा नीति शीघ्र लागू करने पर तैयारी शुरू हो गई हैं। यह नई सरकार के सौ दिन के एजेंडे में शामिल है। यदि कोई तकनीकी रुकावट नहीं आई तो इसे जुलाई से ही लागू किया जा सकता है। इस बीच, सरकार ने नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: 0px; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;"> मोदी सरकार के गठन के बाद अब नई शिक्षा नीति शीघ्र लागू करने पर तैयारी शुरू हो गई हैं। यह नई सरकार के सौ दिन के एजेंडे में शामिल है। यदि कोई तकनीकी रुकावट नहीं आई तो इसे जुलाई से ही लागू किया जा सकता है।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: 0px; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">इस बीच, सरकार ने नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को लेकर आ रहे सुझावों पर भी काम शुरू कर दिया है। प्रत्येक सुझावों को गंभीरता से परखा जा रहा है। इन सुझावों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी पैनी नजर है। सुझावों के लिए हालांकि अंतिम तारीख 30 जून की है। बावजूद इसके नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी इसे लेकर मिल रहे हर दिन के सुझावों को सूचीबद्ध करने और परखने में जुटी है। नई शिक्षा नीति लागू करने को लेकर सरकार की दिलचस्पी इसलिए भी है, क्योंकि यह नई सरकार के सौ दिन के कामकाज के एजेंडे में शामिल है। यही वजह है कि नई सरकार के गठन के तुरंत बाद नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को जारी किया गया।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: 0px; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">हालांकि, इसके जारी होते ही भाषा जैसे मुद्दों को लेकर विरोध के सुर भी उठे, लेकिन सरकार ने इसके तूल पकड़ने से पहले ही पूरी स्थिति स्पष्ट करके उसे ठंडा कर दिया। सरकार ने साफ किया है कि वह नई शिक्षा नीति के जरिए किसी पर कुछ थोपने नहीं जा रही है। खास बात यह है कि नई शिक्षा नीति को लेकर शुरू से ही विरोध के सुर उठते रहे हैं। यही वजह है कि सरकार अब तक इसे आगे बढ़ाने से बचती रही है। हालांकि इस सब के बीच नीति के ड्राफ्ट को तैयार में जुटी टीम के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि नीति में विवाद जैसा कुछ नहीं है। नीति पूरे वैज्ञानिक नजरिए से तैयार की गई है। इनमें देश की संस्कृति को जीवित रखने की कोशिश की गई है</p>
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		<title>अब चार साल का होगा बीएड ,12वीं  के बाद ही इसे ज्वाइन कर सकेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Feb 2019 02:28:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली, आइएएनएस। शिक्षण कार्य और शिक्षकों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अगले साल से शिक्षा में स्नातक (बीएड) का कोर्स चार साल का करने की घोषणा की है। इस कोर्स को करने से प्रतियोगियों का एक साल बचेगा क्योंकि वह 12वीं क्लास के बाद ही इसे ज्वाइन कर सकेंगे। जबकि मौजूदा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; color: #404040; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; font-size: 18px; line-height: 30px; widows: auto;">नई दिल्ली, आइएएनएस।</strong><span style="color: #404040; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; font-size: 18px; line-height: 30px; widows: auto;"> शिक्षण कार्य और शिक्षकों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अगले साल से शिक्षा में स्नातक (बीएड) का कोर्स चार साल का करने की घोषणा की है। इस कोर्स को करने से प्रतियोगियों का एक साल बचेगा क्योंकि वह 12वीं क्लास के बाद ही इसे ज्वाइन कर सकेंगे। जबकि मौजूदा प्रणाली में स्नातक करने के बाद ही दो साल का बीएड किया जा सकता है।</span></p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;"><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;">12वीं कक्षा के बाद ही ज्वाइन कर सकेंगे यह कोर्स</strong></p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को कहा कि पढ़ाने का स्तर गिरता जा रहा है क्योंकि अब इस क्षेत्र में वह लोग आते हैं जिनके पास कोई और विकल्प नहीं बचता है। इसलिए सरकार ने अगले साल से चार साल के बीएड कोर्स को शुरू करने का फैसला लिया है।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">उन्होंने कहा कि पढ़ाने का काम लोगों की पहली पसंद होना चाहिए। यह एक व्यावसायिक चुनाव होना चाहिए, नाकि कुछ न मिलने पर अपनाया गया कार्य हो।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">जावड़ेकर ने दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को संबोधित करते हुए बताया कि बीएड तीन माध्यमों बीए, बीकॉम और बीएससी में किया जाएगा। अध्यापकों की शिक्षा के लिए जिम्मेदार वैधानिक संस्था नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन ने इसके लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया है।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 15-20 राज्य नो डिटेंशन नीति के बाद कक्षा 5 से आठ तक के लिए परीक्षा कराएंगे। उन्होंने कहा कि फेल न करने की नीति के चलते दस सालों में शिक्षा का स्तर गिरा है। लेकिन अब 15-20 राज्य अगले साल से परीक्षा कराना शुरू कर देंगे।</p>
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		<title>शिक्षा में खर्च के मामले में भारत का दुनिया में 136वां स्थान पर होमवर्क कराने में नंबर एक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Sep 2018 17:33:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[ नई दिल्ली. शिक्षा पर खर्च के मामले में भारत की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। इस क्षेत्र में खर्च के मामले में भारत का दुनिया में 136वां स्थान है। जरूरत के मुताबिक कम खर्च और क्वालिटी एजुकेशन की कमी को युवा सबसे बड़ी चिंता मानते हैं। एक ताजा इंटरनेशनल सर्वे के मुताबिक 86% नौजवान भारत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong> नई दिल्ली</strong>. शिक्षा पर खर्च के मामले में भारत की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। इस क्षेत्र में खर्च के मामले में भारत का दुनिया में 136वां स्थान है। जरूरत के मुताबिक कम खर्च और क्वालिटी एजुकेशन की कमी को युवा सबसे बड़ी चिंता मानते हैं। एक ताजा इंटरनेशनल सर्वे के मुताबिक 86% नौजवान भारत के भविष्य को लेकर आशावादी तो हैं, लेकिन इनमें से 33% युवाओं ने शिक्षा की कमी को चिंता का विषय बताया।</p>
<p>दुनिया में शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश नॉर्वे है। यह अपनी जीडीपी का 6% से ज्यादा खर्च करता है। हालांकि, बच्चों को पढ़ाने और उनका होमवर्क कराने में वक्त देने के मामले में भारतीय दुनिया में पहले नंबर पर आते हैं।</p>
<p><strong>बड़े देशों का शिक्षा पर खर्च </strong><br />
भारत में इस बार के आम बजट में शिक्षा क्षेत्र को कुल 85 हजार 10 करोड़ रुपए मिले हैं। यह पिछले साल के संशोधित बजट से सिर्फ 3 हजार 141 करोड़ रुपए ज्यादा है। इस तरह देश के शिक्षा बजट में इस साल महज 3.69% का ही इजाफा हुआ। साल 2012-13 में शिक्षा क्षेत्र पर होने वाला खर्च जीडीपी का 3.1% था। वहीं 2014-15 में यह खर्च 2.8% और  2015-16 में यह 2.4% पर आ गया। हालांकि, 2016-17 और 2017-18 में इसमें थोड़ी वृद्धि हुई और अब यह आंकड़ा 2.7% पर आ गया है।</p>
<p>नर्सरी से लेकर अंडर ग्रेजुएट कोर्स तक बच्चों की पढ़ाई पर हॉन्गकॉन्ग, यूएई, सिंगापुर और अमेरिका के लोग औसतन सबसे ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। वहीं, ब्रिटेन, कनाडा और भारत में यह आंकड़ा 25 लाख रुपए से कम है।</p>
<p>वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक सर्वे के मुताबिक, बच्चों की पढ़ाई और होमवर्क पूरा करने में मदद करने में भारतीय पैरेंट्स सबसे ज्यादा वक्त देते हैं। भारतीय हर हफ्ते औसतन 12 घंटे का समय बच्चों की पढ़ाई में उनकी मदद करने में बिताते हैं। ब्रिटेन और जापान के पैरेंट्स इस मामले में सबसे कम वक्त देते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>बीएड चार साल का करने की तैयारी 12 वीं के बाद मिल सकेगा प्रवेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Feb 2018 10:10:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[टीचर्स एजुकेशन का स्तर सुधारने के लिए अब एचआरडी मिनिस्ट्री दो साल के बैचलर इन एजुकेशन (बीएड) कोर्स (B.Ed.(Bachelor of Education): Course) को खत्म कर चार साल का इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स (INTEGRATED B.ED COURSE) शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। मिनिस्ट्री के अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद यह भी है कि वही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div>टीचर्स एजुकेशन का स्तर सुधारने के लिए अब एचआरडी मिनिस्ट्री दो साल के बैचलर इन एजुकेशन (बीएड) कोर्स (B.Ed.(Bachelor of Education): Course) को खत्म कर चार साल का इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स (INTEGRATED B.ED COURSE) शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। मिनिस्ट्री के अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद यह भी है कि वही लोग टीचिंग प्रफेशन में आएं जो इसे लेकर गंभीर हैं।</div>
<div><center></p>
<div id="div-gpt-ad-1517231246925-0" data-google-query-id="CMKH1ejUrNkCFYufaAodq5YLwg">
<div id="google_ads_iframe_/532136328/CM_Middle_Center_0__container__">मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक मिनिस्ट्री ने नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) को लिखा है कि वह इंटेग्रेटिड बीएड कोर्स की दिशा में काम करना शुरू कर दें। उम्मीद है कि अगले शैक्षणिक सत्र में स्टूडेंट्स को 12वीं के बाद इंटेग्रेटेड बीएड कोर्स ऑफर किया जाएगा। तब स्टूडेंस 12वीं के बाद बीए-बीएड या बीएससी- बीएड जैसे कोर्स में ऐडमिशन ले सकेंगे। यह चार साल का होगा।</div>
</div>
<p></center></div>
<div></div>
<h3>बंद हो जाएंगी बीएड की दुकानें</h3>
<div>मिनिस्ट्री के अधिकारियों के मुताबिक इससे बीएड के नाम पर दुकान चला रही संस्थाएं बंद हो जाएंगी और फिर कॉलेज-यूनिवर्सिटी में ही बीएड कर टीचर निकलेंगे। न्यू एजुकेशन पॉलिसी बनाने के लिए टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में जो कमेटी बनी थी, उसने भी मौजूदा 2 साल के बीएड कोर्स को चार साल के इंटेग्रेटिड कोर्स में तब्दील करने की सिफारिश की थी। हालांकि उस कमेटी के ड्राफ्ट को पॉलिसी ड्राफ्ट नहीं माना गया और उसे पॉलिसी के लिए आए सुझावों का हिस्सा ही माना गया।</div>
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