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	<title>श्रधांजलि &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>पूज्य शंकराचार्य को सरसंघचालक  मोहन भागवत एवं सरकार्यवाह सुरेश भैय्या जोशी द्वारा दी गयी श्रद्धांजलि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Feb 2018 18:39:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में सरसंघचालक मोहन भागवत और सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी ने कहा है कि कांची कामकोटि पीठ के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी महाराज ने एक अत्यंत तेजस्वी एवं ओजस्वी जीवन पूर्ण किया और अब उनकी पवित्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में सरसंघचालक मोहन भागवत और सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी ने कहा है कि कांची कामकोटि पीठ के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी महाराज ने एक अत्यंत तेजस्वी एवं ओजस्वी जीवन पूर्ण किया और अब उनकी पवित्र आत्मा का शिवत्व में सायुज्ज्य हुआ है. आद्यशंकराचार्य की परंपरा के अनुसार हिन्दू समाज के जीवन में किसी भी कारण से आ गयी कुरीतियों के निवारण एवं दुर्बल वर्ग की उन्नति के लिए बहुविध सेवा कार्यों हेतु वे अपनी विलक्षण क्षमता और अद्भुत संकल्प शक्ति से जीवन भर समर्पित रहे.</p>
<p>अपने सनातन वैदिक दर्शन और वैदिक संस्कृति को युगानुकूल प्रतिष्ठापित करते हुए समस्त हिन्दू समाज को सभी दृष्टि से दोषमुक्त तथा सामर्थ्यवान करने के लिए उन्होंने सफल प्रयत्न किये हैं. अब वे पार्थिव शरीर से हमारे मध्य नहीं है किन्तु उनकी प्रेरणादायी स्मृतियाँ समस्त हिन्दू समाज को निरंतर उर्ज्वस्वित करते रहेंगी.</p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शंकराचार्य परंपरा की महान ज्योति के परमात्मा में विलीन होने पर हम अपनी विनम्र श्रद्धांजलि समर्पित करते हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>गुटखा किंग को उनकी पुत्रियाँ ने दिया कांधा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Nov 2017 10:00:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रधांजलि]]></category>
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					<description><![CDATA[पान सेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गुटखा किंग के नाम से जाने जाने वाले, हरिभाई लालवानी 65 वर्ष का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। मगर सबसे प्रमुख बात यह रही कि उनकी अर्थी को उनकी पुत्रियों ने ही कांधा दिया था। हरिभाई लालवानी की शव यात्रा शनिवार प्रातः नोएडा के सेक्टर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पान सेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गुटखा किंग के नाम से जाने जाने वाले, हरिभाई लालवानी 65 वर्ष का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। मगर सबसे प्रमुख बात यह रही कि उनकी अर्थी को उनकी पुत्रियों ने ही कांधा दिया था। हरिभाई लालवानी की शव यात्रा शनिवार प्रातः नोएडा के सेक्टर 40 स्थित घर से निकली। गुरूवार की रात्रि में लालवानी की तबियत बिगड़ गई।</p>
<p>उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया था। ऐसे में उन्हें नोएडा स्थित फोर्टिस चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। मगर उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी पुत्री अनीता लालवानी ने इस मामले में कहा कि हरिभाई ने ही इच्छा जताई थी कि उनकी मृत्यु पर उत्सव मनाया जाए।</p>
<p>शव यात्रा उत्सव की तरह निकाली जाए। ऐसे में उनकी बेटियों ने अर्थी को कांधा दिया। प्रिंस गुटखा के मालिक लालवानी ने वर्ष 1990 के दशक में नोएडा एन्टप्रेन्योर्स के अध्यक्ष बने थे। हालांकि वर्ष 1994 में उनका नाम नोएडा आवासीय आवंटन घोटाले में सामने आया था। इस घोटाले में मुख्यकार्यपाक अधिकारी नीरा यादव और आईएस अधिकारी राकेश कुमार को सीबीआई ने सजा सुनाई थी। हरिभाई लालवानी का गुटखा और पानमसाले का कारोबार बहुत चला। उन्हें इस कारोबार में बड़ी सफलता मिली थी।</p>
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		<title>आइए याद करें देश के दो महान नेताओं बल्लभभाई और इंदिरा गांधी को</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Oct 2017 10:44:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रधांजलि]]></category>
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					<description><![CDATA[                                             विराग पाचपोरे देश आज दो महान नेताओं का स्मरण कर रहा हैं. जिन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद सरे देश को एक सूत्र में पिरोया, एक देश-एक जन-एक राष्ट्र के भाव का स्मरण दिलाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h6>                                             <span style="color: #ff0000;">विराग पाचपोरे</span></h6>
<p>देश आज दो महान नेताओं का स्मरण कर रहा हैं. जिन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद सरे देश को एक सूत्र में पिरोया, एक देश-एक जन-एक राष्ट्र के भाव का स्मरण दिलाया ऐसे लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और जिन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिखाए, देश के शौर्य बल का परिचय को दुनिया के कराया ऐसी श्रीमती इंदिरा गाँधी.</p>
<p>सरदार पटेल ही वास्तविक इस देश के प्रधान मंत्री बनने वाले थे. १९४७ में जब सभी प्रान्तिक कांग्रेस समित्यों की राय पूछी गयी तो तीन को छोड़ कर सभी ने सरदार के पक्ष में मत प्रकट किया था. पर कांग्रेस में तो गाँधी की चलती थी. इसलीये &#8216;आखरी अंग्रेज&#8217; &#8216;मेरा हिन्दू घराने में जन्म यह एक अपघात हैं&#8217; ऐसी मान्यता रखनेवाले नेहरु को प्रधानमंत्री का ताज पहनाया गया.</p>
<p>सरदार पटेल जिस कांग्रेस पार्टी की दें थे उनको तो उनकी पार्टी ने लगभग नकार दिया हैं. भाजपा ने शुरू से ही सरदार का सम्मान किया हैं. अगर सरदार ना होते तो शायद &#8216;शांतिदूत&#8217; नेहरु ने देश को पता नहीं कितने टुकड़ों में बाँट कर रख दिया होता. एक कश्मीर का मसला ही उनके कारण अभी तक उलझ नहीं पाया हैं. सरदार अगर कश्मीर को हाथ में लेते तो चित्र कुछ अलग होता. अब भी समय हैं. सरदार के राज्य से आनेवाले नेता के हत्थों में देश की बागडोर हैं तो हम उम्मीद रखते हैं की कश्मीर समस्या का समाधान जल्द ही निकल आयेगा.</p>
<p>इंदिरा गाँधी देश की पहली ऐसी नेता थी जिसने जहाँ कड़ी की आवश्यकता थी वहां दिखाई. फिर वो प्रिवी पर्स का मामला हो या बैंक राष्ट्रीयकरण का. पर सत्ता की भूख उनके अन्दर इस कदर थी की अपनी सत्ता बचने की होड़ में उन्होंने पहले तो कांग्रेस को तोड़ दिया फिर न्यायपालिका को ताक पर रख कर देश में आपातकाल लागु किया और सारे देश को जेल बना दिया. हजारो, लाखो निरपराध लोगों को जेल में ठूंस दिया, उनको भयंकर यातनाएं दी गयी और एक निरंकुश शासन का दौर चला. खैर, उनको इस भूल की सजा मिल ही गयी.</p>
<p>अस्सी के दशक में जब उनकी सत्ता में वापसी हुई तो सुवर्ण मंदिर का कांड हुआ. लेकिन आतंकवादियों को नेस्तनाबूत करने में वे हिचकिचाई नहीं. उसी के कारण उन्हें अपनी जन से भी हाथ धोना पड़ा था.</p>
<p>जो भी हो, सरदार पटेल और श्रीमती इंदिरा गाँधी देश के सपूत हैं और इसीलिए उनके स्मृति में हम सबने प्रणाम करना चाहिए. उनके जीवनी का अध्ययन करना चाहिए और उससे सीख लेकर हमारे देश को आगे कैसे ले जाया सकता हैं इसका विचार करना चाहिए.</p>
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