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	<title>संघ &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>यूजीसी नियमों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से उठे सवाल क्या संघ की राय स्पष्ट है ? भाजपा और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी चर्चा तेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 07:21:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्र सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[मोहन भागवत]]></category>
		<category><![CDATA[यूजीसी नियम]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे  नई दिल्ली/भीलवाड़ा/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े नए नियमों को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आचार्य पुलक सागर महाराज से बातचीत में कही गई बात ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="text-align: center;"><strong><span style="color: #993366;">प्रवीण दुबे </span></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">नई दिल्ली/भीलवाड़ा/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े नए नियमों को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आचार्य पुलक सागर महाराज से बातचीत में कही गई बात ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</div>
<div dir="auto">आचार्य पुलक सागर महाराज के अनुसार, मोहन भागवत ने उनसे बातचीत के दौरान कहा— “अभी केवल प्रस्ताव आया है, पास नहीं हुआ, न यह कानून बना है और न बनेगा।” मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि बातचीत के दौरान इस विषय के न्यायालय में विचाराधीन होने का उल्लेख हुआ।</div>
<div dir="auto">भागवत की इस कथित टिप्पणी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस बयान का वास्तविक आशय क्या है और इसे UGC नियमों की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में कैसे समझा जाए?</div>
<div dir="auto">बयान का पहला हिस्सा स्पष्ट, दूसरा हिस्सा सवालों के घेरे में</div>
<div dir="auto">यह कहना कि किसी प्रस्ताव के आने और उसके अंतिम रूप से लागू होने में अंतर होता है, अपने आप में तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट बात है। किसी प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप संबंधित प्रक्रिया, निर्णय और आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप के बाद ही तय होता है।</div>
<div dir="auto">लेकिन बयान का दूसरा हिस्सा—“न कानून बना है और न बनेगा”—बहस को एक अलग दिशा देता है।</div>
<div dir="auto">यही वह वाक्य है जिसको लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। यदि यह बात आचार्य पुलक सागर महाराज के माध्यम से सही रूप में सामने आई है तो स्वाभाविक रूप से यह जानने की जरूरत महसूस होती है कि “न बनेगा” से आशय क्या है? क्या यह केवल वर्तमान स्थिति का आकलन था, या संघ की ओर से इन नियमों को लेकर कोई स्पष्ट दृष्टिकोण व्यक्त किया गया था?</div>
<div dir="auto">यही कारण है कि इस संवेदनशील विषय पर मोहन भागवत की ओर से स्वयं स्पष्टीकरण सामने आने की मांग और चर्चा दोनों बढ़ सकती हैं।</div>
<div dir="auto">UGC की वर्तमान स्थिति को भी समझना जरूरी</div>
<div dir="auto">यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित नए नियमों में सूचीबद्ध किया गया है। इसलिए पूरे विषय को केवल “एक प्रस्ताव आया है” कहकर समझना वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड की पूरी तस्वीर नहीं देता।</div>
<div dir="auto">यानी बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि जिस प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्ष “प्रस्ताव”, “नियम” और “कानून” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनकी कानूनी स्थिति क्या है और न्यायालय की कार्यवाही के बाद इनका अंतिम प्रभाव क्या होगा।</div>
<div dir="auto">क्या बयान से संघ का रुख समझा जाए?</div>
<div dir="auto">यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू है।</div>
<div dir="auto">मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं। भाजपा और RSS के बीच वैचारिक संबंध सार्वजनिक रूप से चर्चित रहे हैं, लेकिन किसी एक संगठन के पदाधिकारी के बयान को स्वतः केंद्र सरकार या भाजपा का औपचारिक निर्णय मान लेना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">फिर भी, राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण के स्तर पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि संघ प्रमुख की ओर से यह कहा गया है कि “न कानून बना है और न बनेगा”, तो क्या इसे इस मुद्दे पर संघ की असहमति या आपत्ति के संकेत के रूप में देखा जाए?</div>
<div dir="auto">इसका निश्चित उत्तर तभी सामने आएगा जब RSS, भाजपा, केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय इस विषय पर औपचारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करें।</div>
<div dir="auto">क्या भाजपा या केंद्र सरकार ने निर्णय कर लिया है?</div>
<div dir="auto">फिलहाल भागवत के कथित बयान को केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी।</div>
<div dir="auto">सरकार की ओर से किसी प्रस्ताव को वापस लेने, उसमें बदलाव करने या उसे लागू नहीं करने का औपचारिक निर्णय और संघ प्रमुख की बातचीत में कही गई बात—दो अलग चीजें हैं।</div>
<div dir="auto">हालांकि, राजनीतिक चर्चा में दोनों को जोड़कर देखा जाना स्वाभाविक है। खासकर इसलिए क्योंकि केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार है और RSS तथा भाजपा के वैचारिक संबंधों को देखते हुए संघ से आने वाले महत्वपूर्ण संकेतों पर राजनीतिक हलकों में विशेष ध्यान दिया जाता है।</div>
<div dir="auto">लेकिन जब तक केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से औपचारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक इसे सरकार का फैसला कहना उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के बावजूद टिप्पणी पर सवाल क्यों?</div>
<div dir="auto">इस पूरे प्रकरण का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक प्रक्रिया है।</div>
<div dir="auto">यदि किसी विषय पर मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तो उस पर सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक टिप्पणी को लेकर स्वाभाविक रूप से सावधानी की अपेक्षा की जाती है। हालांकि, किसी लंबित मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।</div>
<div dir="auto">इसी कारण यहां मूल सवाल यह है कि भागवत के कथित बयान का उद्देश्य न्यायालय के विचाराधीन मामले पर कोई निष्कर्ष देना था या केवल यह बताना था कि मौजूदा स्थिति को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।</div>
<div dir="auto">यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायालय अपना निर्णय स्वतंत्र रूप से करता है और किसी सामाजिक या राजनीतिक व्यक्ति की टिप्पणी न्यायालय के निर्णय का विकल्प नहीं होती।</div>
<div dir="auto"><strong>अब भागवत के स्पष्टीकरण की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?</strong></div>
<div dir="auto">पूरे विवाद में सबसे अहम बात यही है कि यह बयान आचार्य पुलक सागर महाराज के हवाले से सामने आया है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भागवत की ओर से इस कथन पर अलग से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं दिखता।</div>
<div dir="auto">ऐसे में यदि मोहन भागवत स्वयं स्पष्ट कर दें कि उन्होंने “न कानून बना है और न बनेगा” किस संदर्भ में कहा था, तो कई सवालों का जवाब मिल सकता है।</div>
<div dir="auto">क्या उनका आशय था कि मौजूदा प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू नहीं होगा?</div>
<div dir="auto">क्या उनका आशय केवल यह था कि अभी इसे कानून का दर्जा नहीं मिला है?</div>
<div dir="auto">या वे यह संकेत दे रहे थे कि संघ इस व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप का समर्थन नहीं करता?</div>
<div dir="auto">इन तीनों अर्थों में काफी अंतर है।</div>
<div dir="auto">बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया</div>
<div dir="auto">UGC नियमों को लेकर पहले से ही छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। अब भागवत के कथित बयान ने बहस में एक नया आयाम जोड़ दिया है।</div>
<div dir="auto">एक तरफ इसे उन लोगों द्वारा महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो इन नियमों के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जब विषय न्यायालय और नियामकीय प्रक्रिया से जुड़ा है, तब किसी अंतिम परिणाम की बात किस आधार पर कही गई।</div>
<div dir="auto"> <strong>अब निगाह आधिकारिक स्पष्टीकरण पर</strong></div>
<div dir="auto">मोहन भागवत और आचार्य पुलक सागर महाराज के बीच हुई बातचीत से सामने आई यह बात निश्चित रूप से चर्चा का विषय बन गई है। लेकिन इसके आधार पर केंद्र सरकार या भाजपा के अंतिम निर्णय की घोषणा मान लेना अभी उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि “न कानून बना है और न बनेगा” कहने के पीछे मोहन भागवत का वास्तविक आशय क्या था।</div>
<div dir="auto">यदि यह संघ की स्पष्ट नीति का संकेत है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। और यदि यह केवल वर्तमान कानूनी एवं प्रक्रियागत स्थिति को लेकर की गई टिप्पणी थी, तो उसका भी स्पष्टीकरण आवश्यक है।</div>
<div dir="auto">क्योंकि UGC से जुड़े नियम केवल शिक्षा व्यवस्था का विषय नहीं हैं। इनके साथ सामाजिक समानता, भेदभाव, आरक्षण, विद्यार्थियों के अधिकार और संस्थागत शिकायत निवारण जैसे संवेदनशील प्रश्न जुड़े हैं। ऐसे विषय पर शब्दों की स्पष्टता ही भ्रम और राजनीतिक अटकलों के बीच अंतर पैदा कर सकती है।</div>
<div dir="auto">फिलहाल देश की नजर तीन स्तरों पर है—UGC की आगे की कार्रवाई, न्यायालय की कार्यवाही और केंद्र सरकार की आधिकारिक स्थिति। इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा नियमों का अंतिम स्वरूप क्या होगा और मोहन भागवत की टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ क्या था।</div>
<div dir="auto"></div>
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		<title>पिम्पलीकर पुनः बने प्रांत संघचालक, बांदिल होंगे ग्वालियर विभाग संघ चालक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Dec 2017 06:34:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[सीहोर,प्रांत खंड टोली शिविर में प्रात: काल से ही शरीरक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों के बाद दिन  संघचालक निर्वाचन सम्पन्न हुआ जिसमें पूर्व में प्रांत संघचालक सतीश पिंपलीकर को पुन: निर्वाचित हुए, सतीश पिंपलीकर का जन्म भोपाल में दिनांक 13.10.1949 को हुआ । वे बाल्यावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने । सतीश पिंपलीकर [&#8230;]]]></description>
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<p>सीहोर,प्रांत खंड टोली शिविर में प्रात: काल से ही शरीरक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों के बाद दिन  संघचालक निर्वाचन सम्पन्न हुआ जिसमें पूर्व में प्रांत संघचालक सतीश पिंपलीकर को पुन: निर्वाचित हुए, सतीश पिंपलीकर का जन्म भोपाल में दिनांक 13.10.1949 को हुआ । वे बाल्यावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने । सतीश पिंपलीकर ने मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय से सन्् 1972 में एम.एस-सी. (रसायन शास्त्र) की उपाधि प्राप्त की ।वे दतिया जिले में तीन वर्ष संघ के प्रचारक रहे । इसके बाद इन्होंने मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में रसायनविज्ञ के पद पर कार्यभार ग्रहण किया । आपका कार्यकाल 1975 से 1982 तक कोरबा में, 1983 से 2005 तक सारणी में रहा तथा 2005 से 2007 तक वीरसिंहपुर उमरिया से चीफ केमिस्ट के पद से सेवानिवृत्त हए । आपने बैतूल और नर्मदापुरम विभाग में संघ के विभिन्न दायित्वों पर कार्य किया । आपको 2009 में संघ की प्रांत कार्यकारिणी में दायित्व मिला उसके बाद 2011 से आप प्रांत के प्रांत संघचालक के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं ।अब पिंपलीकर अपने सहयोगियों से चर्चा करके कल प्रांत कार्यकारिणी के गठन की घोषणा करेंगे । उल्लेखनीय हैं कि संघ में ये वर्ष निर्वाचन का है इसके पूर्व जिला संघचालकों के चुनाव जिलों में संपन्न हुये थे । उसके बाद कल रात्रि में मध्यभारत भोपाल के आठों विभाग के संघचालकों के चुनाव संपन्न हुए जिसमें राजेन्द्र बांदिल ग्वालियर, सुरेश जैन मुरैना, सुरेश देव विदिशा, लक्ष्मीनारायण चौहान राजगढ़, धन्नालाल दोगने नर्मदापुर, देवेन्द्र सिंह कुशवाह शिवपुरी, बख्तावर सिंह गुना एवं अनिल तामडू् भोपाल विभाग के संघचालक के पद पर सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित किये गये ।<br />
इस शिविर में आठों विभाग से कुल 1308 प्रतिनिधि सम्मिलित हूए । सभी प्रतिनिधियों को सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। शिविर में क्षेत्र प्रचारक अरूण जैन एवं सह क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे । उधर,अशोक पाण्डेय का जन्म शिवपुरी जिले के कोलारस में दिनांक 02.07.1953 को हुआ था । वे 1967 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने । आपने इंटर तक की पढ़ाई कोलारस में करने के बाद एम.ए.(राजनीति विज्ञान), एल.एल.बी की शिक्षा शिवपुरी से प्राप्त की । 1968 में आपने संघ का द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया । 1972 से 1987 तक आपने शिक्षक के रूप में कार्य किया । अगस्त 1975 ये मार्च 1977 तक आप मीसाबंदी के रूप में शिवपुरी व ग्वालियर जेल में रहे । नवंबर 1988 में आपने न्यायिक सेवा के रूप में चंदेरी में अपनी सेवायें प्रारंभ की । इसके बाद आप इंदौर में स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत</p>
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		<title>पुरषों के हॉकी मैच में महिलाओं को खोजने जैसा है राहुल का बयान : मनमोहनजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Oct 2017 16:48:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[पलटवार]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के युवराज द्वारा संघ में महिलाओं की स्थिति पर दिए झूठे बयान का करारा जवाब दिया। श्री वैध ने कहा कि राहुल का बयान कुछ ऐसा है जैसे कि पुरुषों के हॉकी मैच में वे महिला खिलाड़ियों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के युवराज द्वारा संघ में महिलाओं की स्थिति पर दिए झूठे बयान का करारा जवाब दिया। श्री वैध ने कहा कि राहुल का बयान कुछ ऐसा है जैसे कि पुरुषों के हॉकी मैच में वे महिला खिलाड़ियों को खोज रहे हैं।</p>
<p>संघ के प्रचार प्रमुख ने कहा कि जो लोग राहुल गांधी को भाषण लिखकर देते हैं उनका बौद्धिक स्तर बहुत कम है।वे लोग संघ को भी नहीं जानते हैं उन्हें नहीं मालूम की संघ वर्षों से काम कर रहा है।राहुल की दादी  पिता की सत्ता थी तब भी वे संघ को बदनाम करने वाली मानसिकता सेकाम करते थे।</p>
<p>श्री वैध ने कहा कि संघ के इस विरोध की कांग्रेस को क्या उपलब्धि हासिल हुई कांग्रेस को ही नुकसान होता चला गया संघ तो लगातार आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>मनमोहनजी ने कहा कि राहुल गांधी संघ की  चिंता छोड़ दें और अपनी चिंता करें तो यह उनके लिए ज्यादा अच्छा होगा।</p>
<p>पत्रकारवार्ता में श्री वैध ने 12 अक्टूबर से यहां शुरू हो रही संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बारे में जानकारी दी।</p>
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		<title>भारत की वीरता के कारण ही चीन सहित कई पड़ोसी देशों का नहीं हो सका इस्लामीकरण:संघ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Oct 2017 16:51:07 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। इस्लाम के शासक भारत में केवल शासन करने के लिए नहीं आए थे, बल्कि वे इसके साथ आस-पड़ोस के मुल्कों का इस्लामीकरण भी करने आए थे। वे इसमें सफल हो जाते, लेकिन भारत ही है जिसने उनका रास्ता रोका। यही वजह है कि म्यांमार, कंबोडिया, तिब्बत, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, जापान व कोरिया जैसे देश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="content-block">नई दिल्ली। इस्लाम के शासक भारत में केवल शासन करने के लिए नहीं आए थे, बल्कि वे इसके साथ आस-पड़ोस के मुल्कों का इस्लामीकरण भी करने आए थे। वे इसमें सफल हो जाते, लेकिन भारत ही है जिसने उनका रास्ता रोका। यही वजह है कि म्यांमार, कंबोडिया, तिब्बत, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, जापान व कोरिया जैसे देश इस्लामीकरण से बच गए। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सर कार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल ने कही। वे गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में आयोजित सम्राट विक्रमादित्य के राज्य अभिषेक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।</div>
<div class="wl-ad"></div>
<div class="content-block">उन्होंने कहा कि जहां कोई देश बमुश्किल एक-दो साल युद्ध लड़ पाता हैं वहां भारत ने 400 वर्ष तक संघर्ष किया है, जिसमें कभी हार तो कभी जीत मिली। उन्होंने देश के इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब जीती हुई जाति पराजय का इतिहास लिखती है तो वह उसे श्रेष्ठ बताने का साहस नहीं करती। वह जानती है कि पराजित जाति की वीरता और पराक्रम का वर्णन किया तो उसमें से फिर कोई खड़ा हो जाएगा और फिर विद्रोह होगा तब फिर हार जाएंगे।</div>
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		<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी सन्देश में सरसंघचालक डॉ भागवत ने कहा पहली बार मेहसूस हुआ की दुनिया में बढ़ रही है भारत की प्रतिष्ठा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Sep 2017 04:42:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनिया के सबसे बड़े स्वंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना दिवस विजयादशमी पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय रेशिमबाग पर विजयादशमी उत्सव परंपरागत ढ़ंग से मनाया इस अवसर पर जहां सरसंघचालक मोहनजी भागवत ने शस्त्र पूजन कर अपना विजयादशमी संदेश दिया वहीं उन्होंने शास्त्र पूजन भी किया । इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दुनिया के सबसे बड़े स्वंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना दिवस विजयादशमी पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय रेशिमबाग पर विजयादशमी उत्सव परंपरागत ढ़ंग से मनाया इस अवसर पर जहां सरसंघचालक मोहनजी भागवत ने शस्त्र पूजन कर अपना विजयादशमी संदेश दिया वहीं उन्होंने शास्त्र पूजन भी किया । इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फणनवीस , लालकृष्ण आडवाणी नितिन गड़करी सहित कई विशिष्ट जन उपस्थित थे।</p>
<p>अपने विजयादशमी सन्देश में मोहनजी भागवत ने  कहा, &#8216;हमारी सुरक्षा के लिए सीमा पर जवान जान की बाजी लगाकर कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। उनको कैसी सुविधाएं मिल रही हैं। उनको साधन संपन्न बनाने के लिए हमें अपनी गति बढ़ानी पड़ेगी। शासन के अच्छे संकल्प तो हैं लेकिन इसको लागू कराना और पारदर्शिता का ध्यान रखना जरूरी है।रोहिंग्या मुसलमानो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा इन लोगों को अगर आश्रय दिया गया तो वे सुरक्षा के लिए चुनौती बनेंगे। इस देश से उनका नाता क्या है? मानवता तो ठीक है लेकिन इसके अधीन होकर कोई खुद को समाप्त तो नहीं कर सकता।&#8217;</p>
<p>वह बोले कि सीमाओं पर सुरक्षा को चुनौती देने वालों को हमने जवाब दिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें जवाब मिला है। कश्मीर में देश विरोधी ताकतों की आर्थिक रूप से कमर टूट गई है। कश्मीर घाटी में शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं जैसी चाहिए वैसी नहीं पहुंच रही है। शासन-प्रशासन और समाज के समन्वयित प्रयास से राष्ट्र के शत्रुओं से लड़ाई जारी रखते हुए सामान्य जनता को भारत की अत्मीयता का अनुभव कराना चाहिए। इस काम में अगर कुछ पुराने प्रावधान आड़े आ रहे हैं तो उनको बदलना पड़ेगा।</p>
<p>उन्‍होंने कहा कि केरल और बंगाल के समाचार किसी से छुपे नहीं हैं। वहां जिहादी और राष्ट्र विरोधी ताकतें अपना खेल कर रही हैं। शासन प्रशासन वहां का वैसा ध्यान नहीं देता है। वह भी उन्हीं का साथ देता है। राजनीति में वोटों की खुशामद करनी पड़ती है लेकिन समाज मालिक है। उस समाज को जागरूक बनाना चाहिए।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने कहा कि म्यांमार से रोहिंग्या क्यों आ गए? उनकी अलगाववादी, हिंसक गतिविधियां जिम्मेदार हैं। इन लोगों को अगर आश्रय दिया गया तो वे सुरक्षा के लिए चुनौती बनेंगे। इस देश से उनका नाता क्या है? मानवता तो ठीक है लेकिन इसके अधीन होकर कोई खुद को समाप्त तो नहीं कर सकता। हमारी सुरक्षा के लिए सीमा पर जवान जान की बाजी लगाकर कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। उनको कैसी सुविधाएं मिल रही हैं। उनको साधन संपन्न बनाने के लिए हमें अपनी गति बढ़ानी पड़ेगी।</p>
<p>उन्‍होंने कहा कि शासन के अच्छे संकल्प तो हैं लेकिन इसको लागू कराना और पारदर्शिता का ध्यान रखना जरूरी है। लोगों के लाभ के लिए अनेक योजनाएं चलीं। साहस करने में भी शासन कम नहीं है। लेकिन जो किया है उसका हो क्या रहा है, इसे समझना चाहिए। आर्थिक सुधार के लिए हम देश के लिए एक मानक सही नहीं हो सकता। देश में हर हाथ को काम मिलना चाहिए। स्वरोजगार. लघु, मध्यम और कुटीर उद्योग से सबसे ज्यादा काम मिलता है। विश्व के आर्थिक भूचालों का असर भारत पर सबसे कम हुआ। ऐसा छोटे व्यापारों की वजह से हुआ।</p>
<p>सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यक्रम को करेंगे संबोधित करते हुए कहा, &#8216;मुंबई के फुटओवर ब्रिज पर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति हम दुख प्रकट करते हैं।&#8217; आगे उन्‍होंने कहा कि हम 70 साल से स्वतंत्र हैं, फिर भी पहली बार अहसास हो रहा है कि भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। सारी दुनिया में हमारी प्रतिष्ठा ऊंची हुई है। भारत पहले भी था, हम सब भी थे लेकिन भारत को गंभीरतापूर्वक देखना और भारत में दखल देने से पहले 10 बार विचार करना। यह बातें केवल आज सामने आई हैं।</p>
<p>मोहन भागवत ने कहा, &#8216;समाज में यही चर्चा है कि ऐसा काम हो रहा है और यह भी होना चाहिए, ऐसी चर्चा कहीं नहीं है कि काम नहीं हो रहा है। सीमाओं पर सुरक्षा को चुनौती देने वालों को हमने जवाब दिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें जवाब मिला है।</p>
<p>नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ लाल कृष्‍ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पहुंचे। विजय दशमी के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की, जिसकी परंपरा काफी समय से चली आ रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव 30 को नागपुर में होगा डॉ भागवत का बौद्धिक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Sep 2017 11:59:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव देशभर में 30 सितंबर को मनाया जाएगा मुख्य समारोह का आयोजन परम्परानुसार संघ के नागपुर  स्थित मुख्यालय पर होगा। नागपुर रेशिमबाग में आयोजित इस विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का बोद्धिक होगा इस बार के विजयादशमी उत्सव की विशेषता यह है कि लीक से अलग हटकर इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव देशभर में 30 सितंबर को मनाया जाएगा मुख्य समारोह का आयोजन परम्परानुसार संघ के नागपुर  स्थित मुख्यालय पर होगा।</p>
<p>नागपुर रेशिमबाग में आयोजित इस विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का बोद्धिक होगा इस बार के विजयादशमी उत्सव की विशेषता यह है कि लीक से अलग हटकर इस समारोह में अतिथि के रूप में एक मुस्लिम को मंचासीन किया जायेगा।</p>
<p>इस समारोह में डॉ भागवत के बोद्धिक की शुरुआत 7.40 पर होगी ,पिछले कुछ वर्षों से पड़ी परंपरानुसार सरसंघचालक के विजयादशमी उत्सव का कुछ टी वी चैनलों द्वारा सीधा प्रसारण किया जाता इसे www.RSS.org/#RSSVijayaDashami पर देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 1925 मैं विजयादशमी के दिन ही डॉ केशव बलिराम हेडगेवारजी ने संघ की स्थापना की थी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव में मुस्लिम होगा मुख्य अतिथि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Sep 2017 07:35:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस साल अपने मुख्यालय नागपुर में होने वाले दशहरा पूजा में एक मुस्लिम को मुख्य अतिथि बनाया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस ने एक प्रसिद्ध होमियोपैथी चिकित्सक को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाकर पहली किसी मुस्लिम को ये सम्मान दिया है। आरएसएस दशहरा (विजयादशमी) के दिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस साल अपने मुख्यालय नागपुर में होने वाले दशहरा पूजा में एक मुस्लिम को मुख्य अतिथि बनाया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस ने एक प्रसिद्ध होमियोपैथी चिकित्सक को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाकर पहली किसी मुस्लिम को ये सम्मान दिया है। आरएसएस दशहरा (विजयादशमी) के दिन अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन ही आरएसएस की स्थापना की थी। दशहरे पर आरएसएस हर साल शस्त्र पूजा भी करता है।</p>
<p>माना जा रहा है कि आरएसएस ने बोहरा समुदाय के मुनव्वर यूसुफ को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाकर मुसलमानों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यूसुफ और उनके चाचा का आरएसएस के प्रचारकों से पुराना संबंध रहा है। रविवार (एक अक्टूबर) को संग चार अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। हर कार्यक्रम में करीब 600 बच्चे शामिल होंगे। रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इसी साल अप्रैल में बोहरा समुदाय के नेता सैयदाना मुफद्दल से उनके मुंबई स्थिति आवास पर मुलाकात की थी। सैयदाना इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार के मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ कर चुके हैं।</p>
<div class="related">
<div class="related-txt"></div>
<p>आरएसएस प्रमुख हर साल विजयादशमी उत्सव पर सभी स्वयंसेवकों को संबोधित भी करते हैं। साल 2014 में केंद्र में बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार आने के बाद मीडिया ने आरएसएस प्रमुख के दशहरा उत्सव को पहले से ज्यादा तवज्जो देना शुरू किया। कुछ चैनलों ने आरएसएस प्रमुख के दशहरा संबोधन का सीधा प्रसारण भी किया।</p>
</div>
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