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	<title>सफलता &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>मध्यप्रदेश के आयुर्वेद चिकित्सक का कमाल बिस्तर पकड़ चुके जयसूर्या को 72घण्टे में खड़ा किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Feb 2018 04:05:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनत जयसूर्या को जुन्नारदेव के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रकाश टाटा ने इलाज करके 72 घण्टे में पैरों पर खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि श्रीलंका क्रिकेट टीम पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सनत जयसूर्या ने अपने कमर एवं पैर में आई कुछ गंभीर बीमारियों के चलते बिस्तर पकड़ लिया था, यदि उनको थोड़ा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनत जयसूर्या को जुन्नारदेव के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रकाश टाटा ने इलाज करके 72 घण्टे में पैरों पर खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि श्रीलंका क्रिकेट टीम पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सनत जयसूर्या ने अपने कमर एवं पैर में आई कुछ गंभीर बीमारियों के चलते बिस्तर पकड़ लिया था, यदि उनको थोड़ा बहुत चलना भी पड़ा तो बैशाखी का सहारा लेते थे, इस बीमारी के चलते जयसूर्या ने आस्ट्रेलिया (मेलबोर्न) में न सिर्फ आपरेशन कराया अपितु श्रीलंका के कोलंबो स्थित नवलोक अस्पताल में भर्ती रहे। किन्तु इन्हे</p>
<p>जयसूर्या की इस हालत को देख भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मो. अजहरूदीन काफी दुखी हुए। एवं आयुर्वेद जड़ी बुटियों से इलाज करने वाले डॉ. टाटा से एक बार इलाज कराने की सलाह दी। अजहरूदीन की सलाह मान जयसूर्या मुम्बई आए एवं डॉ. टाटा के निवास स्थान पर गए और अपनी बीमारी से उन्हें अवगत कराया जिसके बाद डॉ. टाटा ने उनका परीक्षण किया और ठीक करने से संबंधित आश्वासन दिया।</p>
<p>डॉ टाटा भलीभांति इस बात को जानते थे, कि जयसूर्या इस बीमारी से निजात पाने आस्ट्रेलिया एवं श्रीलंका में इलाज करा चुके हैं। किन्तु उन्हें राहत नहीं मिल पाई। वैद्यराज माखन विश्वकर्मा के साथ पतालकोट के घने जंगलों में गए और एक सप्ताह वहॉ रुककर जड़ी-बूटी तलाश की एवं वहां से जड़ी-बूटी निज निवास लाकर छिंदवाड़ा में दवाईया बनाई।</p>
<p>आयुर्वेद जड़ी-बूटियों की आवश्यक दवाओं को एकत्रित कर डॉ. टाटा सहयोगीजन जय हो फाउंडेशन के अध्यक्ष तरूण तिवारी के साथ श्रीलंका रवाना हो गए। एवं श्रीलंका पहुंचने पश्चात जयसूर्या का इलाज प्रारंभ किया एवं महज 72 घण्टे का समय लिया एवं जयसूर्या को उनके पैरो पर खड़ा कर दिया।</p>
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		<title>विवेकानंद जयंती पर इसरो ने दिया देशवासियों को बड़ा तोहफा एक साथ लांच किए 31 उपग्रह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jan 2018 04:47:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सफलता]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज अंतरिक्ष में शतक लगाया है. सुबह 9.28 पर श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से इसरो अपने 100वें उपग्रह को लॉन्च किया. कार्टोसैट 2 सैटेलाइट से 710 किलो वजनी है. यह निगरानी उपग्रह है और इससे तटीय क्षेत्रों और शहरों की निगरानी के लिए इस्&#x200d;तेमाल किया जाएगा. इसमें हाईरेजुलेशन कैमरा लगा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज अंतरिक्ष में शतक लगाया है. सुबह 9.28 पर श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से इसरो अपने 100वें उपग्रह को लॉन्च किया. कार्टोसैट 2 सैटेलाइट से 710 किलो वजनी है. यह निगरानी उपग्रह है और इससे तटीय क्षेत्रों और शहरों की निगरानी के लिए इस्&#x200d;तेमाल किया जाएगा. इसमें हाईरेजुलेशन कैमरा लगा है जिससे खींची फोटो का इस्&#x200d;तेमाल किया जाएगा. चार स्&#x200d;तर पर लॉन्&#x200d;च किया जाएगा. ढाई घंटे की ये प्रक्रिया है. सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि छह अन्य देशों &#8211; कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए जा रहे हैं. आपको बता दें कि चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है.</p>
<div class="sticky">पीएसएलवी सैटेलाइट से जुड़ी 10 बातें</div>
<ol>
<li>इसरो ने एक साथ 31 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्&#x200d;च कर दिया है. PSLV C-40 अपने साथ सबसे भारी कार्टोसैट 2 सीरीज के उपग्रह के अलावा 30 दूसरी सैटलाइट अंतरिक्ष में ले जाएगा.</li>
<li>इसमें एक और एक नैनो सैटेलाइट के अलावा 28 छोटे विदेशी उपग्रह हैं.</li>
<li>पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है. इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं.</li>
<li>चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन होगा. पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके.</li>
<li>42वें मिशन के लिए इसरो भरोसेमंद कार्योपयोगी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी40 को भेजेगा जो कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों, जिनका कुल वजन करीब 613 किलोग्राम है.</li>
<li>श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से इस 44.4 मीटर लंबे रॉकेट को प्रक्षेपित किया जाएगा.</li>
<li>सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि छह अन्य देशों &#8211; कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए जा रहे हैं.</li>
<li>इसरो और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाएगा. यह 100वां उपग्रह कार्टोसेट -2 श्रृंखला का तीसरा उपग्रह होगा.</li>
<li>कुल 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।</li>
<li>चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है.</li>
</ol>
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