<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सम्पादकीय &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/tag/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Sat, 11 Apr 2026 07:18:22 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>मंत्री जी मध्यप्रदेश की जनता अब तेवर नहीं परिणाम चाहती है</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 07:18:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[गुस्सा]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्री]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=63073</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों एक नए चलन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है—कैमरे के सामने सख्ती, और कैमरे के पीछे ढिलाई। ग्वालियर में हाल ही में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह का मीडिया के सामने तीखा तेवर दिखाना इसी प्रवृत्ति का एक ताज़ा उदाहरण है। सामान्यतः शांत और शालीन माने जाने वाले [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों एक नए चलन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है—कैमरे के सामने सख्ती, और कैमरे के पीछे ढिलाई। ग्वालियर में हाल ही में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह का मीडिया के सामने तीखा तेवर दिखाना इसी प्रवृत्ति का एक ताज़ा उदाहरण है। सामान्यतः शांत और शालीन माने जाने वाले मंत्री का यह बदला हुआ अंदाज़ अचानक नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है, जहाँ प्रदर्शन ज्यादा और परिणाम कम दिखाई देते हैं।<br />
यह कोई पहला मामला नहीं है। प्रदेश में कई वरिष्ठ मंत्री वर्षों से कैमरे के सामने अधिकारियों को फटकारते, नाराज़गी जताते और सख्ती का दिखावा करते नजर आते रहे हैं। ऐसे दृश्य जनता को क्षणिक संतोष तो देते हैं—मानो कोई उनकी समस्याओं के लिए लड़ रहा हो—लेकिन असल सवाल यह है कि क्या इन दिखावटी नाराज़गियों से व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव आता है?</p>
<div class="youtube-embed" data-video_id=""><iframe title="मंत्रीजी का गुस्सा" width="563" height="1000" src="https://www.youtube.com/embed/oJq33nfN4Eo?feature=oembed&#038;enablejsapi=1" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></div>
<p>सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश की नौकरशाही पर इन ‘कैमरा-केंद्रित’ कार्रवाइयों का कोई स्थायी असर नहीं पड़ता। नौकरशाही की उदासीनता और जवाबदेही की कमी जस की तस बनी हुई है। हालात यहाँ तक पहुँच चुके हैं कि विकास कार्यों और जनसमस्याओं से जुड़े कार्यक्रमों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। अधिकारी जानते हैं कि कैमरे के सामने मिली फटकार अक्सर वहीं खत्म हो जाती है—न तो कोई ठोस कार्रवाई होती है और न ही कोई जवाबदेही तय होती है।<br />
इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। टीआरपी की दौड़ में ऐसे ‘ड्रामाई’ दृश्य प्रमुखता से दिखाए जाते हैं, जिससे वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। मंत्री का गुस्सा सुर्खियाँ बन जाता है, लेकिन जनता की समस्या जस की तस बनी रहती है।<br />
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब समस्या स्पष्ट है, तो समाधान क्यों नहीं? क्या वजह है कि प्रदेश स्तर पर सख्त नियम और जवाबदेही तय नहीं हो पा रही? क्यों मुख्यमंत्री स्तर पर नौकरशाही की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे?<br />
जरूरत इस बात की है कि दिखावे की राजनीति से आगे बढ़कर प्रणालीगत सुधार पर ध्यान दिया जाए। अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, कार्यों की नियमित समीक्षा हो और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मंत्रियों को भी यह समझना होगा कि कैमरे के सामने गुस्सा दिखाने से ज्यादा जरूरी है नीतिगत और प्रशासनिक सुधार लाना।<br />
अंततः, लोकतंत्र में जनता केवल दृश्य नहीं, परिणाम चाहती है। अगर गुस्सा सिर्फ कैमरे तक सीमित रहेगा, तो विश्वास भी धीरे-धीरे खत्म होता जाएगा। अब वक्त है कि सरकार और प्रशासन दोनों यह तय करें कि वे नौटंकी की राजनीति करेंगे या नतीजों की राजनीति।</p>
<p>कैमरे के सामने गुस्सा दिखाना आसान है, लेकिन व्यवस्था बदलना कठिन। मध्यप्रदेश की जनता अब तेवर नहीं, परिणाम चाहती है—और यही इस “फटकार राजनीति” की असली परीक्षा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जागो ग्वालियर वालों मत भूलना इन स्वार्थी नेताओं के भस्मासुरी चरित्र को</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a5%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2020 05:24:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=20253</guid>

					<description><![CDATA[सम्पादकीय ये राजनीति भी बड़ी अजीब चीज है इसमें वह सब कुछ जायज है जिसे हम और आप सोच भी नहीं सकते हैं ,राजनीति का ऐसा ही एक विद्रूप चेहरा दो दिनों से मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगर ग्वालियर की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। यह चेहरा न जनकल्याण  से जुड़ा है न जनहित से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 120px;"><strong><span style="color: #ff0000;">सम्पादकीय</span></strong></p>
<p><strong>ये राजनीति भी बड़ी अजीब चीज है इसमें वह सब कुछ जायज है जिसे हम और आप सोच भी नहीं सकते हैं ,राजनीति का ऐसा ही एक विद्रूप चेहरा दो दिनों से मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगर ग्वालियर की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। यह चेहरा न जनकल्याण  से जुड़ा है न जनहित से इसमें सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ झलक रहा है अपनी जीत और हार का। बीते दिन की बात करें तो ग्वालियर के फूलबाग चौराहे आए लेकर शास्त्री चौक तक  एक तरफ था सत्तापक्ष तो दूसरी तरफ था विपक्ष किसी को यह चिंता नहीं थी की ग्वालियर वर्तमान में कोरोना महामारी की जबरदस्त चपेट में है,यह बीमारी 100 से अधिक ग्वालियर वासियों को लील चुकी हजारों लोग इसके संक्रमण की चपेट में हैं। कोई दिन ऐसा नहीं है जब एक सैकड़ा, दो सैकड़ा या इससे भी अधिक लोग कोरोना ग्रसित न हुए हों। यह आंकड़े हमारे बनाए हुए नहीं है प्रतिदिनं कलेक्टर कार्यालय से जारी कोरोना बुलेटिन इसका प्रमाण है। चारो ओर कोरोना से त्राहिमाम जैसे हालात हैं भय का वातावरण है बाजार व्यापार बुरी तरह प्रभावित है। इस सबके बीच ग्वालियर के तमाम बाजार होडिंग बैनर झंडों से पटे पड़े थे। इन होडिंग बैनर पर कोई कोरोना जनजागृति का संदेश नहीं था न ही इसमें कोरोना से करहा रही ग्वालियर की जनता के लिए सदभावना का कोई सन्देश अंकित था। इनमें हाथ और कमल छाप नेताओं के आदमकद फोटो थे । सैकड़ों हजारो  कार्यकर्ताओं की नारेबाजी करती भीड़ थी। यह लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ में इस कदर बोराये हुए थे की उन्हें यह खयाल तक नहीं था की पहले से ही कोरोना महामारी से कराहा रहे ग्वालियर में  स्थिती और विस्फोटक हो सकती है। भगवान न करे ऐसा हो लेकिन जो विशेषज्ञ कोरोना महामारी को जानते समझते हैं आज उनके माथे पर पसीने के साथ चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। उनका कहना है की शहर की सड़कों पर इस राजनीतिक भीड़ ने ग्वालियर में कोरोना वायरस की फैलती चैन को और मजबूत कर दिया है और आने वाले समय में ग्वालियर वासियों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। आखिर कांग्रेस हो या भाजपा इनके नेताओं को यह बात समझ क्यों नहीं आ रही की जान है तो जहान है । होना तो यह चाहिए था की मध्यप्रदेश में समस्त राजनीतिक दल एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर जनहित में चुनाव आयोग से इस बात का आग्रह करते की कोरोना संकटकाल के दृष्टिगत या तो उपचुनाव टाल दिए जाएं या फिर चुनाव आयोग किसी भी प्रकार के भीड़ भरे चुनावी आयोजनों पर रोक लगाने सम्बन्धी आदेश जारी करे। बड़ा सवाल है जब देश में सारे जरूरी कार्य ऑन लाइन हो सकते हैं तो चुनाव क्यों नहीं ? चुनाव सुधार की बड़ी बड़ी बातें हमारे नेतागण करते हैं क्या वर्तमान इन चुनाव सुधारों को यतार्थ में धरातल पर लाने का सबसे अच्छा समय नहीं है  ? आखिर इसकी पहल क्यों नहीं की जा रही  ?  क्यों कमलनाथ और शिवराज अथवा महाराज आगे आकर इस संकटकाल में शांतिपूर्ण चुनाव का सामूहिक निर्णय नहीं लेते बड़े दुख की बात है महामारी के इस दौर में चुनाव को सड़कों पर लाकर सोशल डिस्टनसिंग की धज्जियां उड़ाने का काम सबसे पहले सत्ताधारी दल न किया और चन्द घण्टों में ही इसका अनुसरण करने विपक्षी भी सड़कों पर आ कूदे । साफ है दर्द और बीमारी के संकट से कराहा रही जनता की न उन्हें परवाह है न इन्हें कल और आज भी शहर की सड़कों पर राजनीति करने वालों का यही बेशर्म चेहरा कभी नारे लगाते तो कभी झंडे लगाते तो कभी भीड़ के झुंड के बीच पत्रकारों से बतियाते दिखाई दे रहा है। आखिर भगवान कब इन्हें सद्बुद्धि देगा ?</strong><br />
<strong>आश्चर्य की बात है इस विषय पर राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं तो दूसरी ओर चुनाव आयोग भी मुंह में गुड़ दबाये बैठा है।</strong></p>
<p><strong>यहां बताना उपयुक्त होगा की मध्यप्रदेश में 29 सीटों पर उपचुनाव होना है। सिर्फ ग्वालियर-चंबल संभाग में ही 16 सीट हैं। ऐसे में सिंधिया के गढ़ में उपचुनाव को लेकर सियासत भी गर्म है। यहां पोस्टर पॉलिटिक्स भी चरम पर है। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे के खिलाफ पोस्टर लगा रहे हैं। शुक्रवार को कमलनाथ के विरोध में भाजपा नेता सड़कों पर दिखे, तो इससे पहले कांग्रेस से भाजपा में गए मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता नारे लगाते हुए नजर आए थे। तब मंत्री और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हाथापायी तक हो गई थी।</strong></p>
<p><strong>कमलनाथ के 7 किलोमीटर लंबे रोड शो में भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन के सभी नियम टूट गए। हजारों की भीड़ बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के कमलनाथ के स्वागत में सड़कों पर दिखी। इसे ग्वालियर में कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। रोड शो के बाद कमलनाथ ग्वालियर में महारानी लक्ष्मी बाई की समाधि पर गए और श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद पार्टी नेताओं के साथ मुलाकात की। बता दें कि ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उपचुनाव के लिए पार्टी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। कमलनाथ का शक्ति प्रदर्शन ग्वालियर में शनिवार को भी जारी है दूसरी कोरोना की मारी ग्वालियर की जनता बेचारी है।</strong></p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">dubeypraveen8152@gmail.com</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">9425187667</span></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8221; माल न राखे आपनो चोरन गाली दे&#8221;</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Mar 2020 06:13:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=16784</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे मध्यप्रदेश के वर्तमान सियासी घटनाक्रम पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है यह कहावत कुछ इस प्रकार है &#8221; माल न राखे आपनो चोरन गाली दे&#8221; पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भाजपा पर कांग्रेस के विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर खासे हमलावर हैं। उन्होंने भाजपा के कुछ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 120px;"><strong><span style="color: #000000;"><span style="color: #0000ff;">प्रवीण दुबे</span></span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;"> मध्यप्रदेश के वर्तमान सियासी घटनाक्रम पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है यह कहावत कुछ इस प्रकार है</span><span style="color: #000000;"><span style="color: #ff0000;"> &#8221; माल न राखे आपनो चोरन गाली दे&#8221;</span></span><span style="color: #000000;"> पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भाजपा पर कांग्रेस के विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर खासे हमलावर हैं। उन्होंने भाजपा के कुछ प्रदेश स्तरीय नेताओं पर कांग्रेस विधायकों को करोड़ों का ऑफर दिए जाने का आरोप लगाया है। हालात यहां तक जा पहुंचे हैं की दिग्विजयसिंह ,उनके पुत्र राजवर्धन सिंह व कुछ निकट सहयोगियों को पूरी रात भोपाल से लेकर दिल्ली व हरियाणा के होटलों की निगरानी करना पड़ रही है। निःसन्देह यह कांग्रेस के लिए चिन्ता का विषय है। लेकिन इस खरीद फरोख्त के लिए सीधे भाजपा को दोषी ठहराना आखिर कहां तक उचित है ? कांग्रेस विधायकों का भाजपा नेताओं के सम्पर्क में आना फिर सौदेबाजी की डील पर चर्चा और हरियाणा के होटल में भाजपा नेताओं के साथ एकत्रित होना क्या कांग्रेस के भीतर फूट को उजागर नहीं करता है ? क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता की कांग्रेस के अपने विधायक कहीं न कहीं प्रदेश सरकार के अंकुश से बाहर होकर बेलगाम हो चले है और इसका फायदा ताक में बैठी भाजपा उठा रही है। कितनी हास्यास्पद बात है की दिग्विजयसिंह भाजपा पर कांग्रेस विधायकों को बंधक बनाने का आरोप लगा रहे हैं यदि यह बात सही है तो वे इसके खिलाफ कानून का सहारा क्यों नही लेते,पुलिस से सहायता की गुहार क्यों नहीं लगाते ? इसको लेकर उनके भीतर हिचकिचाहट है क्यों की वे भली प्रकार जानते है की कांग्रेस के भीतर ही ढोल में पोल है। सबसे बड़ा सवाल है की यदि कांग्रेस के दस से लेकर चौदह विधायक भाजपा के सम्पर्क में हैं और वह डील के लिए प्रदेश के बाहर एक होटल तक जा पहुंचे हैं तो कब तक दिग्विजयसिंह जैसे नेता इनकी चौकीदारी करेंगे ? यदि इन विधायकों के मन में  पाप है तो आज नहीं तो कल यह भाजपा के साथ खड़े नजर आएंगे कई प्रदेशो में ऐसा देखने को भी मिला है और कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। अतः सबसे बड़ी जरूरत अपना घर सुधारने की है। यहां कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की वर्तमान समय में कांग्रेस के भीतर सर्वाधिक गुटबाजी कहीं दिखाई देती है तो वह मध्यप्रदेश में ही है। सर्वविदित है की मध्यप्रदेश में कांग्रेस तीन बड़े नेताओं दिग्विजयसिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमों में बंटी हुई है। प्रदेश के सभी विधायक भी इसी खेमेबंदी का शिकार हैं।  इन हालातों में एक गुट दूसरे को कमजोर करने में  जुटा दिखाई देता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा बड़ा नेता अपनी अनदेखी से नाराज है चर्चा तो यहां तक है की श्री सिंधिया अपने पिता की तर्ज पर अलग राजनीतिक दल बनाने की तैयारी में हैं, इसी प्रकार अर्जुनसिंह के बेटे राहुल सिंह,केपी सिंह जैसे कई नेता नाराज हैं। इन परिस्थितियों में भाजपा के लिए जोड़तोड़ का उपयुक्त माहौल है। इसके लिए सबसे पहले कांग्रेस को अपने घर के वातावरण को सुधारने की आवश्यकता है न की भाजपा पर तंज कसने की।</span></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>युवा तुर्क वीडी शर्मा की नियुक्ति करके भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने दिए कई संकेत,बढेगा चम्बल का दबदबा</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Feb 2020 16:52:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=16487</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे थोड़े से अंतर से मध्यप्रदेश से सत्ताच्युत हुई भाजपा ने युवा नेता वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देकर देर ही से सही लेकिन सही निर्णय लिया है। साथ ही यह संकेत भी दे दिए हैं की पार्टी अपनी पुरानी संघर्ष वाली राजनीति की ओर वापस लौट रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 120px;"><strong><span style="color: #0000ff;">प्रवीण दुबे</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">थोड़े से अंतर से मध्यप्रदेश से सत्ताच्युत हुई भाजपा ने युवा नेता वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देकर देर ही से सही लेकिन सही निर्णय लिया है। साथ ही यह संकेत भी दे दिए हैं की पार्टी अपनी पुरानी संघर्ष वाली राजनीति की ओर वापस लौट रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश की कमान एक ऐसे युवा चेहरे को सौंप दी है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व से न केवल युवा जोश झलकता है बल्कि उसके भीतर विपरीत परिस्थितियों में भी सँगठनात्मकता को जीवंत रखकर कार्य करने का कौशल विधमान है। यहां यह लिखने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की मध्यप्रदेश के तमाम बड़े नेताओं के बीच वर्तमान अध्यक्ष राकेश सिंह की दब्बू छवि के कारण भाजपा को कई बड़े नुकसान उठाने पड़े। यही वजह रही की प्रदेश में पार्टी की संगठनात्मक पकड़ ढीली पड़ती चली गई और व्यक्तिनिष्ठा ने जमकर पेर पसार लिए।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">ऐसे समय में पार्टी को जहां संगठन की रीतियों नीतियों को समझने वाले चेहरे की जरूरत थी वहीं सुस्त पड़े कार्यकर्ताओं में  जोश भरने वाले नेता की भी दरकार थी। पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर परेशान था की 15 वर्षों के सत्तासुख ने नेताओं, कार्यकर्ताओं दोनों ही में विपक्ष की भूमिका का संघर्ष समाप्त कर दिया उनमें नई ऊर्जा का संचार कैसे किया जाए<span style="line-height: 1.5;">। इस माहौल में वी डी शर्मा जैसे चेहरे को सामने लाकर पार्टी नेतृत्व ने परिवर्तन का संकेत दिया है। </span></span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">वी डी शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर राजनीति में आए हैं। वे लंबे समय तक एबीवीपी के भीतर मजबूत शशक्त संगठनात्मक चेहरा रहे हैं और समय समय पर कई विषयों को लेकर प्रदेश स्तर पर संघर्ष भी किया है। उनकी इसी जुझारू प्रकृति के मद्देनजर उन्हें खजुराहो जैसे अपरचित संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया गया और वे संगठन की उम्मीदों पर खरे उतरे। उन्होंने पार्टी महासचिव के पद पर रहते हुए भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #000000;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की वीडी शर्मा प्रदेश के जिस ग्वालियर चम्बल अंचल से आते हैं वहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था । पार्टी को यहां 34 में से कुल 6  सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। अतः अब इसी अंचल के मुरैना जिले में पैदा हुए व ग्वालियर से शिक्षा प्राप्त करने वाले तेजतर्रार युवा चेहरे का पार्टी में  वर्चस्व बढ़ने से इस अंचल में निश्चित ही भाजपा का दबदबा बढ़ेगा । इसके साथ ही एक सशक्त ब्राह्मण चेहरे की कमी भी पूरी हुई है।</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
