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	<title>सुप्रीम कोर्ट &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>यूजीसी विवादित नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार चीफ जस्टिस ने कहा हमें पता है कि क्या हो रहा है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 15:05:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[यूजीसी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 28 जनवरी 2026/ सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल में अधिसूचित एक नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत में नए नियम के संदर्भ यह दलील दी गई है कि यह नियम में जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है। इसके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली 28 जनवरी 2026/</strong> सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल में अधिसूचित एक नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत में नए नियम के संदर्भ यह दलील दी गई है कि यह नियम में जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है। इसके साथ ही कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करने वाले वकील की दलीलों पर गौर किया।</p>
<p>याचिका को लेकर वकील ने कहा कि यूजीसी की तरफ से अधिसूचित किए गए नए नियम से सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है। मेरा मुकदमा &#8216;राहुल दीवान एवं अन्य बनाम भारत सरकार&#8217; है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर कर दी जाएं। हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव तक सीमित कर दिया गया है। इन नियमों के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां छात्र समूह और संगठन इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।</p>
<h3>क्या है यूजीसी का नया नियम?</h3>
<p>यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन, 2026 को 13 जनवरी को नोटिफाई किया गया था। साथ ही, यह भारत के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होता है। इसका उद्देश्य केवल धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति, या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है।</p>
<p>खासकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विकलांग व्यक्तियों, या उनमें से किसी के भी सदस्यों के खिलाफ, और उच्च शिक्षा संस्थानों में हितधारकों के बीच पूरी समानता और समावेशन को बढ़ावा देना है। नए नियम के तहत इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।</p>
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		<title>रमज़ान में चुनाव: SC ने EC से कहा, वोटिंग सुबह  5 बजे से शुरू कराने पर करें विचार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 May 2019 08:31:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: रमजान के दौरान मतदान की शुरुआत सुबह 7 बजे की जगह 5 बजे से करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से कोई आदेश न देते हुए चुनाव आयोग को इसपर फैसला लेने को कहा है. SC ने सुनवाई करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग याचिकाकर्ता की बात सुने और इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="border: 0px; margin: 0px 0px 10px; padding: 0px; vertical-align: baseline; color: #1a1a1a; font-family: 'Noto Serif', serif; letter-spacing: 0.479999989271164px; widows: auto;"><strong style="border: 0px; margin: 0px; padding: 0px; vertical-align: baseline;">नई दिल्ली:</strong> रमजान के दौरान मतदान की शुरुआत सुबह 7 बजे की जगह 5 बजे से करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से कोई आदेश न देते हुए चुनाव आयोग को इसपर फैसला लेने को कहा है. SC ने सुनवाई करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग याचिकाकर्ता की बात सुने और इस पर विचार करे कि क्या आने वाले चरणों में मतदान का समय बदला जा सकता है?</p>
<p style="border: 0px; margin: 0px 0px 10px; padding: 0px; vertical-align: baseline; color: #1a1a1a; font-family: 'Noto Serif', serif; letter-spacing: 0.479999989271164px; widows: auto;">बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव 7 चरणों में हो रहे हैं. पहले चार चरण हो चुके हैं और पांचवें चरण का मतदान 6 मई को है. रमजान 5 मई से शुरू हो रहा हैं. इससे पहले रमजान के महीने में मतदान को लेकर कई धार्मिक गुरुओं ने आपत्ति जताई थी. रमजान के कारण इन्होंने कम वोटिंग का आशंका जताई थी.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>अयोध्या में गैर विवादित भूमि पर पूजा की इजाजत पर सुप्रीम कोर्ट हुआ नाराज ,याचिका की खारिज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Apr 2019 19:17:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में गैरविवादित अधिग्रहीत भूमि पर स्थिति मंदिर में पूजा की इजाजत मांगने वाली याचिका शुक्रवार को नाराजगी के साथ खारिज करते हुए याचिकाकर्ता से कहा &#8216;तुम इस देश को शांति ने नहीं रहने देना चाहते। हमेशा कोई न कोई कुरेदने चला आता है। जबकि मध्यस्थता प्रक्रिया चल रही है।&#8217; इतना ही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #404040; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; font-size: 18px; line-height: 30px; widows: auto;">सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में गैरविवादित अधिग्रहीत भूमि पर स्थिति मंदिर में पूजा की इजाजत मांगने वाली याचिका शुक्रवार को नाराजगी के साथ खारिज करते हुए याचिकाकर्ता से कहा &#8216;तुम इस देश को शांति ने नहीं रहने देना चाहते। हमेशा कोई न कोई कुरेदने चला आता है। जबकि मध्यस्थता प्रक्रिया चल रही है।&#8217; इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता पर लगाया गया पांच लाख रुपये का जुर्माना भी हटाने से इंकार कर दिया</span></p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">हालांकि बताते चलें कि इस याचिका और मामले का अयोध्या राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुख्य मुकदमे से कोई लेना-देना नहीं है। मुख्य मामले में कोर्ट ने तीन मध्यस्थों की कमेटी बनाई है जो आजकल पक्षकारों के बीच बातचीत के जरिये सहमति और सुलह से विवाद सुलझाने का प्रयास कर रही है। मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने कुल 14 अपीलें लंबित हैं जिनमें राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिलहाल मामले में यथास्थिति कायम है।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">शुक्रवार को उपरोक्त टिप्पणियां मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और संजीव खन्ना की पीठ ने पंडित अमरनाथ मिश्रा की याचिका खारिज करते हुए कीं। अमरनाथ मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के गत 10 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने गैरविवादित भूमि पर स्थित मंदिर में पूजा करने की मांग वाली उनकी याचिका पांच लाख के जुर्माने के साथ खारिज कर दी थी।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">अमरनाथ मिश्रा की याचिका शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट मे सुनवाई के लिए लगी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वीके बिजू ने अयोध्या में गैरविवादित अधिग्रहीत जमीन पर स्थित मंदिर में पूजा करने की इजाजत मांगते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने मामले में कई मुस्लिम संगठनों से मिल कर बातचीत की है और बहुत से संगठनों ने अपने सहमति पत्र देकर कहा है कि उन्हें अधिग्रहीत गैरविवादित जगह पर स्थित मंदिरों से कोई लेना-देना नहीं है और वे वहां पूजा कर सकते हैं।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">बीजू ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका और उसमें दिए गए आधारों को देखे बगैर शुरुआत में ही याचिका खारिज कर दी और पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया जो कि ठीक नहीं है। इन दलीलों पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप इस देश को शांति से नहीं रहने देना चाहते।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">हमेशा कोई न कोई कुरेदने चला आता है जबकि मध्यस्थता प्रक्रिया चल रही है। वकील बीजू ने कहा कि उनका मुवक्किल पिछले एक दशक से ज्यादा समय से मुद्दे को बातचीत और सहमति से सुलझाने का प्रयास कर रहा है। अगर कोर्ट उन्हें मौका दे तो उन्हें विश्वास है कि वे विभिन्न संगठनों और वर्गो आदि को सहमति बनाने के लिए राजी कर लेंगे। लेकिन, कोर्ट इन सब दलीलों से प्रभावित नहीं हुआ और उसने याचिका खारिज कर दी। साथ ही वकील की जुर्माना हटाने की मांग भी ठुकरा दी।</p>
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