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	<title>हनुमानजी &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>रुद्रावतार हनुमानजी की जयंती पर जानिए उन्हें प्रसन्न करने के उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Apr 2019 01:06:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[हनुमानजी]]></category>
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					<description><![CDATA[शास्त्रों के अनुसार कलयुग के जीवित देवता में एक हनुमान जी भी है। इसलिए रामायण में राम के अनुचर से लेकर महाभारत में अर्जुन के रथ पर विराजे हनुमान का उदाहरण दिया जाता है। हनुमान जी को सबसे जल्दी प्रसन्ना होने वाले देवताओं में गिना जाता है। ठीक यही बात भगवान शिव के लिए भी कही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;"><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: 0px;">शास्त्रों </strong>के अनुसार कलयुग के जीवित देवता में एक हनुमान जी भी है। इसलिए रामायण में राम के अनुचर से लेकर महाभारत में अर्जुन के रथ पर विराजे हनुमान का उदाहरण दिया जाता है। हनुमान जी को सबसे जल्दी प्रसन्ना होने वाले देवताओं में गिना जाता है। ठीक यही बात भगवान शिव के लिए भी कही जाती है। हनुमान भगवान शिव के 11वें अवतार कहे जाते हैं। वे परम रामभक्त हैं।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमानजी का जन्मदिन साल में दो बार मनाया जाता है। हनुमान जी का पहला जन्मदिन चैत्र पूर्णिमा को और दूसरा कार्तिक माह की चौदस को मनाया जाता है। इस बार 19 अप्रैल को भगवान हनुमान का जन्मदिन मनाया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक, भगवान हनुमान की पूजा करने पर राहु और शनिदोष की पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;"><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: 0px;">पौराणिक कथा</strong></p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी की माता अंजना एक अप्सरा थीं, उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और इस श्राप से उनकी मुक्ति तभी होती जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमान जी के पिता थे। वे सुमेरू राज्य के राजा थे और बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">एक कथा के अनुसार एक बार उन्हें बड़ी जोर की भूख लगी हुई थी इसलिए वे आकाश में उछले और सूर्य को फल समझ खाने की ओर दौड़े उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमान जी को देखकर उन्होंने इसे दूसरा राहु समझ लिया। तभी इंद्र ने पवनपुत्र पर वज्र से प्रहार किया जिससे उनकी ठोड़ी पर चोट लगी व उसमें टेढ़ापन आ गया इसी कारण उनका नाम भी हनुमान पड़ा।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;"><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: 0px;">हनुमान जी की पूजा में सिन्दूर एवं तेल का महत्व</strong></p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">हनुमानजी की पूजा में सिंदूर और तेल का खासा महत्व है। इस संबंध में एक कथा कथा है कि एक बार माता सीता को हनुमान जी ने सिन्दूर लगाते देखा तो पूछ बैठे &#8211; माता ये क्या लगा रही हैं? सीता ने बताया कि &#8211; सिंदूर लगाने से श्री राम प्रसन्न होते हैं इसलिए लगा रही हूं।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">तब अपने प्रभु श्री राम को प्रसन्ना करने के लिए हनुमान ने अपने पूरे शरीर में सिन्दूर लगा लिया। इसी प्रकार तेल की भी छोटी सी घटना हैं एक बार शनिदेव गन्धमादन पर्वत की तरफ से गुजरे. हनुमान की ध्यानमग्नता को देख कर उन्हें हनुमान से इर्ष्या होने लगी।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">शनि का अकारण अहंकार जागा और उन्होंने सोचा नियमानुसार मैं इस वानर के राशि पर आ ही गया हूं। अब दो-चार पटकनी देकर इसकी दुर्दशा का आनन्द भी हाथों-हाथ ले लूं। उन्होंने पवनपुत्र को ललकारा .हनुमान का ध्यान टूटा।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">हनुमान ने अपने सामने उपस्थित शनिदेव को पहचान कर उन्हें नमस्कार करते हुए विनित स्वर में कहा &#8211; मैं अपने प्रभु श्री राम के ध्यान में लीन हूं, कृपा कर मुझे अपनी अर्चना करने दीजिये।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">शनि ने उन्हें कहा &#8211; वानरराज मैंने देव-दानव और मनुष्य लोक में हर जगह तुम्हारी प्रशंसा सुनी है। अत: यह कायरता छोड़ निडर होकर मुझसे युद्ध करो। मेरी भुजाएं तुम्हारे बल का परिमापन करने के लिए फड़फड़ा रही हैं। मैं तुम्हें युद्ध के लिए ललकार रहा हूं।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">शनि की घृष्टता देखकर, हनुमान ने अपनी पूंछ बढ़ाई और उसमे शनि को बुरी तरह लपेट लिया, ऐसा कसा कि शनि बेबस, असहाय होकर छटपटाने लगे, इतने में रामसेतु की परिक्रमा का समय हो गया, हनुमान जी तेजी से दौड़ते हुए परिक्रमा करने लगे।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">पूंछ से बंधे शनि पत्थरों, शिलाखंडों, बड़े-बड़े विशाल वृक्षों से टकराकर लहूलुहान हो गये। व्यथित हो कर पीड़ा से दु:खी शनि पवनपुत्र से बन्धन मुक्त करने की प्रार्थना करने लगे तो हनुमान ने शनि से वचन लिया कि श्री राम की भक्ति में लीन मेरे भक्त को तुम कभी तंग नही करोगे। असह्य वेदना से शनि का अंग-अंग पीड़ित था।</p>
<p style="padding: 0px 0px 5px; margin: 0px; outline: 0px; color: #404040; line-height: 28px; font-family: Arial, sans-serif; text-align: justify; widows: auto;">छटपटाते शनि ने हनुमान से तेल मांगा उस दिन मंगलवार था। अत: मंगलवार के दिन जो हनुमान जी को तेल चढ़ाता है वो सीधे शनि को मिलता हैं और शनि प्रसन्ना हो कर भक्त को आशीर्वाद देते है। इस प्रकार तेल और सिन्दूर को मिला कर हनुमान जी को लगाया जाता हैं।</p>
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		<title>असफलताओं व निराशा के अंधेरों से बचाती है संकट मोचन हनुमानजी की भक्ति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Apr 2019 00:59:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[हनुमानजी]]></category>
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					<description><![CDATA[रामभक्त हनुमान जितना अपनी पूजा से प्रसन्न नहीं होते उससे कहीं अधिक प्रभु श्रीराम की पूजा से प्रसन्न होते हैं. मंगलवार को हनुमान चालिसा का पाठ सुबह और शाम दोनों समय करना चाहिए. इसके साथ ही बजरंग बाण और राम स्तूति से मनुमान की विशेष कृपा होती है. जो मनुष्&#x200d;य शुद्ध मन से मंगलवार को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: rgba(0, 0, 0, 0.870588); font-family: 'Vesper Libre', serif; font-size: 18px; line-height: 28.7999992370605px; text-align: justify; widows: auto;">रामभक्त हनुमान जितना अपनी पूजा से प्रसन्न नहीं होते उससे कहीं अधिक प्रभु श्रीराम की पूजा से प्रसन्न होते हैं. मंगलवार को हनुमान चालिसा का पाठ सुबह और शाम दोनों समय करना चाहिए. इसके साथ ही बजरंग बाण और राम स्तूति से मनुमान की विशेष कृपा होती है. जो मनुष्&#x200d;य शुद्ध मन से मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करता है उसके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं. श्रीराम के 108 नामों के जाप से भी श्री हनुमान प्रसन्न होते हैं और मनवांक्षित फल प्रदान करते हैं. हनुमानजी शिव के अवतार हैं और शनिदेव परम शिव भक्त और सेवक हैं. इसलिए सोमवार-पूर्णिमा पर शनि दशा या अन्य ग्रहदोष से आ रही कई परेशानियों और बाधाओं को दूर करने के लिए श्रीहनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान अष्टक का पाठ करें. श्रीहनुमान की गुण, शक्तियों की महिमा से भरे मंगलकारी सुन्दरकाण्ड का परिजनों या इष्टमित्रों के साथ शिवालय में पाठ करें. यह भी संभव न हो तो शिव मंदिर में हनुमान मंत्र &#8216;हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्&#8217; का रुद्राक्ष माला से जप करें या फिर सिंदूर चढ़े दक्षिणामुखी या पंचमुखी हनुमान के दर्शन कर चरणों में नारियल चढ़ाकर उनके चरणों का सिंदूर मस्तक पर लगाएं। इससे ग्रहपीड़ा या शनिपीड़ा का अंत होता है. हनुमानजी की भक्ति नयी उमंग, उत्साह, ऊर्जा व आशाओं के साथ असफलताओं व निराशा के अंधेरों से निकल नये लक्ष्यों और सफलता की ओर बढऩे की प्रेरणा देती है. लक्ष्यों को भेदने के लिए इस दिन अगर शास्त्रों में बताए श्रीहनुमान चरित्र के अलग-अलग 12 स्वरूपों का ध्यान एक खास मंत्र स्तुति से किया जाए तो आने वाला वक्त बहुत ही शुभ व मंगलकारी साबित हो सकता है. इसे सोमवार-पूर्णिमा के अलावा हर रोज भी सुबह या रात को सोने से पहले स्मरण करना न चूकें  हनुमानञ्जनी सूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।  रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिङ्गाक्षोमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।। एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:। स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।। तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।।  हनुमानजी की पूजा के लिए कुछ नियम और कार्य जब कोई भक्त हनुमानजी को सच्चे मन से समर्पित होकर याद करता है तब आसानी से हनुमानजी उस पर प्रसन्न हो जाते हैं. परंतु यह जानना आवश्&#x200d;यक है कि हनुमानजी के पूजन के लिए किन नियमों का पालन करने से ज्यादा फल मिलता है. हनुमान जी राम के परम भक्त है और खुद वानर है अत: प्रभु राम की भक्ति और वानरों को गुड चन्ने और केले का प्रसाद खिलाना हनुमान जी को खुश करने का अचूक उपाय है. इसके अलावा हनुमान जी को सिंदूर लगाना भी सबसे प्रिय पूजा माना जाता है. हनुमान जी अपने मां पिता के बड़े लाडले थे अत: मां अंजना और पिता केसरी के जयकारे से भी हनुमान अति शीघ्र  प्रसन्न होते हैं.  हर दिन भगवान श्री हनुमान की मूर्ति या तश्वीर या हो सके तो मंदिर में जा कर दर्शन करें.  सुबह जगने के बाद और रात्रि में सोने से पहले हनुमान चालीसा या हनुमान मंत्र का जाप करें.  दिन में कम से कम एक बार हनुमान चालीसा पूर्ण ध्यान और समझते हुए पढ़े.  यदि हो सके तो पूर्ण रूप से मांसारी खाना और मादक पेय त्याग दें.  हनुमान भक्त को श्री राम और मां जानकी की भी पूजा करनी चाहिए.  हो सके तो मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का व्रत करना चाहिए.  हर मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर में बालाजी की लाल मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाना चाहिए उसके बाद जनेऊ पहनानी चाहिए फिर उन्हें गुड चन्ना या केले का प्रसाद चढ़ा कर हो सके तो वानरों को यह प्रसाद खिलाना चाहिए. </span></p>
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