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	<title>होली सिंथेटिक रंग &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>जरा संभलकर! सिंथेटिक रंगों की होली से बढ़ेगा बीमारियों का खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 05:01:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
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		<category><![CDATA[होली सिंथेटिक रंग]]></category>
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					<description><![CDATA[नेत्र संक्रमण, स्किन एलर्जी, सांस व पेट के हो सकते हैं रोग,बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर                             धीरेंद्र उपाध्याय  &#160; देशभर में होली का उत्साह हर साल की तरह इस बार भी है, लेकिन रंगों के इस त्योहार के साथ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नेत्र संक्रमण, स्किन एलर्जी, सांस व पेट के हो सकते हैं रोग,</strong><strong>बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर</strong></p>
<p><strong>                          </strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>  धीरेंद्र उपाध्याय </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>देशभर में होली का उत्साह हर साल की तरह इस बार भी है, लेकिन रंगों के इस त्योहार के साथ सेहत पर मंडराते खतरे को लेकर डॉक्टरों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में बिकने वाले कई सिंथेटिक और रासायनिक रंगों में ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इन रंगों के संपर्क में आने से नेत्र संक्रमण, कॉर्निया को नुकसान, स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं सूखे रंगों से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ होने का खतरा भी बढ़ जाता है। कई मामलों में दूषित रंग या पानी पेट में जाने से उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों पर इन रासायनिक रंगों का असर सबसे ज्यादा पड़ता है इसलिए होली खेलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।<br />
होली का त्योहार रंगों और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। लेकिन बाजार में उपलब्ध सिंथेटिक रंगों के बढ़ते इस्तेमाल ने इस उत्सव को जोखिम भरा बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रासायनिक रंग त्वचा, आंखों, बालों और सांस संबंधी कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, होली में सबसे अधिक नुकसान आंखों को होता है। डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की कॉर्निया व मोतियाबिंद विशेषज्ञ डॉ. मीनल कान्हेरे बताती हैं कि बाजार में बिक रहे कई रंगों में सीसा, क्रोमियम और अन्य हानिकारक रसायन पाए जाते हैं। ये रंग आंखों में चले जाने पर जलन, एलर्जी और संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कॉर्निया को खतरा भी बना रहता है।<br />
<strong>ये हो सकती हैं समस्याएं</strong><br />
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलाकर जावले के मुताबिक, इन रंगों से त्वचा में रूखापन, खुजली, जलन और लाल चकते जैसी समस्याएं हो सकती हैं, वहीं केमिकल रंग बालों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल सिंघल ने कहा कि सूखे रंग सांस के साथ अंदर जाने पर श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। खासकर अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और खतरनाक हो सकती है। ब्रोंकाइटिस, सांस लेने में तकलीफ और गले में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा दूषित पानी या रंगों के शरीर में चले जाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।</p>
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