<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>होली &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/tag/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Mon, 09 Mar 2020 04:36:25 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.2</generator>
	<item>
		<title>आइये होली पर लें हिरण्यकश्यप होलिका रूपी आताताई शक्तियों के सर्वनाश का संकल्प</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%86%e0%a4%87%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%b6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Mar 2020 04:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=16867</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे भारत विवधताओं से भरा देश है इसी का एक महत्वपूर्ण अंग हैं हमारे त्यौहार यह हमारी एकता अखण्डता के साथ युगों युगों से चली आ रही परम्पराओं को भी जीवंत रखते है। होली भी ऐसे ही उमंग उत्साह और रंगों से सराबोर हमारी संस्कृति का परिचायक है। यह प्रतीक भी है राक्षसी प्रवृत्तियों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 120px;"><strong>प्रवीण दुबे</strong></p>
<p><strong>भारत विवधताओं से भरा देश है इसी का एक महत्वपूर्ण अंग हैं हमारे त्यौहार यह हमारी एकता अखण्डता के साथ युगों युगों से चली आ रही परम्पराओं को भी जीवंत रखते है। होली भी ऐसे ही उमंग उत्साह और रंगों से सराबोर हमारी संस्कृति का परिचायक है। यह प्रतीक भी है राक्षसी प्रवृत्तियों के नाश का समाज में जब हिरण्यकश्यप और होलिका रूपी शक्तियां सज्जन प्राणियों के लिए समस्या बन जाती हैं तो समाज में शांति के लिए उनकी समाप्ति ही एकमात्र रास्ता है। भगवान नारायण तक को आताताई हिरण्यकश्यप से प्रहलाद की रक्षा हेतु उसे समाप्त करना ही पड़ा था। आज हम भारत समेत पूरी दुनिया पर नजर दौड़ाते हैं तो दिखाई देता है की सज्जन शक्तियां किस प्रकार आतंकवाद से परेशान हैं, आतंकवाद रूपी असुर विश्वभर में अशांति, मारकाट और वैमनस्यता फैला रहा है। ऐसे समय में होली जैसे त्यौहार पर सभी को आतंकवाद रूपी हिरण्यकश्यप की समाप्ति के संकल्प लेने की जरूरत है। होली  अथवा कोई भी त्यौहार या उमंग का अवसर क्यो न हो समाज को यह बात भी हमेशा ध्यान रखने की जरूरत है की इससे पर्यावरण कोई नुकसान न पहुंचे। होली के उमंग में समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग हरे भरे पेडों को काटकर होलिका दहन करता है। यह पर्यावरण की दृष्टि से कतई सही नहीं ठहराया जा सकता है। सर्वविदित है की पर्यावरण संरक्षण में हरे भरे वृक्षों की विशेष भूमिका होती है। अतः होलिका दहन के समय हरेभरे वृक्षों की जगह गोबर के कण्डों व अन्य सामग्री का उपयोग करें जिससे हमारे पर्यावरण के सजग प्रहरी ये पेड़ बचे रहें। होली की मस्ती में किसी दूसरे को को कोई नुकसान न पहुंचे इसका भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रंग जरूर खेलें क्योंकि होली की पहचान रंगों से ही है लेकिन मर्यादा का सदैव स्मरण रहे। समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग सूखी होली खेलने का अभियान चलाता रहा है ,ऐसे ही लोग दिवाली पर पटाखे नहीं फोड़ने, नागपंचमी व दशहरे जैसे त्योहारों पर जीवों की पूजा न करने,शिवरात्रि पर भोलेनाथ पर दुग्ध अर्पित न करने जैसे अभियान भी जोरशोर से चलाते हैं। निःसंदेह प्रकृति, पर्यावरण व जीव जंतुओं की रक्षा पूरे समाज का उत्तरदायित्व है लेकिन केवल हिंदुओं के त्योहारों पर ही ऐसा क्यों होता है ? ऐसे तो हमारे त्यौहार और संस्कृति ही समाप्त हो जाएगी । होली से रंग और दिवाली से पटाख़े व शिवरात्रि से भोलेनाथ के दुग्धाभिषेक को हटा लिया गया तो फिर महज औपचारिकता ही बचेगी। अतः होली पर रंग जमकर खेलें लेकिन प्रकृति व मर्यादा का ध्यान जरूर रखें । जितनी आवश्यकता प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की है उतनी ही आवश्यकता अपनी परम्पराओं संस्कृति जीवित रखने की भी है। होली के अवसर पर हम यह भी ध्यान रखें की किसी गरीब बेसहारा व वंचित व्यक्ति की आंखों में दुख के आंसू न आएं हमारे आसपास यदि कोई गरीब बेसहारा परिवार है तो।उसके घर भी होली के रंगों की उमंग रहे उसका मुंह भी होली की गुजिया से मीठा हो इसकी चिंता हम ही को करना है। समाज में समरसता का भाव लेकर हम उन सभी परिवारों के घरों में जाएं जो हमारे और आपकी कुछ गलतियों के कारण हमसे दूर हो गए। उन्हें प्रेम का गुलाल और स्नेह का चन्दन लगाकर नजदीक लाएं इसी से समाज मजबूत होगा ओर उत्साह व उमंग की रँगधार बहेगी। shabd shakti news.in के सभी पाठको शुभचिंतकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।</strong></p>
<p><strong> </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हरे भरे वृक्ष बचाने होली पर जगह-जगह अस्थायी डिपो बनाकर सूखी लकड़ी विक्रय की व्यवस्था करेगा वन विभाग</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Feb 2020 13:02:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=16688</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल /वन मंत्री  उमंग सिंघार ने होली पर्व पर प्रदेशवासियों से हरे-भरे वृक्षों को न काटने की अपील की है। श्री सिंघार ने कहा है कि कई बार देखने में आता है कि लोग अति उत्साह में जीवित पेड़ों को नुकसान पहुँचाते हैं। यह हरकत पर्यावरण के लिये गंभीर क्षति है। वन मंत्री ने आगह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="box-sizing: border-box; margin: 0px 0px 10px; line-height: 28px; padding: 7px 3px 3px 5px; text-align: justify; font-family: 'Noto Sans', 'Helvetica Neue', Helvetica, Arial, sans-serif; font-size: 14px; widows: auto;" align="justify"><span style="box-sizing: border-box; font-size: medium;">भोपाल /वन मंत्री  उमंग सिंघार ने होली पर्व पर प्रदेशवासियों से हरे-भरे वृक्षों को न काटने की अपील की है। श्री सिंघार ने कहा है कि कई बार देखने में आता है कि लोग अति उत्साह में जीवित पेड़ों को नुकसान पहुँचाते हैं। यह हरकत पर्यावरण के लिये गंभीर क्षति है।</span></p>
<p style="box-sizing: border-box; margin: 0px 0px 10px; line-height: 28px; padding: 7px 3px 3px 5px; text-align: justify; font-family: 'Noto Sans', 'Helvetica Neue', Helvetica, Arial, sans-serif; font-size: 14px; widows: auto;" align="justify"><span style="box-sizing: border-box; font-size: medium;">वन मंत्री ने आगह किया है होलिका दहन में गौ-काष्ठ का भी प्रयोग करें। लकड़ी का कम से कम उपयोग करें। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा होलिका दहन के पूर्व जगह-जगह अस्थायी डिपो बनाकर सूखी लकड़ी विक्रय की व्यवस्था की जायेगी।</span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होलिका दहन के साथ रंगों की मस्ती में सराबोर हुआ देश</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Mar 2019 17:32:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=10770</guid>

					<description><![CDATA[बुधवार की रात्रि 8.59 के बाद भद्रा समाप्ति के साथ देशभर में होलिका दहन प्रारंभ हो गया। इसी के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाले रंगों के त्यौहार होली की मस्ती पूरे देश में छा गयी है। लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं। महिलाओं की टोलियां होलिका पूजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-5.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-10772" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-5.jpg" alt="" width="655" height="468" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-5.jpg 655w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-5-300x214.jpg 300w" sizes="(max-width: 655px) 100vw, 655px" /></a></p>
<p>बुधवार की रात्रि 8.59 के बाद भद्रा समाप्ति के साथ देशभर में होलिका दहन प्रारंभ हो गया। इसी के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाले रंगों के त्यौहार होली की मस्ती पूरे देश में छा गयी है।</p>
<p>लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं। महिलाओं की टोलियां होलिका पूजन करने के साथ आशीर्वाद प्राप्त कर रही हैं।</p>
<p>बृज सहित पूरे उत्तरभारत के प्रमुख मंदिरों में भी होली की धूम देखी जा रही है ,भक्त भगवान को गुलाल अबीर लगाकर मंत्रमुग्ध दिख रहे है।</p>
<p>बाजारों में भी होली की रौनक छाई है,एक तरफ रंगबिरंगी पिचकारियों से बाजार सजे हैं वहीं बच्चे से लेकर बड़े तक रंग अबीर पिचकारी की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #000000;">ग्वालियर के सराफा बाजार में दहन हुआ अंचल की सबसे विशाल होलिका का</span></strong></p>
<p>पूरे देश की तरह ग्वालियर अंचल में भी होलिका दहन के साथ होली की मस्ती शुरू हो गई। अंचल की सबसे बड़ी होलिका का देर शाम  सराफा बाजार में पूजार्चना के बाद दहन किया गया। उधर शहर के मुख्य धार्मिक स्थानों में से एक अचलेश्वर महादेव पर भी भक्तों ने गुलाल लगाया। अनेक स्थानों पर होली मिलन की धूम भी शुरू हो गई। अनेक जगहोँ पर हुलियारे संगीत की थाप पर मस्ती में थिरकते दिखाई दिये।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रंगभरी एकादशी : काशी में रंगोत्&#x200d;सव का चढ़ने लगा रंग, भोलेबाबा दरबार में उड़ा गुलाल</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Mar 2019 12:22:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=10671</guid>

					<description><![CDATA[&#160; वाराणसी। काशी विश्&#x200d;वनाथ दरबार में रंगभरी एकादशी की परंपरा के निर्व&#x200d;हन के लिए तैयारियां शुरु हो गई हैं। इससे पूर्व शनिवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत आवास पर शाम से ही मंगल गीतों से गूंज उठा। गौरा का गौना कराने ससुराल आए भोले बाबा ने कलेवा का स्वाद लिया। बरातियों ने भी इसे प्रसाद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><a href="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-6-1.jpg"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-10675" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-6-1.jpg" alt="" width="506" height="606" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-6-1.jpg 506w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2019/03/images-6-1-250x300.jpg 250w" sizes="(max-width: 506px) 100vw, 506px" /></a></p>
<p><strong style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none; color: #404040; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; font-size: 18px; line-height: 30px; widows: auto;">वाराणसी। </strong><span style="color: #404040; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; font-size: 18px; line-height: 30px; widows: auto;">काशी विश्&#x200d;वनाथ दरबार में रंगभरी एकादशी की परंपरा के निर्व&#x200d;हन के लिए तैयारियां शुरु हो गई हैं। इससे पूर्व शनिवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत आवास पर शाम से ही मंगल गीतों से गूंज उठा। गौरा का गौना कराने ससुराल आए भोले बाबा ने कलेवा का स्वाद लिया। बरातियों ने भी इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया। बाबा के गौना की बरात रंगभरी एकादशी पर देर शाम निकली और लोगाें ने हरहर महादेव का उदघाेष किया।</span></p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">बाबा गौना के लिए बाबा दो दिन पहले शुक्रवार को ही ससुराल आ चुके थे। एक दिन पूर्व शनिवार की शाम को बाबा विश्वनाथ के साथ आए गणों को पूड़ी-सब्जी समेत 11 तरह के पकवानों का भोग लगा कर कलेवा की रस्म निभाई गई। इस दौरान बाबा व माता पार्वती की गोद में प्रथम पूज्य गणेश की रजत प्रतिमाओं को एक साथ सिंहासन पर विराजमान करा कर पूजन-आरती की गई । महिलाओं ने अंखड सुहाग कामना के साथ विदाई गीत गाए।</p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;"><b style="padding: 0px; margin: 0px; outline: none;">गूंजा हर हर महादेव का उदघोष</b></p>
<p style="padding: 0px; margin: 0px 0px 10px; outline: none; font-size: 18px; color: #404040; line-height: 30px; font-family: 'Ek Mukta', Arial, sans-serif; widows: auto;">ब्रह्म मुहूर्त में पूजन व राजसी श्रंगार का आयोजन किया गया। इस दौरान आस्&#x200d;थावानों की भीड़ सुबह से ही लगी रही। वहीं सुब&#x200d;ह 11 बजे भोग आरती आयोजित हुई। वहीं सुबह 11.30 बजे पालकी दर्शन शुरु हुआ तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद दोपहर 12 बजे से विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती और महंत आवास पर शिवांजलि का आयोजन किया गया। जबकि शाम पांच बजे से रजत पालकी निकली और चारों दिशाएं हर हर महादेव के उदघोष से गूंज उठीं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस दिन से लगेंगे होलाष्टक बन्द हो जाएंगे सभी शुभ कार्य</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%95/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Mar 2019 01:46:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म कर्म]]></category>
		<category><![CDATA[होली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=10452</guid>

					<description><![CDATA[होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं. भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है. वर्ष 2019 में होलाष्टक 13 मार्च 2019 बुधवार से शुरू [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="margin: 0px; padding: 20px 0px 0px; color: #222222; font-stretch: normal; font-size: 17px; line-height: 30px; font-family: Hind; letter-spacing: 1px; widows: auto;">होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं. भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है. वर्ष 2019 में होलाष्टक 13 मार्च 2019 बुधवार से शुरू होकर 20 मार्च 2019 बुधवार तक का समय होलाष्&#x200d;टक का रहेगा. 20 मार्च को होलिका दहन के साथ इसकी समाप्ति होगी.</p>
<p style="margin: 0px; padding: 20px 0px 0px; color: #222222; font-stretch: normal; font-size: 17px; line-height: 30px; font-family: Hind; letter-spacing: 1px; widows: auto;">इन दिनों में सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं. कोई भी कार्य यदि शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है. इस धर्म धुरी से भारतीय भूमि में प्रत्येक कार्य को सुसंस्कृत समय में किया जाता है, अर्थात ऐसा समय जो उस कार्य की पूर्णता के लिए उपयुक्त हो.</p>
<p style="margin: 0px; padding: 20px 0px 0px; color: #222222; font-stretch: normal; font-size: 17px; line-height: 30px; font-family: Hind; letter-spacing: 1px; widows: auto;">इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है. जैसे गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन विद्यारंभ, गृह प्रवेश व निर्माण, गृह शांति, हवन यज्ञ कर्म, स्नान, तेल मर्दन आदि कार्यों का सही और उपयुक्त समय निश्चित किया गया है.</p>
<p style="margin: 0px; padding: 20px 0px 0px; color: #222222; font-stretch: normal; font-size: 17px; line-height: 30px; font-family: Hind; letter-spacing: 1px; widows: auto;">ज्योतिष शास्त्र का कथन है कि इस समय विशेष रूप से विवाह नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए. इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है. होलाष्टक दोष में, संक्राति, ग्रहण काल आदि में शुभ विवाह कार्यों को वर्जित किया गया है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
