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अंततः मोदी और शाह को स्वीकारना पड़ी शिवराज की नेतागिरी दिया फ्री हेंड

भोपाल। मध्यप्रदेश को लेकर दिल्ली से खबर आ रही है कि पीएम नरेंद्र मोदी एवं अध्यक्ष अमित शाह ने अंतत: लोकसभा चुनाव की कमान शिवराज सिंह चौहान को सौंप दी है। इससे पहले तक शिवराज सिंह को निर्देशित किया गया था कि वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद का दायित्व निभाएं, मप्र की चिंता छोड़ दें। 

खबर आ रही है कि लंबी चर्चा और कई नेताओं को परखने के बाद आलाकमान ने शिवराज सिंह चौहान को मप्र की जिम्मेदारी दी है। वे चुनाव का नेतृत्व करने के साथ-साथ केंद्रीय संगठन के सहयोग खर्च का जिम्मा भी संभालेंगे। बताया जा रहा है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लिया है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल मॉनिटरिंग करेंगे। 29 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के पहले कहां-कहां किसकी रैलियां होंगी, कौन कहां सभा करेगा, यह भी शिवराज तय करेंगे। शिवराज 19 अप्रैल से मप्र में सभाओं और रैली की शुरुआत करेंगे।

 अंतत: शिवराज सिंह जीत गए

शिवराज सिंह चौहान और उनके विरोधियों के बीच पूरे 23 दिन तक संघर्ष चला। विरोधियों ने अमित शाह को भरोसा दिला दिया था कि शिवराज सिंह चौहान के बिना भी मध्यप्रदेश में भाजपा वैसी ही नजर आएगी, जैसी कि दिखाई देती थी। शिवराज सिंह को शिथिल करने से फायदा ही होगा, नुक्सान नहीं होगा। अमित शाह ने शिवराज सिंह को पीछे हटने के लिए कह भी दिया परंतु गुटबाज संगठन पर राज नहीं कर पाए। शिवराज सिंह लगातार संघर्ष करते रहे और 23 दिन बाद लोकसभा चुनाव की चाबी अपने कुर्ते की जेब में रख लाए।

मध्यप्रदेश में हर नेता शिवराज सिंह का आदेश मानेगा

आलाकमान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शिवराज की योजना के अनुसार ही प्रदेश के बाकी नेता मूवमेंट करेंगे। इसके लिए मंगलवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, चुनाव प्रभारी स्वतंत्र देव, सह प्रभारी सतीश उपाध्याय और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बैठक की। तय हुआ है कि प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं को लोकसभा सीट के हिसाब से जिम्मा सौंपा जाएगा। वे भोपाल से लेकर सभी सीटों पर जमीनी रूप से नजर रखेंगे। बीच-बीच में शिवराज के साथ बैठक में इसका फीडबैक लिया जाएगा।

हर नेता अपना राग गा रहा था, सुर ताल ही नहीं मिल रहे थे

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह चूंकि खुद चुनाव मैदान में हैं, इसलिए वे सक्रिय नहीं थे। बीच-बीच में स्वतंत्र देव व सतीश उपाध्याय लोकसभा में बैठकें लेकर अपनी उपस्थिति दिखा रहे थे। नेता प्रतिपक्ष भार्गव और प्रभात झा भोपाल में होते हुए भी उनके दौरे कार्यक्रम तय किए गए। विनय सहस्त्रबुद्धे अपने कामों व्यस्त रहे। लोकसभा के हिसाब से मप्र का जिम्मा देख रहे अनिल जैन दिल्ली में रहे। चुनाव लीड कौन करेगा यह तय नहीं हो रहा था।
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