प्रवीण दुबे
अचलेश्वर न्यास चुनाव की सरगर्मियां तेज, कल से नामांकन
11 अक्टूबर को होगा चुनाव, 2017 के बाद पहली बार निर्वाचन; महेश मुदगल ने न्यासी पद के लिए चुनाव लड़ने की पुष्टि की
ग्वालियर 23 सितंबर 2026/शहर के प्रसिद्ध श्री अचलेश्वर मंदिर न्यास के बहुप्रतीक्षित चुनाव को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्धारित निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके साथ ही यह तस्वीर भी साफ होने लगेगी कि न्यासी और अध्यक्ष पद के लिए मैदान में कौन-कौन प्रत्याशी उतर रहे हैं। अचलेश्वर न्यास का चुनाव 11 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
चुनाव को लेकर फिलहाल कई नामों की चर्चाएं शहर में चल रही हैं। इनमें समाजसेवी महेश मुदगल का नाम प्रमुखता से सामने आया है। महेश मुदगल ने शब्द शक्ति न्यूज़ से बातचीत में न्यासी पद के लिए चुनाव लड़ने की पुष्टि की है। उनके साथ शिवहरे समाज से जुड़े एक अन्य व्यक्ति के भी न्यासी पद के लिए चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है, हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अध्यक्ष पद के लिए राजेश ऐरन और राजीव चड्ढा के नाम चर्चा में
न्यासी पद के अलावा अध्यक्ष पद को लेकर भी शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अध्यक्ष पद के लिए बिल्डर राजेश एरन तथा चाचा जनरल स्टोर के राजीव चड्ढा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि दोनों नामों को लेकर अंतिम स्थिति नामांकन दाखिल होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अचलेश्वर मंदिर न्यास से जुड़े चुनाव में सदस्यों की संख्या तीन हजार से अधिक बताई जाती है। खास बात यह है कि न्यास के सदस्य शहर के अलग-अलग सामाजिक, व्यापारिक और अन्य क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के सामने व्यापक सदस्य समूह तक पहुंच बनाने की चुनौती रहेगी।
नामांकन के बाद साफ होगी चुनावी तस्वीर
फिलहाल चुनाव को लेकर सामने आ रहे अधिकांश नाम चर्चाओं के स्तर पर हैं। 24 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन प्रत्याशी वास्तव में चुनाव मैदान में उतरता है। नामांकन दाखिल होने और उसके बाद नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ 30 सितंबर को चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ होने की संभावना है।
अचलेश्वर न्यास के चुनाव का अपना अलग महत्व है। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल अचलेश्वर मंदिर से जुड़ी व्यवस्था और न्यास के संचालन को लेकर लंबे समय से शहर के सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में रुचि बनी रही है।
2017 के बाद अब फिर चुनाव की बारी
गौरतलब है कि अचलेश्वर न्यास के चुनाव पिछली बार वर्ष 2017 में हुए थे। इसके बाद न्यास से जुड़े विवादों के चलते यहां रिसीवर की नियुक्ति की गई थी। लंबे अंतराल के बाद अब दोबारा निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस बार चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए पूर्व पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने पर रोक भी रखी गई है। ऐसे में यह चुनाव पुराने चेहरों के बजाय नए दावेदारों के बीच होने की संभावना से भी खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें 24 सितंबर से शुरू होने वाले नामांकन पर टिकी हैं। नामांकन के पहले दिन से ही यह स्पष्ट होना शुरू हो जाएगा कि अचलेश्वर न्यास की नई व्यवस्था के लिए कितने दावेदार मैदान में हैं और अध्यक्ष तथा न्यासी पद के चुनाव में किस तरह के समीकरण बनते हैं।
11 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के परिणाम से अचलेश्वर न्यास की आगामी व्यवस्था और नेतृत्व की दिशा भी तय होगी।