तेहरान24 जून 2026/ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। अली खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के शुरुआती हमले में मारे गए थे। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने खामेनेई के मौत पर कोई शोक संदेश नहीं जारी किया था। हालांकि, बाद में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने के लिए नई दिल्ली में ईरानी दूतावास का दौरा किया था।
अभी यह पता नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। इसके पहले मई 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भारत ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी। रईसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत ने एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जिसकी अगुवाई तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने की थी।
अली खामेनेई का लंबे समय तक चलने वाला संस्कार उनकी मौत के चार महीने बाद किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 4 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स में शव को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने के साथ होगी। इसके बाद तेहरान और कोम शहरों में सार्वजनिक जुलूस निकाले जाएंगे। इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला में उनके लिए प्रार्थनाएं पढ़ी जाएंगी।
मशहद में खामेनेई को किया जाएगा दफन
अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में इमाम रजा की दरगाह पर दफनाया जाएगा। मशहद खामेनेई का गृह नगर है। ईरानी अधिकारियों ने अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है।
भारत के ईरान से दशकों पुराने संबंध रहे हैं। नई दिल्ली ने ईरान में कई प्रोजेक्ट में निवेश किया है, जिसमें चाबहार पोर्ट एक प्रमुख है। अमेरिका के साथ ईरान के युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के अपने समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत की है।