ठुमुक चलत रामचंद्र, बाजै पैजनिया.. ठुमुक-ठुमुक.’ शास्त्रीयता पर आधारित भजन के साथ कजरी लोकगीतों से निसृति श्रृंगार रस की वर्षा से राम जन्मभूमि परिसर की लताएं अवसाद के क्षण को भूलकर आनंद विभोर हो एक-दूसरे से आलिंगनबद्ध हो गईं। शताब्दियों बाद रामलला अपने भाइयों के साथ चांदी के झूले पर विराजमान हुए। 28 सालों बाद शुक्रवार को सावन झूलनोत्सव के अवसर पर यहां स्वर लहरियां गूंजी। सायंकालीन आरती के बाद एक घंटे के सांस्कृतिक कार्यक्रम में अयोध्या की मंदिर परम्परा के शास्त्रीय गायकों को सम्मानित भी किया गया।
इससे पहले रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से समर्पित रजत झूले पर रामलला को प्रात:काल ही प्रतिष्ठित कर दिया गया। रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास शास्त्री ने बताया कि मंगला आरती के उपरांत भगवान का विशेष श्रृंगार कर उन्हें बादामी रंग के नये परिधान से सुसज्जित कर नवीन झूले पर प्रतिष्ठित कराया गया। उन्हीं के साथ तीनों अनुजों भरत-शत्रुघ्न व लक्ष्मण जी के श्रीविग्रह को भी नियत स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया। पुन: झूलन झांकी अनावरण के साथ भगवान की आरती उतारी गई। फिर आम दर्शनार्थियों के दर्शन के लिए रामलला के पट खोले गये। वहीं साढ़े छह बजे निर्धारित आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का श्रीगणेश हुआ। इस आयोजन में शास्त्रीय गायक मिथिला बिहारी दास व उनके साथियों ने स्वर लहरियों से समां बांध दिया।
दूसरी ओर विवाह उपासना परम्परा की प्रसिद्ध स्थली विअहुति भवन में भी पंचमी के पर्व पर भगवान श्रीसीताराम के विवाहोत्सव की रस्म के साथ झूलन उत्सव का शुभारम्भ हो गया। यहां आचार्यों की परम्परा का निर्वहन करते हुए मंदिर के महंत बैकुंठ शरण महाराज सर्वप्रथम दुल्हा-दुल्हिन सरकार को पूर्वाचार्यों के रचित पदों का गायन किया। उधर वैष्णव नगरी में विभिन्न जाति समूहों के पंचायती मंदिरों में भी उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। इन मंदिरों में एकादशी के पर्व से उत्सव आरम्भ होगा।
इन मंदिरों में झूलन उत्सव सावन तीज के पर्व से ही शुरू हो चुका
फिलहाल कनक भवन, दशरथ राजमहल, रंगमहल, कौशलेश सदन, अशर्फी भवन, सियाराम किला झुनकीघाट, सदगुरु सदन गोलाघाट, लक्ष्मणकिला, हनुमत निवास, हनुमत सदन, हनुमत भवन, हनुमत विजय कुंज, बावन मंदिर, जानकी महल, मणिरामदास छावनी, रामवल्लभा कुंज, रामहर्षण कुंज, रामकथा कुंज, हरिगोपाल धाम, राजगोपाल मंदिर व वैदेही भवन सहित विभिन्न मंदिरों में झूलन उत्सव सावन तीज के पर्व से ही शुरू हो चुका है।