प्रवीण दुबे
भारत विवधताओं से भरा देश है इसी का एक महत्वपूर्ण अंग हैं हमारे त्यौहार यह हमारी एकता अखण्डता के साथ युगों युगों से चली आ रही परम्पराओं को भी जीवंत रखते है। होली भी ऐसे ही उमंग उत्साह और रंगों से सराबोर हमारी संस्कृति का परिचायक है। यह प्रतीक भी है राक्षसी प्रवृत्तियों के नाश का समाज में जब हिरण्यकश्यप और होलिका रूपी शक्तियां सज्जन प्राणियों के लिए समस्या बन जाती हैं तो समाज में शांति के लिए उनकी समाप्ति ही एकमात्र रास्ता है। भगवान नारायण तक को आताताई हिरण्यकश्यप से प्रहलाद की रक्षा हेतु उसे समाप्त करना ही पड़ा था। आज हम भारत समेत पूरी दुनिया पर नजर दौड़ाते हैं तो दिखाई देता है की सज्जन शक्तियां किस प्रकार आतंकवाद से परेशान हैं, आतंकवाद रूपी असुर विश्वभर में अशांति, मारकाट और वैमनस्यता फैला रहा है। ऐसे समय में होली जैसे त्यौहार पर सभी को आतंकवाद रूपी हिरण्यकश्यप की समाप्ति के संकल्प लेने की जरूरत है। होली अथवा कोई भी त्यौहार या उमंग का अवसर क्यो न हो समाज को यह बात भी हमेशा ध्यान रखने की जरूरत है की इससे पर्यावरण कोई नुकसान न पहुंचे। होली के उमंग में समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग हरे भरे पेडों को काटकर होलिका दहन करता है। यह पर्यावरण की दृष्टि से कतई सही नहीं ठहराया जा सकता है। सर्वविदित है की पर्यावरण संरक्षण में हरे भरे वृक्षों की विशेष भूमिका होती है। अतः होलिका दहन के समय हरेभरे वृक्षों की जगह गोबर के कण्डों व अन्य सामग्री का उपयोग करें जिससे हमारे पर्यावरण के सजग प्रहरी ये पेड़ बचे रहें। होली की मस्ती में किसी दूसरे को को कोई नुकसान न पहुंचे इसका भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रंग जरूर खेलें क्योंकि होली की पहचान रंगों से ही है लेकिन मर्यादा का सदैव स्मरण रहे। समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग सूखी होली खेलने का अभियान चलाता रहा है ,ऐसे ही लोग दिवाली पर पटाखे नहीं फोड़ने, नागपंचमी व दशहरे जैसे त्योहारों पर जीवों की पूजा न करने,शिवरात्रि पर भोलेनाथ पर दुग्ध अर्पित न करने जैसे अभियान भी जोरशोर से चलाते हैं। निःसंदेह प्रकृति, पर्यावरण व जीव जंतुओं की रक्षा पूरे समाज का उत्तरदायित्व है लेकिन केवल हिंदुओं के त्योहारों पर ही ऐसा क्यों होता है ? ऐसे तो हमारे त्यौहार और संस्कृति ही समाप्त हो जाएगी । होली से रंग और दिवाली से पटाख़े व शिवरात्रि से भोलेनाथ के दुग्धाभिषेक को हटा लिया गया तो फिर महज औपचारिकता ही बचेगी। अतः होली पर रंग जमकर खेलें लेकिन प्रकृति व मर्यादा का ध्यान जरूर रखें । जितनी आवश्यकता प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की है उतनी ही आवश्यकता अपनी परम्पराओं संस्कृति जीवित रखने की भी है। होली के अवसर पर हम यह भी ध्यान रखें की किसी गरीब बेसहारा व वंचित व्यक्ति की आंखों में दुख के आंसू न आएं हमारे आसपास यदि कोई गरीब बेसहारा परिवार है तो।उसके घर भी होली के रंगों की उमंग रहे उसका मुंह भी होली की गुजिया से मीठा हो इसकी चिंता हम ही को करना है। समाज में समरसता का भाव लेकर हम उन सभी परिवारों के घरों में जाएं जो हमारे और आपकी कुछ गलतियों के कारण हमसे दूर हो गए। उन्हें प्रेम का गुलाल और स्नेह का चन्दन लगाकर नजदीक लाएं इसी से समाज मजबूत होगा ओर उत्साह व उमंग की रँगधार बहेगी। shabd shakti news.in के सभी पाठको शुभचिंतकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।