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आखिर कार्यकारिणी के गठन व निगम मंडल आयोग प्राधिकरण में नियुक्तियों को लेकर सुस्त क्यों है मध्यप्रदेश भाजपा ..?

क्या मध्यप्रदेश भाजपा का ध्यान केवल सत्ता पर ही केंद्रित है ? क्या संगठन व जमीनी कार्यकर्ताओं को लेकर उसका नजरिया पुचकारो और काम कराओ की नीति तक केंद्रित होकर रह गया है ? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो आजकल मध्यप्रदेश में लंबे समय से काम कर रहे तमाम कार्यकर्ताओ के मन में कौंध रहा है। तमाम राजनीतिक पंडितों के मन में भी इस बात को लेकर बड़ा आश्चर्य है की जिस पार्टी को सबसे अनुशासित व कार्यकर्ताओं की सर्वाधिक चिंता करने वाला दल कहा जाता है वहां पिछले छह वर्षों के लंबे अंतराल के बावजूद प्रदेश कार्यकारिणी तक का गठन नहीं हो सका है। इतना ही नहीं पुनः सरकार बनने के बावजूद मंत्रीमंडल विस्तार से लेकर मनमाफिक अफसरशाही की तैनाती तो लगातार जारी है लेकिन जिन निगम मंडल आयोग प्राधिकरण आदि में संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को तैनात किए जाने की परंपरा है उस ओर भी सुस्ती साफ दिखाई देती है।

मध्य प्रदेश में विधानसभा के उप-चुनाव के नतीजे आने के बाद संभावना जताई जा रही थी कि निगम-मंडलों में नियुक्तियों के साथ प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार हो जाएगा मगर  यह मामला कहां और क्यों अटक गया है. इसका कारण मध्यप्रदेश भाजपा के पास खबर लिखे जाने तक नहीं है।

राज्य में विधानसभा के उप-चुनाव के नतीजे आए दो माह से ज्यादा का वक्त गुजर गया है.  मंत्रिमंडल विस्तार तो  कर लिया गया लेकिन न तो कार्यकारणी घोषित हो सकी और न ही निगम मंडल आयोगों में नियुक्तियों की कोई सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के संगठन महामंत्री सुहास भगत के बीच बैठकें भी हो चुकी है. इसके साथ ही शर्मा का दिल्ली दौरा भी हो चुका है. इसके चलते कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही निगम-मंडलों के साथ भाजपा की कार्यकारिणी में नियुक्तियां कर दी जाएंगी. प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी राज्य के भाजपा संगठन की कमान संभाले भी लगभग एक साल से अधिक का समय बीत चुका है  इस अवधि में पांच महा मंत्रियों- भगवानदास सबनानी, शारदेंदु तिवारी, रणवीर सिंह रावत, कविता पाटीदार और हरिशंकर खटीक की नियुक्ति की थी, उसके बाद से ही नई कार्यसमिति के गठन की कोशिशें जारी है. इसके अलावा राज्य में हुए सत्ता बदल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 25 पूर्व विधायकों को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था, इसके चलते भाजपा में असंतोष भी पनपा था. इसके चलते पार्टी संगठन और सत्ता ने ऐसे लोगों को निगम मंडलों में समयोजित करने का वादा किया था. इन लोगों को जिम्मेदारी देने के लिए मंथन का दौर जारी है।

भाजपा के सूत्रों की मानें तो आगामी समय में नगरीय निकाय के चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जल्द ही चुनाव की तारीखों का भी ऐलान हेा सकता है, इसलिए भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री जल्द किसी तरह का विस्तार करने के मूड में नहीं हैं.   इस वजह से मंत्रिमंडल का विस्तार और नियुक्तियां होने में वक्त लग सकता है.

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