29 रेसकोर्स रोड अर्थात केंद्रीय मंत्री और भाजपा मध्यप्रदेश चुनाव संचालन समिति के सर्वेसर्वा नरेंद्र सिंह तोमर का सरकारी निवास जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की ग्वालियर यात्रा को लेकर बुधवार को खासी गहमा गहमी नजर आई, इसी गहमा गहमी के बीच एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम भी सामने आया जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। यह घटनाक्रम था भाजपा के मुरैना सांसद और मध्यप्रदेश शासन में पूर्व में कई मंत्रालयों के मंत्री रह चुके पार्टी के कद्दावर नेता अनूप मिश्रा की दूसरे कद्दावर नेता नरेंद्र तोमर के बीच बन्द कमरे में हुई बातचीत। यह बातचीत इस कारण स्तब्ध कर देने वाली कही जा रही है क्यों कि पिछले लम्बे समय से इन दोनों नेताओं के सम्बंध उत्तर और दक्षिण दिशाओं जैसे रहे हैं। ऐसी स्थिति में बंद कमरे में इनके बीच की मुलाकात के मध्यप्रदेश खासकर ग्वालियर चम्बल की राजनीति में कई निहितार्थ लगाए जा रहे हैं।
आखिर मध्यप्रदेश के इन दो दिग्गजों की बन्द कमरे में हुई मुलाकात के क्या हैं निहितार्थ ?
जैसी की लम्बे समय से चर्चा है कि मुरैना सांसद मिश्रा को दिल्ली की आबोहवा रास नहीं आ रही यही वजह है कि उन्होंने सांसदी छोड़ विधानसभा का चुनाव लड़ मध्यप्रदेश में एंट्री मारने का मन बना लिया है।
उनके लिए सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि वे किस विधानसभा सीट से मैदान में उतरें। सूत्रों का कहना है कि श्री मिश्रा ग्वालियर शहर की तीन विधानसभा सीटों में से किसी एक से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इनमें भी सबसे पसंदीदा सीट लश्कर पूर्व की बताई जा रही है।
पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन तीनों ही विधानसभा सीटों से पार्टी के सिटिंग विधायक हैं और तीनों ही कैबिनेट मंत्री है। जो पूर्व की सीट श्री मिश्रा की पसंदीदा बताई जा रही है वहां से तो पार्टी की वरिष्ठ महिला नेत्री होने के साथ साथ महल से सम्बन्ध रखने वाली मंत्री मायासिंह विधायक हैं । हालांकि मायासिंह का रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं होने से फिलहाल उनका टिकट भी खतरे में बताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में यदि पार्टी श्री मिश्रा को यहां से मैदान में उतारने का मन बनाती भी है तो इस राह में एक अन्य पार्टी नेता सतीश सिकरवार टिकट की दौड़ में हैं उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया है कि यदि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती है तो भी वे चुनाव में जरूर उतरेंगे। अनूप के लिए कमोवेश यह वैसी ही स्थिति कही जाएगी जिसके चलते वे पिछला चुनाव भितरवार से पार्टी के ही एक बागी प्रत्याशी बृजेंद्र तिवारी के कारण हार गए थे। हालांकि श्री तिवारी को मैदान में ताल ठोंकने के लिए हवा उन्ही के विरोधियों ने ही भरी थी। कोई बड़ी बात नहीं कि श्री मिश्रा का मध्यप्रदेश में वर्चस्व न बढे इसे रोकने के लिए एकबार फिर उन्हें राजनीति का शिकार बनाया जा सकता है। देखना दिलचस्प होगा कि मध्यप्रदेश के दो दिग्गजों की बन्द कमरे में हुई गुफ्तगू क्या रंग लाती है।
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