प्रवीण दुबे
महाराज बाड़ा और आसपास के बाजारों पर मंडरा रहा अग्निकांड का खतरा, प्रशासन बेखबर
ग्वालियर। शहर का हृदय स्थल और प्रमुख व्यापारिक केंद्र महाराज बाड़ा तथा उससे जुड़े दर्जनों घने बाजार आज एक बड़े अग्निकांड की आशंका के साये में हैं। बावजूद इसके नगर निगम, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
शहर में पहले भी कई भीषण अग्निकांड हो चुके हैं, जिनमें मोची ओली अग्निकांड, कुंज विहारी एंड संस अग्निकांड, इंद्रगंज अग्निकांड और खुर्जे वाला मोहल्ला अग्निकांड शामिल हैं। इन घटनाओं में करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई थी और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने इन हादसों से कोई सबक नहीं लिया।
सबसे ज्यादा खतरे वाले बाजार
महाराज बाड़ा क्षेत्र के आसपास स्थित टोपी बाजार, सुभाष मार्केट, नजरबाग मार्केट, दौलतगंज जूता मार्केट, दही मंडी कपड़ा बाजार, खुर्जे वाला मोहल्ला, नया सराफा, दानाओली और मोची ओली जैसे बाजारों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का व्यापार होता है। इन क्षेत्रों की सबसे बड़ी समस्या यहां की संकरी गलियां और अत्यधिक घनी आबादी है।
स्थिति यह है कि कई स्थानों पर यदि आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड के बड़े वाहन घटनास्थल तक पहुंच ही नहीं सकते। ऐसे में आग पर समय रहते काबू पाना लगभग असंभव हो सकता है।
फायर सेफ्टी नियमों की खुली अनदेखी
इन बाजारों में अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जहां फायर सेफ्टी के बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। कई इमारतों में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, बिजली के तारों का जाल बेतरतीब तरीके से फैला हुआ है और आपातकालीन निकास मार्गों की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम, ओवरलोड विद्युत लाइनों और घनी बसाहट के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यदि आग लगती है तो उसका असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास रहने वाली हजारों की आबादी भी उसकी चपेट में आ सकती है।
निगम और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम और जिला प्रशासन को बार-बार इस गंभीर खतरे की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन अब तक न तो व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया गया और न ही नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई।
लोगों का कहना है कि शहर के सबसे संवेदनशील व्यापारिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, आपदा प्रबंधन योजना, अग्निशमन उपकरणों की अनिवार्यता और नियमित निरीक्षण तत्काल शुरू किए जाने चाहिए। लेकिन फिलहाल जिम्मेदार विभाग कुंभकरणी नींद में दिखाई दे रहे हैं।
बड़ा सवाल
दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में हुए भीषण अग्निकांडों ने यह साबित किया है कि लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है। ग्वालियर के महाराज बाड़ा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे और जनहानि का इंतजार कर रहा है?
यदि समय रहते व्यापक फायर सेफ्टी अभियान नहीं चलाया गया तो शहर का यह सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र किसी दिन एक ऐसे अग्निकांड का गवाह बन सकता है, जिसकी कीमत व्यापारियों और आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
आवश्यक कार्रवाई की जाएगी

निगम आयुक्त संघप्रिय गौतम ने शब्द शक्ति न्यूज़ से कहा फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच कराई जाएगी तथा जहां भी सुरक्षा मानकों में कमी पाई जाएगी, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र महाराज बाड़ा एवं उससे लगे घने बाजारों में मंडरा रहे अग्निकांड के खतरे को लेकर शब्द शक्ति न्यूज़ ने नगर निगम आयुक्त संघप्रिय गौतम से चर्चा की।
निगम आयुक्त संघप्रिय गौतम ने स्वीकार किया कि महाराज बाड़ा से जुड़े कई बाजारों में अग्नि सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि निगम की टीम को तत्काल संबंधित बाजारों में भेजकर फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच कराई जाएगी तथा जहां भी सुरक्षा मानकों में कमी पाई जाएगी, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने कहा कि घनी आबादी और संकरी गलियों वाले क्षेत्रों में अग्निशमन वाहनों की पहुंच एक बड़ी चुनौती है। इसी समस्या के समाधान के लिए नगर निगम द्वारा छोटी फायर ब्रिगेड गाड़ियों का प्रस्ताव तैयार कर माननीय सांसद को भेजा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर ऐसी गाड़ियां शहर के भीतरी और संकरे बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें।
संघप्रिय गौतम ने कहा कि निगम प्रशासन इस विषय को गंभीरता से ले रहा है और अग्नि सुरक्षा को लेकर आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे की संभावना को कम किया जा सके।