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एक मंच पर मोहन–तोमर–सिंधिया… क्या ग्वालियर से निकलेगा कोई बड़ा राजनीतिक संदेश ?

प्रवीण दुबे 

ग्वालियर। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों अंदरखाने चल रही हलचल और शीर्ष नेतृत्व के मंथन की खबरों के बीच आज ग्वालियर में एक ऐसा राजनीतिक मंच सजने जा रहा है, जिस पर प्रदेश की सियासत के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक साथ मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को महज धार्मिक-कृषक आयोजन से कहीं ज्यादा राजनीतिक महत्व दे दिया है।

मौका है बलराम जयंती महोत्सव का। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित प्रदेश सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
लेकिन इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा नजरें रहेंगी मोहन यादव–नरेन्द्र सिंह तोमर–ज्योतिरादित्य सिंधिया की तिकड़ी पर।

तोमर और सिंधिया… एक मंच, इसलिए चर्चा ज्यादा

राजनीतिक गलियारों में यह बात अक्सर चर्चा का विषय रही है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेन्द्र सिंह तोमर दोनों की दिल्ली तक मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। दोनों नेता मध्यप्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं और भाजपा में उनके अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र और समर्थकों का बड़ा नेटवर्क माना जाता है।
यही वजह है कि जब दोनों नेता एक ही मंच पर दिखाई देते हैं तो ग्वालियर-चंबल की राजनीति से लेकर भोपाल और दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू होना स्वाभाविक है।

हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ दोनों नेताओं की मुलाकातों और तस्वीरों ने भी राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा बटोरी थी।

ऐसे में आज ग्वालियर में दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ एक ही मंच साझा करना राजनीतिक रूप से खासा दिलचस्प माना जा रहा है।

और तभी क्यों उठ रहा है ‘मुख्यमंत्री की भूमिका’ का सवाल?

दरअसल, मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर शीर्ष स्तर पर मंथन की अटकलें लगातार राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। उज्जैन के जमीन मामले में मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों की जमीनों का नाम सामने आने के बाद भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।

हालांकि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे और राजनीतिक आरोप सामने आते रहे हैं और शीर्ष नेतृत्व द्वारा किसी बदलाव का कोई आधिकारिक संकेत फिलहाल सामने नहीं आया है।
फिर भी सियासी अटकलों का बाजार गर्म है—और यहीं से आज के ग्वालियर कार्यक्रम की तस्वीरों का महत्व बढ़ जाता है।

अगर’ ऐसा हुआ तो कौन?

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि यदि भविष्य में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर कोई बड़ा फैसला करता है तो नरेन्द्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा में आ सकते हैं।
हालांकि इसे फिलहाल सिर्फ राजनीतिक विश्लेषण और अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। न तो मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा हुई है और न ही इन दोनों नेताओं को लेकर ऐसा कोई संकेत सामने आया है।
इसके बावजूद राजनीति में कई बार तस्वीरें बयान से ज्यादा चर्चा पैदा कर देती हैं।
और आज ग्वालियर में अगर मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ नरेन्द्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक ही मंच पर दिखाई देते हैं, तो कैमरों की नजर सिर्फ भाषणों पर नहीं होगी…नजरें मंच की ‘केमिस्ट्री’ पर भी होंगी।
किसके चेहरे पर कितनी गर्मी, किसके चेहरे पर कितनी मुस्कान?

ग्वालियर-चंबल की राजनीति को समझने वालों के लिए आज का मंच कई मायनों में दिलचस्प होगा। कौन किसके पास बैठेगा, किससे कितनी देर बातचीत होगी, किसके साथ कौन तस्वीर खिंचवाएगा और मंच से कौन किसका नाम किस अंदाज में लेता है—इन छोटी-छोटी राजनीतिक ‘बॉडी लैंग्वेज’ पर भी नजर रहेगी।

क्योंकि भाजपा की राजनीति में कई बार मंच पर बैठने की व्यवस्था भी अपने आप में एक संदेश बन जाती है।

मंच पर होंगे कई और ‘पावर सेंटर’

कार्यक्रम में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह सहित सांसद-विधायक, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव तथा विभिन्न आयोगों एवं प्राधिकरणों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष भी शामिल होंगे।
ग्वालियर-चंबल अंचल के बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी भी कार्यक्रम को बड़ा जनसमूह प्रदान करेगी।
यानी मंच पर सरकार, संगठन, दिल्ली और ग्वालियर-चंबल की राजनीति—चारों की झलक दिखाई देने वाली है।
अब असली सवाल…
मध्यप्रदेश की राजनीति में जब नेतृत्व को लेकर चर्चाएं चल रही हों और उसी दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के दो बेहद प्रभावशाली वरिष्ठ नेता एक ही मंच साझा करें, तो सवाल उठना लाजिमी है—
क्या यह सिर्फ संयोग है या सियासत की कोई नई पटकथा लिखी जा रही है?

फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
लेकिन इतना तय है कि आज बलराम जयंती महोत्सव में मंच पर होने वाली मुलाकातें, बातचीत और तस्वीरें ग्वालियर से निकलकर भोपाल और दिल्ली तक राजनीतिक चर्चा का विषय जरूर बन सकती हैं।
क्योंकि राजनीति में कभी-कभी मंच वही होता है… लेकिन मायने बदल जाते हैं।

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