किसानों को स्मार्ट फोन खरीदने में भी मदद मिलेगी
बीमा कंपनियों की दादागिरी पर कसी लगाम
बीमा राशि के भुगतान में तेजी आयेगी
केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हित में बड़ा परिवर्तन करते हुए उन्हें देरी से भुगतान की समस्या को समाप्त करने की पहल की है।
इस योजना में हुए परिवर्तनों के अनुसार जिन बीमा कंपनियों द्वारा फसल कटाई के दो महीने के अंदर किसानों के फसल बीमा दावों का निराकरण नहीं किया जाता है तो उन्हें स्वत: अनुमोदित और निराकृत मान लिया जायेगा। केन्द्र सरकार ने यह कदम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिये उठाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।
योजना में बदलाव के नये नियम के अनुसार 30 नवम्बर के बाद जो किसान फसल बीमा राशि का दावा करेंगे और यदि बीमा कंपनियां दो महने के भीतर दावों का निराकरण नहीं करती हैं तो उन्हें निराकृत मान लिया जायेगा।
सामान्यत: बीमा नीति के अंतर्गत बीमा दावों को बीमा कंपनियों द्वारा अनुमोदित किये जाने की जरूरत होती थी। नये नियम में बीमा कंपनियों को बीमा दावे के सत्यापित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि दो महीने के भीतर वे बीमा के दावे के निराकरण करने की औपचारिकताएं पूरी नहीं करते हैं तो बीमा दावों का निराकरण स्वत: अनुमोदित मान लिया जायेगा।
स्वत: अनुमोदित करने की इस मार्गदर्शी नियम से किसानों को नई उम्मीद बंधी है। इससे किसानों को इस योजना में आ रही परेशानी से निजात मिलेगी और उन्हें भुगतान में विलम्ब नहीं होगा। अभी तक यह होता है कि किसानों को बीमा की दावों की राशि समय पर नहीं मिलती है तो अगली फसल तैयार करने के लिये उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं होते।
भारत सरकार ने योजना की केन्द्रीयकृत वेबसाइट यह प्रावधान कर दिया है कि फसल बीमा की राशि दो महीनों के भीतर स्वत: निराकृत हो जायेगी। अब बीमा कंपनियों को किसानों के लिये जागरुकता बढ़ाने के लिये इकट्टा की गई कुल प्रीमियम का 0.5 प्रतिशत खर्च करना पड़ेगा। राज्य सरकार अपने बजट में से दो प्रतिशत किसानों राशि के बीमा कार्यक्रम के लिये उपलब्ध करायेगी। इन परिवर्तनों से बीमा की दावा राशि के निराकरण में तेजी आयेगी। इस दो प्रतिशत की राशि देने से नुकसान और फसल के आंकलन में होने वाले खर्च में मदद मिलेगी। इससे स्मार्ट फोन खरीदने में भी मदद मिलेगी जिसके माध्यम से नुकसान की भरपाई का आंकलन करने में भी उन्हें सहूलियत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में बदलाव से किसानों को समय पर भुगतान मिलने में मदद मिलेगी।
इससे पहले सरकार ने बीमा कंपनियों पर किसानों को 12 प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करने का निर्णय लिया था यदि वे दो महीनों से ज्यादा समय बीमा राशि के भुगतान में लेती हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्यों को भी 12 प्रतिशत की ब्याज दर से भुगतान किया जाना है यदि वे सब्सिडी जारी करने में तीन महीने की ज्यादा का समय लगाते हैं। इस योजना के अंतर्गत किसानों को कुल प्रीमीयम का एक से दो प्रतिशत के बीच भुगतान करना होता है। शेष राशि राज्य और केन्द्र द्वारा बराबर-बराबर दी जाती हैं।