क्या बदले हुए परिवेश में अब मध्यप्रदेश जैसे राज्य में पार्टी कुछ बड़ा परिवर्तन करने के मूड में है। ऐसा इसलिए क्यों कि अभी तक जिनके इर्द गिर्द मध्यप्रदेश की राजनीति चलायमान रही है उन्हे पार्टी संगठन ने केंद्रीय संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति से विश्राम देकर सत्यनारायण जटिया के हाथ मजबूत किए हैं। चूंकि अगले दो वर्ष विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं साथ ही मध्यप्रदेश के चंबल अंचल में पार्टी की लोकप्रियता में कमी और ज्योतिरादित्य जैसे नेताओं की भूमिका को लेकर पार्टी नेतृत्व पशोपेश में है अतः ये सभी स्थितियां बड़े बदलाव का इशारा कर रही हैं।
भाजपा में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े बदलावों का मध्य प्रदेश की सियासत पर असर संभव है। यहां अगले साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए पार्टी संगठन के स्तर पर कुछ बदलाव कर सकती है। चूंकि मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता में है, इसलिए सरकार के स्तर पर भी कुछ बदलाव की संभावना है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव मध्य प्रदेश के सत्यनारायण जटिया का आना काफी महत्वपूर्ण है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भले ही अगला बड़ा मिशन 2024 का लोकसभा चुनाव हो, लेकिन उसके पहले होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी वह लगातार रणनीति बनाने में जुटा हुआ है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में अगले साल नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने हैं और यह दोनों राज्य लोकसभा की रणनीति के तहत भी काफी महत्वपूर्ण है। इनमें मध्य प्रदेश में अभी भाजपा सत्ता में है, जबकि राजस्थान में वह विपक्ष में है। राजस्थान के राजनीतिक माहौल को भाजपा अपने पक्ष में मान रही है, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसी स्थिति नहीं है।
जमीनी हालात पर नजर
मध्य प्रदेश में भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता सत्यनारायण जटिया को केंद्रीय संसदीय बोर्ड में शामिल किया है। बोर्ड में होने के नाते जटिया केंद्रीय चुनाव समिति में भी पदेन सदस्य रहेंगे। बोर्ड में अब तक मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर रहे थे। यह महत्वपूर्ण है कि जटिया भी मध्य प्रदेश से हैं वह प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री एवं विभिन्न पदों पर रह चुके हैं।
इससे केंद्रीय संसदीय बोर्ड से लेकर केंद्रीय चुनाव समिति तक मध्य प्रदेश के मामलों में जटिया की राय महत्वपूर्ण होगी। केंद्रीय नेतृत्व को शिवराज सिंह चौहान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा आने के बाद राज्य के भाजपा के समीकरण काफी बदले हैं।