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ग्वालियर के सबसे प्रमुख सनातन धर्म मंदिर में विवाद के हालात,कुछ देर बाद होगी साधारण सभा की बैठक

प्रवीण दुबे

तमाम सदस्यों ने संविधान के खिलाफ वार्षिक सदस्यता शुल्क बढ़ाये जाने का किया विरोध, बैठक में हो सकता है हंगामा 

ग्वालियर के सबसे प्रमुख मंदिरों में शामिल सनातन धर्म मंदिर साधारण सभा की बैठक में हंगामा होने की आशंका है, यह बैठक कुछ देर बाद अर्थात दोपहर 2 बजे से मंदिर में आमंत्रित की गई है।

इस बैठक में वार्षिक सदस्यता शुल्क बढाकार 1100 सौ रूपए किया जाना प्रस्तावित है। इसको लेकर सनातन धर्म मंदिर के सैकड़ों सदस्यो में आक्रोश देखा जा रहा है।
मंदिर से जुड़े ओमप्रकाश अग्रवाल लल्ला का कहना है की सदस्यों की सहमति के बिना किसी भी निर्धारित प्रक्रिया को अमल में लाये बिना मंदिर के संविधान में निहित प्रावधानों को कैसे बदला जा सकता है।
एक अन्य सदस्य अरविन्द दूदावत का कहना है कि वार्षिक सदस्यता शुल्क की बढ़ोतरी करना ठीक नहीं है इसे पूर्व की भांति यथावत रखा जाना चाहिए।
मंदिर के पूर्व पदाधिकारी संजय सिंघल ने कहा कि मंदिर की आय बढ़ाने के लिए सभी सदस्यों के साथ पहले विचार विमर्श जरुरी है, यह तरीका उचित नहीं है कि वार्षिक सदस्यता शुल्क बढ़ा दिता जाए.
एक अन्य सदस्य ओमप्रकाश जाजोरिया ने भी वार्षिक सदस्यता शुल्क नहीं बढ़ाने की बात कही, उनका कहना था कि पहले ही से सदस्यता शुल्क जरुरत से ज्यादा कर दिया गया है और अब वार्षिक सदस्यता बढ़ाने की बात की जा रही है इसका विरोध होना चाहिए।
मंदिर के सदस्य गिर्राज सोमानी ने कहा कि मंदिर में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ाने की चर्चा होना चाहिए वार्षिक सदस्यता का बढ़ाया जाना समझ से परे है।
उधर  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सदस्यों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है क्यों कि मंदिर के पास पूर्व से ही लगभग 4 करोड़ से अधिक की धनराशि बैंक में एकत्रित है लेकिन उसका समुचित उपयोग कैसे हो इसकी कोई रूप रेखा मंदिर ने तैयार नहीं की है। सदस्यों का मानना है मंदिर के पास पर्याप्त पैसा पहले से ही जमा है फिर पैसे की कमी का रोना रोकर वार्षिक सदस्यता शुल्क क्यों बढ़ाया जा रहा है ?

1923 में जीवाजी राव सिंधिया ने. कराई थी स्थापना,बिड़ला ने जयपुर से 95 साल पहले तैयार  कराई थी भगवान चक्रधर की  प्रतिमाएं

सनातन धर्म मंदिर हेतु  उद्योगपति जुगल किशोर बिड़ला अौर घनश्याम दास बिड़ला ने जयपुर में 95 साल पहले भगवान चक्रधर की दो प्रतिमाएं तैयार कराई थीं। दोनों ही प्रतिमाअों का स्वरूप एक जैसा है। इनमें से एक प्रतिमा दिल्ली के बिड़ला मंदिर में स्थापित की गई अौर दूसरी श्री सनातन धर्म मंदिर में। श्री सनातन धर्म मंदिर की स्थापना 1923 में वैशाख शुक्ल एकादशी पर महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की थी।

सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए सरदार घोरपोड़े, पं. विधेश्वरी प्रसाद मिश्र, वासुदेव नंदन भारद्वाज, लाला गोवर्धन दास, ब्रजभूषण आदि ने संस्था की स्थापना का निर्णय लिया था। अन्य लोगों के सहयोग से संस्था का निर्माण हुआ अौर श्री सनातन धर्म मंडल नाम से संस्था की स्थापना की गई। तब शहर के दानदाताओं के सहयोग धन एकत्र कर मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। मंदिर का निर्माण पं. विंधेश्वरी प्रसाद मिश्र ने कराया। श्री मिश्र सिंधिया रियासत के मुख्य वास्तुविद थे। उन्होंने ही मंदिर का डिजाइन तैयार किया था। मंदिर के हॉल के निर्माण में उन्होंने उस समय अारसीसी का उपयोग किया जब अारसीसी प्रचलन में नहीं था।

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